कोरबा शहर में नाबालिग किशोरी से छेड़छाड़ के आरोप में पुलिस ने एक 67 वर्षीय कारोबारी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान पावर हाउस रोड स्थित शारदा टेलीकॉम के संचालक चेतन चौधरी के रूप में हुई है।
कोरबा/स्वराज टुडे : कोरबा शहर में नाबालिग किशोरी से छेड़छाड़ के आरोप में पुलिस ने एक 67 वर्षीय कारोबारी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान पावर हाउस रोड स्थित शारदा टेलीकॉम के संचालक चेतन चौधरी के रूप में हुई है। पीड़िता की शिकायत पर सिटी कोतवाली पुलिस ने पॉक्सो एक्ट समेत संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
जानें क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, शारदा टेलीकॉम में ही बतौर सेल्सगर्ल कार्यरत 16 वर्षीय किशोरी ने 67 वर्षीय संचालक चेतन चौधरी के खिलाफ अश्लील हरकत और छेड़छाड़ के साथ गाली-गलौज करने का आरोप लगाया था। किशोरी ने घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी, जिसके बाद परिवार के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई। मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज की। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
कोर्ट में अग्रिम जमानत खारिज होते ही पुलिस ने लिया एक्शन
गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में अग्रिम जमानत आवेदन पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा ने जमानत का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष मामले की गंभीरता और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का उल्लेख किया। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी रही।
मंगलवार को पुलिस को मुखबिर से जानकारी मिली कि आरोपी शहर में ही छिपा हुआ है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और पीड़िता के बयान समेत अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शहर के व्यापारियों में चिंता और दहशत
इस घटना को लेकर व्यापारियों में चिंता और दशहत का माहौल साफ देखा जा रहा है । उनका कहना है कि महिला कर्मचारियों की शिकायत मात्र से दुकानदारों के विरुद्ध FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लेना न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता। पहले मामले में पूरी जांच होनी चाहिए । पर्याप्त साक्ष्य और गवाहों की मौजूदगी में ही आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए ।
उनकी चिंता का सबसे बड़ा कारण यह है कि शहर के अधिकांश प्रतिष्ठानों में आज युवतियां और महिलाएं कार्यरत हैं । उन्हें दुकान की देखभाल और समस्त कार्यों के अलावा ग्राहकों से मधुर व्यवहार रखते हुए प्रोडक्ट की सेलिंग करने दिशा निर्देश दिया जाता है । इस दौरान उनकी गलतियों पर हल्की फुल्की डांटना और समझाइश देना एक सामान्य बात है । अगर ऐसे हालात में कोई महिला कर्मचारी अपने मालिक के प्रति दुर्भावना और रंजिश रखते हुए शिकायत दर्ज कराती है और उस पर पुलिस डायरेक्ट एक्शन लेती है तो इसे बिल्कुल जायज नहीं ठहराया जा सकता । हालांकि सभी महिला कर्मचारी ऐसे नहीं होते । ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे जो अपने प्रतिष्ठान में बड़ी मेहनत, ईमानदारी और पूरी निष्ठा के साथ काम करती हैं । लेकिन दुर्भावनावश अगर कोई महिला कर्मचारी अपने मालिक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराती है तो उस पर संकट आना तय है । यह सीधा-सीधा महिला सुरक्षा कानून का दुरुपयोग है। लिहाजा ऐसे आरोपों से बचने के लिए दुकानदारों के सामने एक ही विकल्प बचता है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में महिला कर्मचारी रखना ही बंद कर दें ।

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