छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: सामाजिक चिंतक कैलाश चंद्र ने कहा है कि अलग-अलग कारणों से दुनिया के लोग भारत की तरफ आशा भरी निगाहें से देख रहे हैं और दूसरा पक्षी है कि कुछ खास वजह से हमारे यहां के लोग पश्चिमी देशों की तरफ जाने को उत्सुक है। आज की आवश्यकता भारत को शक्तिशाली संपन्न देश बनाने की है और जब ऐसा होगा तो बहुत सारी समस्याएं यूं ही निराकृत हो सकेंगे। अग्रसेन कन्या महाविद्यालय में कल्चरल मार्क्सवाद विषय पर व्याख्या देते हुए उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया कि भिन्न-भिन्न वर्गों को एक दूसरे से लड़ाना हे कल्चरल मार्क्सवाद का बुनियादी सिद्धांत है। छत्तीसगढ़ बाल कल्याण आयोग के अध्यक्ष वर्णिका शर्मा सहित अनेक प्रतिष्ठित लोगों की उपस्थिति कार्यक्रम में रही।

कोरबा में कल्चरल मार्क्सवाद स्टडी सर्किल के द्वारा इस व्याख्यान का आयोजन किया गया। विद्या की देवी सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। शिक्षा, चिकित्सा, मीडिया व्यवसाय प्रबंधन और अन्य क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स की उपस्थिति कार्यक्रम में रही। मुख्य वक्ता के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश चंद्र ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कल्चरल मार्क्सवाद एक ऐसी विचारधारा का नाम है जो पूरी दुनिया को अपने कब्जे में कर लेना चाहता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में उथल-पुथल मचाने के लिए इंजीओ, फिल्म और ऐसे क्या आयाम का उपयोग अमेरिका लगातार करता रहा है। इसके पीछे हेतु यह रहा कि भारत को कमजोर किया जाए। इसलिए हमारा कहना है कि संघर्ष केवल विचारधारा के स्तर पर नहीं बल्कि कई देशों को नुकसान पहुंचाने की एक गंदी कोशिश का है और इसे हतोत्साहित करना होगा। जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के विज्ञापन और उसके पीछे भागती लोगों की जिंदगी को लेकर अपने बताया कि किस तरह अमेरिका में इसके इस्तेमाल के वजह से 9000 महिलाएं बीते दशकों में कैंसर का शिकार हुई और उन्होंने अदालत के स्तर तक लड़ाई लड़ी। दूसरों के अधिकारों को लेकर हाय तौबा मचाने वाले अमेरिका ने इन महिलाओं के बजाय कंपनी का साथ दिया। हालांकि लंबे संघर्ष के बाद कुछ ही महिलाएं न्याय प्राप्त कर सकी।
परिवार तंत्र को मिटा दिया पश्चिमी देशों में
व्याख्यान सत्र में विचारक विश्वजीत सिंह ने भी संबंधित विषय पर लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कल्चरल मार्क्सवाद की नजर में समाज में हर कोई शोषक है। उसके द्वारा परिवारों के हर सदस्य को इसी दृष्टि से प्रस्तुत करने की कोशिश की जाती रहीं है। और इसी का नतीजा रहा कि यूरोप और अमेरिका में परिवार नाम की संस्था ही विखंडित होकर रह गई। भारत के एक कार्यकर्ता ने पिछले वर्षों में जब पश्चिमी देशों की यात्रा की तो उन्होंने पाया कि एक स्कूल में छात्राओं के साथ छोटे बच्चे भी थे और वह पालना घर का हिस्सा थे। यह जानकर हैरानी हुई की अवयस्क छात्राओं ने उन्हें जन्म दिया था। यह पश्चिमी देशों में गिरते हुए सामाजिक स्तर की स्थिति थी। विश्वजीत सिंह ने यह भी कहा कि स्थापित सत्य को लकारने का भी एक नाम कल्चरल मार्क्सवाद है। उसका मानना है कि प्रगतिशील और अल्ट्रा मॉडर्न समाज तैयार होने के साथ परिवर्तन कर सकता है, भले ही मान्यता के स्तर पर सब कुछ शून्य क्यों ना हो। और यही एक कारण है कि पश्चिमी देशों में परिवार तंत्र नमक व्यवस्था लगभग समाप्त हो गई है।
इस अवसर पर श्री कैलाश चंद्र जी क्षेत्र प्रचार प्रमुख,
श्री विश्वजीत सिंह जी क्षेत्र प्रमुख कल्चरल मार्क्सवाद अध्ययन समूह, डॉ वर्णिका शर्मा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग, श्री बजरंग अग्रवाल जी अग्रवाल सभा अध्यक्ष कोरबा, श्री गोपाल अग्रवाल जी महाविद्यालय शिक्षण समिति अध्यक्ष के अलावा अध्येता अक्षदा पुण्डलिक, नीति तिवारी, संगीता तिवारी, देवेंद्र पिपरिया और शीलू साहू उपस्थित रहे।

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