आगरा/स्वराज टुडे: उत्तर प्रदेश के आगरा में सिकंदरा पुलिस थाना इलाके में पति सुरेंद्र शर्मा की हत्या कर लाश को बाथरूम में दफनाने वाले सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश हो गया है. 4 जुलाई 2026 को आरोपी पत्नी रूबी शर्मा को जेल भिजवा दिया गया है. यह मर्डर मिस्ट्री आगरा की सहायक पुलिस आयुक्त डीएसपी अमीषा की बेहतरीन पुलिसिंग से सुलझी है. अमीषा के पिता विनोद कुमार सिंह भी उत्तर प्रदेश पुलिस में IPS अधिकारी रह चुके हैं. खास बात यह है कि जिस साल पिता पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए, ठीक उसी साल बेटी यूपी पुलिस में डीएसपी रैंक की अफसर बनीं.
पहली पोस्टिंग में सामने आया जिंदगी का सबसे पेचीदा और अजीब मामला
मीडिया से खास बातचीत में अमीषा ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस में 2022 बैच की डीएसपी हैं. 14 फरवरी 2025 से आगरा में बतौर सहायक पुलिस आयुक्त अपनी सेवाएं दे रही हैं. एसीपी आगरा के रूप में यह उनकी पहली पोस्टिंग है और पत्नी द्वारा पति की हत्या कर शव को बाथरूम में दफनाने जैसा खौफनाक मामला भी उनके करियर में पहली ही बार सामने आया है.

आगरा में पत्नी ने पति को मारकर बाथरूम में दफनाया, लेडी सिंघम ACP अमीषा ने ऐसे किया सनसनीखेज खुलासा
आगरा के बाथरूम हत्याकांड का खुलासा करना चुनौतीपूर्ण था. सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि पति सुरेंद्र शर्मा की कातिल खुद उसकी पत्नी रूबी शर्मा ही थी, और उससे भी ज्यादा अजीब बात यह थी कि खुद रूबी शर्मा ने ही थाने जाकर पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी.
रूबी शर्मा पर किसी को नहीं हुआ शक
डीएसपी अमीषा ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 26 मई 2026 को रूबी शर्मा और सुरेंद्र शर्मा के भाई अनिल शर्मा ने सिकंदरा पुलिस थाने पहुंचकर सुरेंद्र शर्मा की मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. उन्होंने रिपोर्ट में लिखवाया था कि सुरेंद्र शर्मा अचानक लापता हो गया है और उसके बारे में कोई सुराग नहीं मिल रहा है. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की. खुद एसीपी अमीषा घटनास्थल का मुआयना करने मौके पर गईं. उन्होंने आरोपी पत्नी रूबी शर्मा, पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की थी. शुरुआती जांच में किसी ने भी रूबी के कातिल होने का रत्ती भर भी शक नहीं जताया, जिसके चलते यह केस लगातार पेचीदा होता चला गया.

भरतपुर का वो झगड़ा और कातिल पत्नी का चेहरे पर बिना शिकन वाला झूठ
सुरेंद्र शर्मा की तलाश में आगरा पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, तो एक अहम सुराग हाथ लगा. पता चला कि 15-16 मई 2026 को सुरेंद्र शर्मा राजस्थान के भरतपुर में अपनी रिश्तेदारी में गया हुआ था. वहां उसने शराब पीकर जमकर झगड़ा किया था, जिसके बाद रिश्तेदारों ने आगरा में उसकी पत्नी को फोन कर शिकायत की थी और कहा था कि वे उसके खिलाफ पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाएंगे. इस घटना के बाद सुरेंद्र आगरा लौट आया था, लेकिन 18 मई से वह अचानक लापता हो गया. आस-पास के लोग जब भी सुरेंद्र शर्मा के बारे में उसकी पत्नी रूबी से पूछते, तो वह अपने चेहरे पर बिना किसी शिकन या घबराहट के बेहद सामान्य ढंग से कह देती थी कि वे किसी काम से बाहर गए हुए हैं.

कोई डिजिटल सबूत न होने से उलझता गया सुरेंद्र शर्मा मर्डर केस
डीएसपी अमीषा के अनुसार, अमूमन आज के दौर में जब भी किसी की हत्या या कोई बड़ी वारदात होती है, तो पुलिस मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट या पति-पत्नी के बीच किसी त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग के मामलों में डिजिटल सबूत के जरिए मुस्तैदी से खुलासे तक पहुंच जाती है. मगर सुरेंद्र हत्याकांड में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इसमें न तो मोबाइल का इस्तेमाल हुआ था और न ही दोनों में से किसी का कोई अवैध संबंध वाला एंगल था. केस उस वक्त और ज्यादा उलझता हुआ प्रतीत हो रहा था जब खुद कातिल रूबी शर्मा ही अपने पति की तलाश में पुलिस और परिजनों का साथ देने का नाटक कर रही थी. इस पूरे मामले में वही इकलौती गवाह भी बनी हुई थी और वही असल गुनाहगार भी थी.
सुरेंद्र शर्मा शराब पीकर रूबी से करता था मारपीट
सुरेंद्र शर्मा और रूबी शर्मा की दो बेटियां हैं. वारदात वाले दिन वे दोनों अपनी दादी के साथ ताऊ के घर गई हुई थीं, जिसके कारण घर पर दोनों अकेले थे. पुलिस जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि सुरेंद्र शर्मा कोई कामकाज नहीं करता था और शराब पीकर आए दिन अपनी पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट करता था. पूरे घर का खर्च सुरेंद्र की मां की पेंशन के भरोसे ही चल रहा था. जब पुलिस के सामने घरेलू हिंसा और रोज-रोज की मारपीट वाली बात आई, तो पुलिस ने इसी को मुख्य लीड मानकर रूबी शर्मा पर कड़ाई से शक जताना शुरू किया. शुरुआत में तो वह पुलिस को लगातार गुमराह करती रही, मगर जब पुलिस ने सख्ती बरती तो उसने टूटकर सारा सच उगल दिया.

नींद की 20 गोलियां और बाथरूम के कच्चे फर्श का खौफनाक राज
डीएसपी अमीषा के अनुसार, रूबी शर्मा ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने पूरी वारदात को अकेले ही कई चरणों में अंजाम दिया था. यही वजह थी कि किसी को भी 3 जुलाई 2026 तक इस हत्याकांड की भनक तक नहीं लगी. रूबी ने बताया कि जब सुरेंद्र शर्मा ने भरतपुर में शराब पीकर रिश्तेदारों से लड़ाई की थी, तो रूबी को डर सताने लगा था कि अब पुलिस उसके घर आएगी, अदालती केस होगा और उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ेंगे. इसी खौफ के बीच जब सुरेंद्र शर्मा भरतपुर से घर लौटा, तो रूबी ने उसे खाने में नींद की 15-20 गोलियां मिलाकर खिला दीं. जब सुरेंद्र गहरी नींद में सो गया, तो उसने बड़ी बेरहमी से उसकी हत्या कर दी.
मजदूरों से मंगवाई मिट्टी और राजमिस्त्री से लगवा दिया पक्का फर्श
सुरेंद्र शर्मा के घर में बने बाथरूम का फर्श कच्चा था. रूबी ने पति की हत्या करने के बाद उसके शव को बाथरूम में घसीटकर पटक दिया. इसके बाद अगले दिन उसने मजदूरों से मिट्टी मंगवाई. शातिर दिमाग का इस्तेमाल करते हुए उसने मिट्टी घर के अंदर न डलवाकर घर के सामने बाहर सड़क पर डलवाई, ताकि किसी को शक न हो. फिर वह बाल्टी में भर-भरकर मिट्टी अंदर लाती रही और बाथरूम में पड़े पति के शव पर डालती रही. जब शव मिट्टी के नीचे पूरी तरह अच्छी तरह से दफन हो गया, तो उसने मिस्त्री को बुलाया और बाथरूम में पति की लाश के ठीक ऊपर पक्का फर्श डलवा दिया. शव केवल एक-दो दिन ही पुराना था, इसलिए मिस्त्री और पड़ोसियों को किसी भी तरह की दुर्गंध नहीं आई और उसका राज दफन रहा.

नायब तहसीलदार से डीएसपी तक: एसीपी अमीषा की प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरी
इस सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने वाली डीएसपी अमीषा की अपनी एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है. अमीषा का जन्म 12 मई 1997 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आईपीएस अधिकारी विनोद कुमार सिंह के घर हुआ था.
उत्तर प्रदेश राज्य पुलिस सेवा (पीपीएस) से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में प्रमोट हुए विनोद कुमार सिंह साल 2022 में डीआईजी जेल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. कॉलेज की शिक्षा पूरी करने के बाद बेटी अमीषा ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू की और अपने पहले पड़ाव में नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हुईं.
अपने पिता की तरह खाकी वर्दी पहनने का सपना पूरा करने के लिए अमीषा ने अपनी मेहनत जारी रखी और साल 2022 में उनका चयन डीएसपी (पुलिस उपाधीक्षक) के पद पर हो गया. खास बात यह भी है कि अमीषा ने बतौर नायब तहसीलदार भी आगरा में ही अपनी सेवाएं दी थीं. डीएसपी बनने के बाद उन्हें आगरा ग्रामीण में पहली पोस्टिंग मिली और इसी साल फरवरी में उन्होंने आगरा शहर में बतौर सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) कार्यभार संभाला, जहां उन्होंने अपनी कार्यकुशलता से इस बड़े मामले का पर्दाफाश किया.
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