छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: वेदांता-बालको द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि पिछले 10 वर्षों में कंपनी समूह ने सरकार के खजाने में 5 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है। इस प्रचार से ऐसा संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है मानो कंपनी ने देश और सरकार पर कोई विशेष उपकार किया हो।
मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि सरकार के खजाने में जमा किया गया प्रत्येक रुपया कंपनी द्वारा कानून के तहत देय आयकर, जीएसटी, सीमा शुल्क, रॉयल्टी एवं अन्य करों का भुगतान है। यह कोई दान, उपकार या परोपकार नहीं, बल्कि प्रत्येक उद्योग की वैधानिक जिम्मेदारी है। इसलिए कर भुगतान को सामाजिक योगदान बताकर उसका प्रचार करना जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
असल प्रश्न यह है कि कोरबा की धरती से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर हजारों करोड़ रुपये का लाभ कमाने वाली कंपनी ने कोरबा और यहां की जनता को वास्तव में क्या दिया?
कोरबा आज भी प्रदूषण, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, स्थानीय युवाओं के रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल सुविधाओं तथा आधारभूत विकास जैसी अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है। यदि कंपनी अपने योगदान का इतना बड़ा दावा कर रही है, तो उसे इन सवालों का भी जवाब देना चाहिए।
वेदांता-बालको ने कोरबा में हॉकी खेल के विकास के लिए हॉकी को गोद लेने तथा राष्ट्रीय स्तर का एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान बनाने का सार्वजनिक वादा किया था। दुर्भाग्य से आज तक यह वादा पूरा नहीं किया गया। परिणामस्वरूप कोरबा के प्रतिभाशाली हॉकी खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है और अनेक प्रतिभाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। यदि कंपनी वास्तव में सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने के लिए प्रतिबद्ध है तो सबसे पहले उसे अपने इस अधूरे वादे को पूरा करना चाहिए।
इसी प्रकार आईटी कॉलेज की स्थापना के समय भी वेदांता-बालको ने कॉलेज के विकास एवं संचालन के लिए आर्थिक सहयोग देने का आश्वासन दिया था। लेकिन आज तक उस आश्वासन के अनुरूप पर्याप्त आर्थिक सहयोग उपलब्ध नहीं कराया गया। परिणामस्वरूप कॉलेज का संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है और संस्था बंद होने की स्थिति तक पहुंच गई है। इससे क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में पड़ गया है। क्या यही कंपनी का सामाजिक उत्तरदायित्व है?
विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च करने वाली कंपनी यदि अपने ही किए गए वादों को पूरा नहीं कर पा रही है, तो उसके तथाकथित सामाजिक योगदान के दावे स्वतः संदेह के घेरे में आ जाते हैं।
यदि वेदांता-बालको वास्तव में अपनी उपलब्धियों पर गर्व करता है, तो वह कोरबा की जनता के सामने एक सार्वजनिक श्वेत पत्र (White Paper) जारी करे, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया जाए—
* पिछले 10 वर्षों में कोरबा से कितना लाभ अर्जित किया गया।
* कोरबा जिले के विकास पर वास्तविक रूप से कितना निवेश किया गया।
* स्थानीय युवाओं को कितने स्थायी रोजगार दिए गए।
* प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण पर क्या ठोस कार्य किए गए।
* CSR की राशि किन-किन योजनाओं पर और किस पारदर्शिता के साथ खर्च की गई।
* हॉकी को गोद लेने और एस्ट्रोटर्फ मैदान निर्माण का वादा अब तक क्यों पूरा नहीं हुआ।
* आईटी कॉलेज को किए गए आर्थिक सहयोग के वादे का पालन क्यों नहीं किया गया।
कर देना कानूनी बाध्यता है, लेकिन जिस क्षेत्र से उद्योग अपनी समृद्धि प्राप्त करता है, उसके विकास में भागीदारी निभाना नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है।
कोरबा की जनता को चमकदार विज्ञापनों की नहीं, बल्कि स्वच्छ पर्यावरण, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक खेल सुविधाओं, स्थानीय युवाओं के रोजगार और क्षेत्र के समग्र विकास की आवश्यकता है।
वेदांता-बालको को यह समझना होगा कि जनता अब विज्ञापनों से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले कार्यों से कंपनी का मूल्यांकन करेगी।
कोरबा की जनता का स्पष्ट संदेश है—“प्रचार नहीं, विकास का हिसाब दीजिए; वादे नहीं, उन्हें पूरा करके दिखाइए।”
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