छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: जिले की प्रमुख औद्योगिक इकाई बालको वेदांता में स्थानीय युवाओं और मजदूरों को रोजगार दिए जाने के मुद्दे पर एक नया विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन द्वारा बालको वेदांता प्रबंधन से स्थानीय मजदूरों एवं कर्मचारियों की संख्या संबंधी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि श्रम विभाग के पास ही इस पत्र का विधिवत संधारण या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं बताया जा रहा है।

मामले को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। यदि मंत्री द्वारा कंपनी से स्थानीय रोजगार संबंधी जानकारी मांगी गई थी, तो वह पत्र विभागीय अभिलेखों में क्यों नहीं है? क्या पत्र जारी होने के बाद उसकी फाइलिंग और रिकॉर्ड संधारण में लापरवाही बरती गई, या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण है?
स्थानीय श्रमिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बालको जैसी बड़ी औद्योगिक इकाई में स्थानीय लोगों को रोजगार देने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। ऐसे में यदि श्रम मंत्री ने स्वयं जानकारी मांगी थी, तो उसके जवाब और विभागीय कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए।

वहीं, विपक्षी दलों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि पत्र वास्तव में जारी हुआ था और उसका रिकॉर्ड विभाग में नहीं है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि पत्र का क्या हुआ और कंपनी द्वारा क्या जवाब दिया गया।
हालांकि, इस संबंध में श्रम विभाग अथवा बालको वेदांता प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
उठ रहे प्रमुख सवाल
● श्रम मंत्री द्वारा भेजे गए पत्र का विभागीय रिकॉर्ड कहां है?
क्या पत्र का जवाब बालको वेदांता ने दिया था?
● यदि जवाब मिला था तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई ?
● क्या रिकॉर्ड संधारण में गंभीर लापरवाही हुई है?
● पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कब होगी?

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