छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा माननीय श्रीमती सोनी तिवारी की अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत लंबित आपराधिक प्रकरण क्रमांक 204/2020 में महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए अजय कुमार साहू को दोषी ठहराया है।
प्रकरण के अनुसार, इलाहाबाद बैंक, शाखा तिलकेजा, जिला कोरबा द्वारा आरोपी को व्यवसाय हेतु ₹90,000 का ऋण प्रदान किया गया था। ऋण की अदायगी में चूक होने पर आरोपी का ऋण खाता एनपीए घोषित हो गया। इसके पश्चात आरोपी ने बैंक के पक्ष में ₹76,000 का चेक जारी किया, जो बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर “Funds Insufficient (अपर्याप्त निधि)” के कारण अनादरित हो गया। बैंक द्वारा विधिक नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपी ने निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया, जिसके बाद न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया।
विचारण के दौरान परिवादी बैंक की ओर से दस्तावेजी साक्ष्य एवं गवाह प्रस्तुत किए गए, जबकि आरोपी अपने बचाव में कोई प्रभावी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। उपलब्ध साक्ष्यों एवं अभिलेखों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत 06 माह के साधारण कारावास से दंडित किया।
साथ ही न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 357(3) के अंतर्गत आरोपी को एक माह के भीतर परिवादी बैंक को ₹1,23,000 (एक लाख तेईस हजार रुपये) प्रतिकर राशि अदा करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन न करने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। परिवादी बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने पैरवी की, जबकि आरोपी की ओर से अधिवक्ता सत्यम चौहान उपस्थित हुए।
यह निर्णय चेक बाउंस के मामलों में न्यायालय की सख्त दृष्टि को दर्शाता है तथा यह स्पष्ट संदेश देता है कि विधिक नोटिस प्राप्त होने के बाद भी भुगतान न करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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