इंडोनेशिया के बाली द्वीप में मौजूद पुरा बेसाकिह मंदिर को वहां का सबसे बड़ा और सबसे प्राचीन हिंदू मंदिर माना जाता है. इसे मदर टेंपल यानी मातृ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि बाली की संस्कृति और इतिहास की पहचान भी माना जाता है. हर साल यहां हजारों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. दूर-दूर से लोग इस मंदिर की भव्यता और रहस्यमयी वातावरण को देखने आते हैं. पहाड़ों और बादलों के बीच बना यह मंदिर पहली नजर में ही लोगों को आकर्षित कर लेता है.
कितना पुराना है ये मंदिर?
पुरा बेसाकिह मंदिर का इतिहास बेहद पुराना माना जाता है. कई मान्यताओं के अनुसार ये मंदिर करीब 2 हजार साल पुराना है. हालांकि कुछ इतिहासकार इसे 8वीं शताब्दी का बताते हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण धीरे-धीरे कई चरणों में हुआ था. समय के साथ इसमें नए हिस्से जुड़ते गए. यही वजह है कि आज यह एक विशाल मंदिर परिसर के रूप में दिखाई देता है. यहां सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि दर्जनों छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं. बाली के हिंदुओं के लिए यह जगह सबसे पवित्र स्थलों में गिनी जाती है.
ज्वालामुखी के विस्फोट से कैसे बचता है ये मंदिर?
ये मंदिर बाली के सबसे ऊंचे और सक्रिय ज्वालामुखी माउंट अगुंग की तलहटी में स्थित है. पहाड़ के नीचे बने इस मंदिर का दृश्य बेहद अद्भुत दिखाई देता है. खास बात यह है कि ज्वालामुखी कई बार फट चुका है, लेकिन मंदिर को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा. इसी वजह से स्थानीय लोग इसे चमत्कार मानते हैं. उनका विश्वास है कि देवताओं की कृपा से यह मंदिर हर संकट से बच जाता है. साल 1963 में जब माउंट अगुंग में बड़ा ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था, तब लावा मंदिर के बेहद करीब तक पहुंचा था, लेकिन मुख्य मंदिर सुरक्षित बच गया था.
पुरा बेसाकिह मंदिर की वास्तुकला भी लोगों को हैरान कर देती है. यहां ऊंची-ऊंची सीढ़ियां, पत्थरों से बने विशाल द्वार और पारंपरिक बाली शैली की इमारतें देखने को मिलती हैं. मंदिर परिसर में कई धार्मिक समारोह और पूजा-पाठ आयोजित होते रहते हैं. खास मौकों पर यहां रंग-बिरंगे कपड़ों में लोग पूजा करने आते हैं. पूरे मंदिर परिसर में घंटियों और मंत्रों की आवाज गूंजती रहती है. यही वजह है कि यहां का माहौल बेहद शांत और आध्यात्मिक महसूस होता है.
आज पुरा बेसाकिह सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बाली की पहचान बन चुका है. दुनियाभर के पर्यटक यहां इतिहास, संस्कृति और प्रकृति का अनोखा संगम देखने पहुंचते हैं. पहाड़ों के बीच बना यह मंदिर लोगों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है. स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भी सच्चे मन से यहां आता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. यही कारण है कि सदियों बाद भी इस मंदिर की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है.
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