नई दिल्ली/स्वराज टुडे: देश के लगभग 22 लाख 80 हजार विद्यार्थियों ने अपनी जिंदगी के सबसे कीमती साल नीट परीक्षा की तैयारी में लगा दिए। किसी ने गांव की तंग गलियों में रहकर पढ़ाई की, किसी ने मजदूर पिता की कमाई पर कोचिंग की फीस भरी, तो किसी मां ने अपने गहने बेचकर बेटे-बेटी के डॉक्टर बनने का सपना जिंदा रखा। लेकिन आज वही लाखों बच्चे इस सवाल के साथ खड़े हैं कि आखिर उनकी मेहनत का दोष क्या था, जो सिस्टम ने उनके भविष्य को ही दांव पर लगा दिया।
नीट जैसी देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील परीक्षा का पेपर लीक होना सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि 22 लाख 80 हजार सपनों के साथ किया गया सबसे बड़ा अन्याय है। जिन बच्चों ने दिन-रात मेहनत की, जिन्होंने सोशल मीडिया, त्योहार, खुशियां और चैन की नींद तक छोड़ दी, आज वही बच्चे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि इस घोटाले के बाद कई छात्रों ने मानसिक तनाव में अपनी जान तक गंवा दी, कई परिवार टूट गए, कई घरों में सन्नाटा पसर गया, लेकिन सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों के चेहरे पर वैसी बेचैनी दिखाई नहीं दी जैसी उन परिवारों की आंखों में दिख रही है जिनके अरमान एक झटके में खत्म हो गए।
नेता मीडिया के सामने बयान दे रहे हैं, सफाई दे रहे हैं, लेकिन क्या उनमें इतनी हिम्मत है कि उन परिवारों के घर जाकर कह सकें कि “कोई बड़ी बात नहीं, परीक्षा दोबारा करा देंगे”? क्या शिक्षा मंत्री उन मां-बाप की आंखों में आंख डालकर यह शब्द बोल सकते हैं जिनके बच्चे इस सदमे को सहन नहीं कर पाए? देश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर हर बार मेहनत करने वाला छात्र ही क्यों कुचला जाता है और सिस्टम में बैठे जिम्मेदार लोग क्यों बच निकलते हैं। आखिर कब तक बच्चों के भविष्य के साथ सौदा होता रहेगा और कब तक शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचारियों के हाथों खिलौना बनी रहेगी।
यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, यह देश के भविष्य का सवाल है, क्योंकि जब मेहनत करने वाला बच्चा हारने लगे और पैसे तथा पहुंच रखने वाले लोग जीतने लगें, तब सिर्फ एक छात्र का विश्वास नहीं टूटता बल्कि पूरे देश का भरोसा टूट जाता है।
नीट पर शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला
अगले वर्ष से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक (नीट यूजी) कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी सीबीटी मोड में आयोजित की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह जानकारी दी। नीट यूजी पेपर लीक मामले के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बदलाव का फैसला लिया है। अब अभ्यर्थियों को प्रश्न कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देंगे और उत्तर भी ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करने होंगे। कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) में परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसमें माउस और कीबोर्ड के जरिए प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं। इस प्रणाली में मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत तेज होती है। वर्तमान में संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई), कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी), बैंकिंग और विभिन्न भर्ती परीक्षाएं भी सीबीटी मोड में आयोजित की जा रही हैं।
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