छत्तीसगढ़
मुंगेली/स्वराज टुडे: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा के अनुरूप “अक्ति तिहार” का आयोजन कृषि विज्ञान केन्द्र, मुंगेली (ढकेलकापा) में दिनांक 20 अप्रैल 2026 को प्रातः 11:00 बजे किया गया। यह पर्व किसानों द्वारा अच्छी फसल एवं समृद्धि की कामना के साथ पारंपरिक रूप से मनाया जाता है, जिसमें ठाकुरदेव एवं माटी पूजन कर कृषि कार्यों की शुभ शुरुआत की जाती है। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया। तत्पश्चात कार्यक्रम का आयोजन केवीके मुंगेली के सभागार में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कृषक, किसान मित्र एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में केंद्र के प्रमुख श्री एस. के. वर्मा द्वारा स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने किसानों को परंपरागत ज्ञान के साथ वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय से कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर विभिन्न विषय वस्तु विशेषज्ञों द्वारा कृषकों को उन्नत कृषि तकनीकों संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गयाः
● श्री एस. के. लहरे, विषय वस्तु विशेषज्ञ (पौध रोग विज्ञान) द्वारा रबी मौसम के प्रमुख कीटों की पहचान एवं उनके समेकित प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी गई।
● डॉ. प्रमिला जोगी, विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यानिकी) द्वारा नील-हरित शैवाल के उपयोग, लाभ एवं मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
● श्रीमती नेहा लहरे, विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि प्रसार) द्वारा क्रॉप डॉक्टर ऐप के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई तथा ट्राइकोडर्मा के उपयोग, लाभ एवं फसलों में रोग नियंत्रण में इसकी भूमिका के बारे में बताया गया।
● डॉ. अंजित जांगड़े, सहायक प्राध्यापक (सस्य विज्ञान) द्वारा प्राकृतिक खेती की अवधारणा, उसके लाभ एवं व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी दी गई।
● श्री मनहरण कुर्रे, उर्वरक निरीक्षक एवं सहायक मृदा परीक्षण अधिकारी द्वारा उर्वरकों के संतुलित एवं वैकल्पिक उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान कृषकों को उन्नत कृषि के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु अरहर की उन्नत किस्म “छत्तीसगढ़ अरहर-1” के बीजों का वितरण भी किया गया। वैज्ञानिकों ने इस किस्म की विशेषताओं, उत्पादन क्षमता एवं स्थानीय परिस्थितियों में इसकी उपयुक्तता के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिससे कृषकों में इस उन्नत किस्म के प्रति उत्साह देखा गया।
इस कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि विज्ञान केन्द्र मुंगेली के वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। साथ ही बड़ी संख्या में कृषकगण एवं ग्रामीणजन ने सक्रिय सहभागिता करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया।
कार्यक्रम के अंत में कृषकों ने इस प्रकार के उपयोगी प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की अपेक्षा व्यक्त की।
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