Korba: अस्पतालों से अधिकांश दवाइयां गायब ! मरीज बाहर से दवा खरीदने को मजबूर, चिकित्सा सेवाओं की खुली पोल

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छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ की साय सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त रखने का लाख दावा करे लेकिन धरातल पर इसकी अलग ही तस्वीर नजर आती है । शिकायत मिलने पर जब स्वराज टुडे न्यूज़ की टीम कोरबा के मुख्य मार्ग स्थित रानी धनराज कुंवर देवी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची तो यहां मरीजों में काफी आक्रोश देखने को मिला ।  उन्होंने बताया कि यहां महीनों से अनेक महत्वपूर्ण दवाइयां उपलब्ध नहीं है । दवा वितरण विभाग में बोला जाता है कि दवाइयां बाहर से खरीद लो । अब जो आर्थिक रूप से सक्षम है वो तो दवा बाहर किसी मेडिकल स्टोर्स से दवाइयां खरीद लेंगे लेकिन जो गरीब हैं वो कहाँ से खरीद पाएंगे। वे गरीब हैं इसलिए उनकी शिकायत सुनने वाला भी कोई नहीं है । दस रुपए के पर्चे पर डॉक्टर मरीज को जरूर देखते हैं, लेकिन पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता नही होने से मरीजों को बाहर की ओर रुख करना पड़ता है और उन्हें महंगी दवाइयां लेनी पड़ती है.

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कुछ ऐसा ही हाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल का भी है, जहां मरीजों को दवा नहीं मिल पा रही और उन्हें निराशा के साथ बाहर जाकर दवाएं लेनी पड़ रही है। मरीजों का कहना हैं कि यह स्थिति आए दिन बनी रहती है। यहां कुछ दवाई मिलती हैं तो कुछ दवाइयाँ बाहर से लेनी पड़ती है। अब स्वस्थ रहने के लिए बाहर से दवाइयां तो खरीदनी ही पड़ेगी चाहे महंगी मिले या सस्ती। यहां दवाओं के स्टॉक को बढ़ाने की जरूरत है, ताकि लोग उम्मीद से अस्पताल में आते हैं, उन्हें पर्ची पर लिखी गयी सभी दवाइयां पर्याप्त मात्रा में मिल सके।

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इस मामले में जब ड्रग वेयरहाउस की सहायक प्रबंधक गायत्री साहू से संपर्क किया गया तो वो अपने कार्यालय में नहीं मिली । उन्होंने दूरभाष पर बताया कि इस संबंध में जवाब देने के लिए वे अधिकृत नहीं है । वे उनके MD रितेश सर से बात करें । जब उनसे दूरभाष पर चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि दवाइयों का स्टॉक नहीं होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं । वे अधिनस्थों से जानकारी लेकर व्यवस्था दुरुस्त करेंगे।वहीं मेडिकल कॉलेज के सुपरिंटेंडेंट डॉ गोपाल एस. कंवर ने भी दवा खत्म होने की जानकारी नहीं होने की बात कही। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही स्टॉक भर लिया जाएगा ।

आपको बता दें कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद एक निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से केंद्रीय रूप से की जाती है। दवा वितरण समिति और जीवन दीप समिति दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करती है।विभाग द्वारा दवाओं का उचित भंडारण, तापमान नियंत्रण, स्टॉक रिकॉर्डिंग किया जाता है, ताकि दवाएं खराब न हों और उनकी उपलब्धता बनी रहे। बाह्य मरीजों को पर्ची के आधार पर दवाएं दी जाती हैं।दवाओं के वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्टॉक का समय-समय पर ऑडिट और मॉनिटरिंग की जाती है। यह विभाग सुनिश्चित करता है कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं मुफ्त या सस्ती दरों पर उपलब्ध हों। लेकिन ड्रग वेयर हाउस के कर्मचारियों और अस्पतालों के स्टॉक प्रभारियों की कार्यशैली कई सवाल खड़े करती है । शासकीय सेवा में रहकर मोटी तनख्वाह उठाना ही उनके जीवन का मूल उद्देश्य नजर आता है । शासन की योजनाओं और मरीज को होने वाली परेशानियों से इनका कोई वास्ता नजर नहीं आता । अगर स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था दुरुस्त रखनी है तो सबसे पहले कर्मचारियों को दुरुस्त करने की आवश्यकता है ।

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दीपक साहू

संपादक

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