छत्तीसगढ़
सक्ती/स्वराज टुडे: थाना सक्ती में दर्ज अति गंभीर मर्ग क्रमांक 13/2026 की विस्तृत जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मृतिका दिशा मरावी पिता जयकुमार मरावी, उम्र 23 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 11, झूलकदम रोड, सक्ती को आरोपी योगेन्द्र साहू पिता यशवंत साहू, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम सकरेली कला, थाना सक्ती द्वारा लगातार परेशान किया जा रहा था। आरोपी द्वारा मृतिका को बार-बार जातिगत गाली-गलौच कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था तथा उस पर विभिन्न प्रकार के दबाव डाले जाते थे।
सक्ती पुलिस के मुताबिक दिशा ने की आत्महत्या
जांच में प्राप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह स्थापित हुआ कि आरोपी की प्रताड़ना से त्रस्त होकर मृतिका का सिंग ढाबा के ऊपर स्थित शिवम् होटल के कमरा नंबर 105 में तारपीन तेल से लगी आग के कारण ही उसकी मृत्यु हो गई।
मर्ग जांच के आधार पर अपराध क्रमांक 91/2026 धारा 108 बीएनएस एवं 3(2)(5), 3(1)(ध) एसटी/एससी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सक्ती श्री प्रफुल्ल कुमार ठाकुर (भा.पु.से.) द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के परिपालन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पंकज पटेल के मार्गदर्शन में, एसटी/एससी एक्ट अंतर्गत प्रकरण होने के कारण अग्रिम विवेचना अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) सक्ती डॉ. भुवनेश्वरी पैकरा द्वारा की जा रही थी।
आरोपी ने स्वीकार किया अपना गुनाह
विवेचना के दौरान आरोपी की पतासाजी कर दिनांक 24.02.2026 को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी द्वारा अपराध करना स्वीकार किया गया। घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन को विधिवत जप्त किया गया। प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी योगेन्द्र साहू को दिनांक 24.02.2026 को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
उक्त कार्यवाही में विवेचना अधिकारी डॉ. भुवनेश्वरी पैकरा, अनुविभागीय अधिकारी (पु.) सक्ती के नेतृत्व में निरीक्षक लखन लाल पटेल (थाना प्रभारी सक्ती), उप निरीक्षक भूपेन्द्र चंद्रा एवं प्र.आर. शब्बीर मेमन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जिला पुलिस सक्ती द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के विरुद्ध अपराधों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही निरंतर जारी रहेगी।
माँ ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
सक्ती पुलिस जहां इस मामले को सुलझा लेने की बात कह रही है वहीं मृतका दिशा मरावी की मां मीना मरावी का दावा है कि पुलिस आरोपी को बचाने के लिए हत्या के मामले को खुदकुशी का रूप देना चाहती है। उसकी बेटी दिशा ने मृत्यु से पूर्व खुद उसे बताया था कि आरोपी योगेंद्र साहू ने उसे प्रेमजाल में फंसाकर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें निकाल ली थी और वो उसे ब्लैकमेल कर सम्बन्ध जारी रखने के लिए दबाव डाल रहा था। उसी ने होटल में उस पर तारपीन तेल डालकर उसे आग के हवाले किया था। बचने के लिए उसने योगेन्द्र का हाथ पकड़ लिया था लेकिन योगेंद्र ने उसे धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया । दिशा ने बताया था कि इस घटना में उसका हाथ भी झुलस गया है। फिर अपनी जान बचाने के लिए खुद होटल के बाथरूम में घुसकर पानी से आग बुझाई।
मृतका दिशा की मां मीना कहती है उसकी बेटी को अगर सुसाइड करना होता तो योगेंद्र के बुलाने पर होटल के कमरे में क्यों आती। घर पर ही अपनी जान दे देती । ये बात गले नहीं उतरती कि वो खुदकुशी करने के लिए बाजार से तारपीन तेल खरीदी और उसे होटल लेकर गयी। अभी तक ये भी पता नहीं चला है कि तारपीन तेल किसने और कहां से खरीदा था ।
घटनास्थल पर CCTV कैमरे जरूर लगे होंगे उसकी जांच की गई अथवा नहीं । अगर कैमरे नहीं लगे हैं तो एक होटल में CCTV कैमरा नहीं लगा होना होटल प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाता है। घटना के वक्त होटल के स्टाफ और अन्य ग्राहक थे या नहीं । उनसे क्या पूछताछ हुई । कोई व्यक्ति खुदकुशी करने वहां आया हो या वो खुद पर घटने वाली किसी अनहोनी से अनजान हो तो दोनों ही परिस्थितियों में व्यक्ति का हाव भाव और व्यवहार एकदम अलग होगा । होटल के स्टाफ और अन्य ग्राहक बता ही सकते हैं कि घटना से पहले दिशा का हावभाव और व्यवहार कैसा था। दिशा के मोबाइल पर व्हाट्सएप चैट सेव है । उसे पढ़ने पर स्पष्ट पता चल रहा है कि योगेंद्र उसे धमकी दे रहा है लेकिन दिशा रिप्लाई में दृढ़तापूर्वक उसे फटकार लगा रही है । परेशान होकर आत्महत्या कर लेने की कोई बात नहीं कर रही थी।
माँ मीना का सबसे बड़ा सवाल ये है कि अस्पताल में इलाज के दौरान पुलिस ने उसकी मौजूदगी में दिशा का बयान क्यों नहीं लिया ।आखिर किस आधार पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ये बताया जा रहा है कि उसकी बेटी ने खुदकुशी की है।
ये सारे सवाल माँ मीना मरावी को सुकून से जीने नहीं दे रही है। इस घटना को लेकर जल्दी परिणाम की तह तक पहुंचना जल्दबाजी होगी। इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता है । अगर पुलिस की थ्योरी पर विश्वास कर लें तो माँ के सवालों और संदेह को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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