इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) के उच्च अधिकारियों द्वारा कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के कर्मचारियों का व्यवस्थित शोषण – एक स्पष्ट उदाहरण

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छत्तीसगढ़
रायपुर/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वेतन विसंगति, अपूर्ण वेतन भुगतान, वैधानिक भत्तों की बहाली, कैरियर उन्नयन योजना (CAS), उच्च वेतनमान, सेवा-निवृत्ति आयु, पेंशन एवं अन्य सेवा-संबंधी लंबित मांगों के निराकरण हेतु आज दिनांक 16 फरवरी 2026 से पाँच दिवसीय कामबंद हड़ताल सह धरना-प्रदर्शन प्रारम्भ कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन पर अनेक गंभीर आरोप लगाए हैं।

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1) न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना

माननीय न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट रूप से KVK कर्मचारियों को समस्त सेवा लाभ (वेतन, भत्ते, पेंशन आदि) प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। दुर्भाग्यवश ये आदेश केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं और व्यावहारिक रूप से लागू नहीं किए जाते। कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

2) राज्य सरकार से राज्यांश राशि प्राप्त करने में लापरवाही

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा समय-समय पर कृषि मंत्रालय/वित्त विभाग को पत्र लिखे जाते हैं कि KVK कर्मचारियों के वेतन हेतु राज्य सरकार से राज्यांश की राशि प्रदान की जाए। लेकिन इन पत्रों की कोई गंभीरता से फॉलो-अप नहीं किया जाता। न तो कोई प्रयास किया जाता है और न ही स्थिति की जानकारी ली जाती है। महज औपचारिकता पूरी करने के लिए पत्र लिखकर मामला वहीं छोड़ दिया जाता है।

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3) माननीय मुख्यमंत्री को गुमराह करने का प्रयास

एक ओर जहां कर्मचारियों को पूर्ण वेतन नहीं दिया जा रहा, वहीं प्रशासन द्वारा माननीय मुख्यमंत्री महोदय को भ्रामक पत्र जारी किए जाते हैं कि ICAR से वित्तीय सहायता एवं आदेश की प्रत्याशा में KVK कर्मचारियों को पूर्ण वेतन प्रदान नहीं किया जा सका। यह स्पष्ट रूप से शासन को अंधेरे में रखने और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है।

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4) MoU में एकतरफा और मनमानी संशोधन

ICAR और विश्वविद्यालय के बीच हुए मूल समझौते (MoU) में एकतरफा बदलाव करके गलत/अनियमित नियुक्तियाँ की जा रही हैं। यह MoU की भावना और नियमों का उल्लंघन है, जिससे कर्मचारियों की सेवा शर्तें प्रभावित हो रही हैं।

5) हड़ताल के समय दिखावटी आश्वासन

जब भी KVK कर्मचारी अपनी मांगों के लिए हड़ताल या आंदोलन की तैयारी करते हैं, तब प्रशासन तुरंत एक पत्र जारी कर देता है कि “प्रशासन से बातचीत हुई है और हमने संबंधित विभाग को पत्र लिख दिया है”। लेकिन इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। यह केवल आंदोलन को शांत करने की कूटनीति भर है।

6) मूल समस्या और विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी

वास्तविकता यह है कि MoU ICAR और विश्वविद्यालय के बीच हुआ था। ICAR ने केंद्र सरकार से KVK के लिए बजट मांगा, ठीक उसी प्रकार विश्वविद्यालय को भी राज्य शासन से अपना हिस्सा (राज्यांश) मांगना था। लेकिन विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार से बजट नहीं मांगा और जानबूझकर ICAR के बजट से ही पूरी राशि चलाती रही। जब ICAR को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने केवल अपना हिस्सा देने की बात कही और विश्वविद्यालय को राज्य से अपना हिस्सा मांगकर कर्मचारियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
अब विश्वविद्यालय के पास राज्य सरकार से मांग करने का कोई नैतिक आधार नहीं बचता, क्योंकि उन्होंने दोनों पक्षों (ICAR और राज्य शासन) को अंधेरे में रखकर यह गलती की थी।

निष्कर्ष:
उपरोक्त सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि सारी जिम्मेदारी और गलती इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रशासन तथा उच्च पदस्थ अधिकारियों की है। वे विभिन्न आदेशों, न्यायालयीन निर्णयों और साक्ष्यों को छिपाकर, कागजी जोड़-तोड़ करके शासन, ICAR और कर्मचारियों को धोखे में रख रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल अपनी गलत नियत को अंजाम देना और KVK कर्मचारियों की जिंदगी, करियर व परिवारों से खिलवाड़ करना है।
हम मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और KVK कर्मचारियों को उनके वैधानिक सेवा लाभ तत्काल प्रदान किए जाएं।

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दीपक साहू

संपादक

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