*राज्य की मौजूदा चुनौतियों से निपटने में नाकाम अमित कुमार
*क्या पोस्टिंग और तबादलों में किया जा रहा भारी भ्रष्टाचार?
कोरबा/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा के कारनामें दिन-प्रतिदिन उजागर होते जा रहे हैं। कानून व्यवस्था से लेकर विभाग में पदस्थापना और तबादलों में भारी अनियमितताएं देखी जा रही हैं। ताजा मामला प्रदेश के इंटेलीजेंस आईजी अमित कुमार को लेकर सामने आया है। इंटेलीजेंस आईजी सरकार का सबसे करीबी और प्रमुख पद है। अमित कुमार पहले दिल्ली में थे। प्रदेश में बीजेपी के शासन में आते ही छत्तीसगढ़ आ गये। यहां वह इंटेलीजेंस आईजी पद पर आये हैं। लेकिन कार्यभार संभालते ही इनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रदेश का पूरा खुफिया विभाग फैलियर हो गया है।
इनके कार्यकाल में बलौदा बाजार की घटना हुई, रायगढ़ कांड, बैंकुठपुर कोल माइंस कांड, बिलासपुर नरेश साहू हत्याकांड राजनांदगांव में यादव हत्या काण्ड, कवर्धा बलात्कार कांड, कांकेर में आदिवासी कांड, ईसाई कांड, (कांकेर) धर्मांतरण मामला, डीएसपी कल्पना वर्मा और दीपक टंडन के मामले में इनकी इंटेलीजेंस शून्य साबित हुई। यह तो वह मामले है जो ज्यादा सुर्खियों में रहे। इसके अलावा भी कई घटनाएं हुई हैं जिससे सरकार की छबि खराब हुई है। अमित कुमार जैसे अधिकारी के कारण सरकार की छबि धूमिल हो रही है। बावजूद इसके सरकार का गृह विभाग अमित कुमार पर पर्दा डाले हुए है। अमित कुमार इंटलीजेंस के नाम पर सरकार के आंख में धूल झोंक रहे हैं।
कारण भी स्पष्ट है कि प्रदेश के गृहमंत्री चाहते हैं कि सरकार किसी न किसी मामले में सरकार की किरकिरी हो और उन पर आंच भी न आये। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सादगी की पूरा दुरूपयोग गृहमंत्री विजय शर्मा कर रहे हैं। कई मामलों में आंख में धूल झोंककर मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखा जा रहा है। साय को गृहमंत्री की करतूतों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
वह घटनाएं जिनसे सरकार छबि हुई धूमिल
● बलौदा बाजार घटना: 10 जून 2024 को सतनामी समाज ने गिरौदपुरी से लगे महकोनी स्थित अमर गुफा में जोड़ा जैतखाम काटे जाने की घटना और उस पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में बड़ा प्रदर्शन किया था। विरोध-प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक बेकाबू हो गए और देखते ही देखते तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं शुरू हो गईं। हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आग लगा दी थी। इसके अलावा संयुक्त कार्यालय और तहसील कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की गई थी।
● कांकेर में धर्मांतरण मामला: कांकेर में धर्मांतरण के विरोध में हिंसा हुई थी। यहां एक धर्म परिवर्तित महिला के शव का अंतिम संस्कार नहीं करने दिया गया था। महिला के अंतिम संस्कार को लेकर हिंसा हो गई थी। घटना में एडिशनल एसपी का सिर फूटा था।
● रायगढ़ में कोल खदान के खिलाफ प्रदर्शन: रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक के कोल खदान के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने लेडी कॉन्स्टेबल के साथ अभद्रता की थी। उसकी वर्दी फाड़कर खेतों में घसीटा था। दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। लेडी कॉन्स्टेबल आबरू बचाने के लिए गिड़गिड़ा रही थी। JPL कोयला खदान सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के विरोध में 14 गांव के लोग प्रदर्शन कर रहे थे।
● होटलों में रेड डलवायी और फिर माफी मांगी: अमित कुमार ने रायपुर में होटल में छापा मारने के लिए रायपुर एसपी से बोला। फिर दबाव आया तो सभी से माफी माँगी। इससे पुलिस प्रशासन की काफी थू-थू हुई थी और अमित कुमार को कटघरे में खड़ा किया था। आपको बता दें कि रायपुर में नेताओं के बड़े-बड़े होटल हैं।
● मनमानी पोस्टिंग और तबादले में भ्रष्टाचार: छत्तीसगढ़ में 33 जिलों में से 15 जिलों में पुलिस अधीक्षक राज्य प्रशासनिक सेवा के हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा को दरकिनार करते हुए इन जिलों में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को एसपी बनाया गया है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के इशारों पर नाचते हैं। अंबिकापुर, गरियाबंद, बिलासपुर कोंडगांव, कवर्धा, बेमतरा, पेड्रा, रायपुर, दुर्ग, गौरेला, जांजगीर चापा, सक्ति, बैंकुण्ठपुर आदि जिलों में प्रमोटी एसपी हैं। जबकि नियम के अनुसार पुलिस अधीक्षक की पोस्ट आईपीएस सेवा से होना चाहिए लेकिन सूत्रों का कहना है कि अमित कुमार अयोग्य अफसरों की पोस्टिंग में भारी भ्रष्टाचार कर रहे हैं। अमित कुमार 1-1 पोस्टिंग में 1-1.5 करोड़ कमा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जिसमें राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को एसपी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि सीधे आईपीएस पोस्टिंग के लिए पैसे नही देते। पुलिस अधीक्षक की पोस्टिंग का डायरेक्ट कनेक्शन अमित कुमार करते हैं।
डीएसपी कल्पना वर्मा और दीपक टंडन मामले में संदिग्ध है अमित कुमार की चुप्पी
डीएसपी कल्पना वर्मा और दीपक टंडन विवाद में हर दिन नये मोड़ सामने आ रहे हैं। वहीं इंटेलीजेंस के आईजी अमित कुमार की चुप्पी भी कई सवाल पैदा कर रही है। है। इस समय रायपुर का यह मामला काफी सुर्खियों में है। बताया जा रहा है कि कारोबारी दीपक टंडन अपनी आय-व्यय का पूरा ब्यौरा पुलिस को सौंप चुके हैं। यह भी जानकारी सामने आई है, कि कल्पना वर्मा रकम के लेन-देन के अलावा “नक्सली उन्नमूलन गोपनीयता” भंग करने और दंतेवाड़ा में महादेव ऑनलाइन सट्टा एप्प पैनल संचालित करने से जुड़ी क़वायतों को लेकर बार-बार अपना बयान बदल रही हैं। दरअसल कल्पना वर्मा ने कारोबारी टंडन पर पिता के साथ 75 लाख के लेन-देन के आरोप लगाए हैं। इस रकम के लेन-देन संबंधी तथ्यों को लेकर संदेही डीएसपी नए-नए ऐसे बयान दे रही है, जो किसी के गले नहीं उतर पा रहे हैं। प्यार, तकरार, कारोबार और अब अपराध की ओर रुख़ कर रहे डीएसपी कल्पना वर्मा V/S दीपक टंडन मामले ने छत्तीसगढ़ पुलिस को सुर्ख़ियों में ला दिया है। इस प्रकरण से पुलिस तंत्र में वर्दी के भीतर अपराधीकरण की “बू” आने लगी है। कल्पना वर्मा, दीपक टंडन को अपने पॉवर के बल पर कानूनी उलझनों में फंसाना चाहती है। दूसरी तरफ देखा जाये तो अमित कुमार की इस मामले में चुप्पी संदेह के घेरे में है।
*विजया पाठक की रिपोर्ट*
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