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    ओलावृष्टि, तृफान, वर्षा आदि प्राकृतिक आपदा से फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’

    Deepak SahuBy Deepak SahuMarch 10, 2024Updated:March 10, 2024
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    नई दिल्ली/स्वराज टुडे: कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में कृषि तथा उससे संबंधित कार्यों का सकल घरेलू उत्पाद यानि जीडीपी में हिस्सेदारी 18.3 प्रतिशत रही। भारत की लगभग आधे से भी ज्यादा जनसंख्या कृषि पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर है। वहीं 70 प्रतिशत से भी अधिक ग्रामीण परिवार कृषि व उससे संबंधित कार्यों से ही अपना जीवनयापन करते हैं। भारत में कृषि क्षेत्र सबसे ज्यादा रोजगार सृजन करने वाला क्षेत्र है।

    एक सत्य यह भी है कि कृषि वह भी क्षेत्र है जिस पर सबसे ज्यादा प्राकृतिक आपदाओं (जैसे- सूखा, ओलावृष्टि, तूफान, अधिक वर्षा अर्थात बाढ़ इत्यादि) का प्रभाव पड़ता है। एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष प्राकृतिक आपदाओं के कारण लगभग 22 प्रतिशत कृषि प्रभावित होती है। वहीं भारत में पिछले कुछ वर्षों का आंकलन करें तो वर्ष 2016 में 66.5 लाख हेक्टेयर कृषि फसल प्राकृतिक आपदों से प्रभावित हुई। वही 2020 में 66.5 लाख व 2021 में 50.4 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान हुआ।

    यानि हम कह सकते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण कृषि क्षेत्र को काफी नुकसान होता है। किसानों की इन समस्याओं के मद्देनजर तथा उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने हेतु ही मोदी सरकार ने 13 जनवरी 2016 को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)’ का शुभारंभ किया।

    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

    किसानों की आय में वृद्धि, प्राकृतिक आपदा/अनपेक्षित घटना के कारण फसल के नुकसान की भरपाई हेतु वित्तीय सहायता तथा किसानों को कृषि में नवाचार एवं आधुनिक पद्धतियों का अपनाने हेतु प्रोत्साहन करने के लिए मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चल रही है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को रबी व खरीफ की फसलों के

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    बीमा करवाने पर सरकार की ओर से मिलती है सब्सिडी 

    किसानों द्वारा खरीफ की सभी खाद्यान्न व तिलहन फसलों के बीमा हेतु प्रीमियम राशि का 2.0 प्रतिशत ही देना होता है। वहीं रबी की सभी खाद्यान्न व तिलहन फसलों के लिए हेतु 1.5 प्रतिशत तथा खरीफ व रबी की वार्षिक बागवानी/व्यावसायिक फसलों के लिए प्रीमियम राशि का 5 प्रतिशत ही किसानों द्वारा देय होता है। बीमा की बाकी

    प्रीमियम राशि राज्य व केंद्र सरकार द्वारा की जाती है  वहन 

    पीएम फसल बीमा योजना में पहली बार जल भराव, फसल कटाई के बाद चक्रवात व बेमौसम बारिश के जोखिम को भी शमिल किया गया है। वहीं शीघ्र भुगतान व सही आकलन के लिए मोबाइल व सैटेलाइट टेक्नालॉजी के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।

    क्या है प्रक्रिया

    इस योजना का फायदा लेने के लिए रबी, खरीफ व वार्षिक फसों का बीमा निर्धारित तारीख तक कराना अनिवार्य है।

    एक प्रकार से कहा जा सकता है कि फसल बोने से पहले ही पीएम फसल बीमा योजना के लिए नामांकन कराना है। सामान्यतः खरीफ फसलों के लिए बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई व रबी की फसलों के लिए 31 दिसंबर है। सर्वप्रथम अपने क्षेत्र के कृषि विभाग से संपर्क कर योजना की जानकारी लें। फिर कृषि बीमा, योजना की अधिकारिक वेबसाइट (ण्चउिइलण्हवअण्पद), एप अथवा किसान जन सेवा केंद्रों के माध्यम से करा सकते है। इसके उपरांत प्रीमियम का भुगतान तथा फसल बोने के बाद बीमा कंपनी को फसल बीमा पॉलिसी से संबंधित जानकारी दें।

    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित बाधाएं

    इस योजना से जहां किसानों को लाभ मिल रहा है, वहीं कुछ किसानों को जानकारी के अभाव व अन्य कारणों से दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। इस योजना से संबंधित समस्यों के निवारण हेतु सबसे पहले हमें सुनिश्चित करना है कि हम अपने क्षेत्र के कृषि विभाग से प्राप्त योजना की जानकारी के अनुसार ही अपना बीमा करायें।

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    वहीं प्राकृतिक आपदा से फसल के नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर कृषि विभाग को दें। इसके उपरांत जिला प्रशासन कृषि विभाग को एक पत्र द्वारा अपनी फसल व उसके नुकसान के बारे में बताएं। तत्पश्चात् जिला प्रशासन कृषि विभाग आपकी फसल बीमा कवर प्रदान करने की प्रक्रिया करता है। सर्वेक्षण द्वारा फसल के नुकसान की पुष्टि होने के बाद बीमे की राशि आपके खाते में आ जाती है। अलग-अलग फसलों के लिए बीमा कवर राशि भिन्न-भिन्न होती है।

    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सफलता

    मार्च 2024 में पीआईबी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पिछले 8 वर्षों में 56.80 करोड़ किसानों ने पीएम फसल बीमा योजना में पंजीकरण किया। इन पंजीकृत किसानों द्वारा 31,139 करोड़ रूपये प्रीमियम के रूप में दिये गये। वहीं फसल के नुकसान के बाद बीमा कवर के लिए 23.22 करोड़ों ने आवदेन किया, जिनको 1,55,977 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

    अगर किसानों के प्रधानमंत्री फसल बीमा में आवेदनों की बढ़ोत्तरी का आंकड़ा देखें तो वर्ष 2021-22 में 33.4 प्रतिशत वृद्धि के साथ इस योजना में 827.3 लाख किसानों ने 456.6 लाख हेक्टेयर कृषि फसलों का पंजीकरण किया। वहीं 2022-23 में इसमें 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और किसानों के पंजीकरण का यह आंकड़ा 1166.49 लाख पहुंच गया।

    *सुदामा भारद्वाज की रिपोर्ट*

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    Deepak Sahu

    Editor in Chief

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