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    बच्चों का दाह संस्कार क्यों नहीं होता? गरुड़ पुराण में छिपी है दफनाने की असली वजह

    Deepak SahuBy Deepak SahuApril 25, 2026
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    बच्चों के अंतिम संस्कार की अलग परंपरा सिर्फ धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि भावनात्मक और वैज्ञानिक पहलुओं से भी जुड़ी है। यह हमें यह समझाती है कि क्यों हिंदू धर्म में छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार जलाकर नहीं, बल्कि दफनाकर किया जाता है।

    हिंदू धर्म में आमतौर पर मृत्यु के बाद अग्नि संस्कार को सबसे पवित्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अग्नि शरीर को पंचतत्वों में मिलाकर आत्मा को उसके बंधनों से मुक्त करती है। लेकिन जब बात छोटे बच्चों या अविवाहित बच्चों की आती है, तो यह परंपरा बदल जाती है।

    बच्चों की निर्मलता और निष्कपट स्वभाव

    इसका मुख्य कारण बच्चों की निर्मलता और निष्कपट स्वभाव माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, छोटे बच्चों ने अभी तक कोई ऐसे कर्म नहीं किए होते हैं, जिनके कारण उन्हें जन्म-मरण के बंधन में फंसना पड़े। उनकी आत्मा पहले से ही शुद्ध और मुक्त होती है। इसलिए उन्हें अग्नि से शुद्ध करने की जरूरत नहीं मानी जाती है।

    गरुड़ पुराण के अनुसार दाह संस्कार के नियम

    गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस बच्चे के दूध के दांत नहीं निकले हों या जो बहुत छोटा हो, उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता है। कई मान्यताओं में 2 से 5 साल तक के बच्चों को दफनाने की परंपरा बताई गई है। ऐसा माना जाता है कि इस उम्र तक बच्चे में ‘मैं’ और ‘मेरा’ का भाव विकसित नहीं होता है।

    आध्यात्मिक दृष्टि से भी कहा जाता है कि मनुष्य के तीन शरीर होते हैं स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर। बड़े लोगों में ये तीनों आपस में मजबूत रूप से जुड़े होते हैं, जिन्हें अलग करने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है। लेकिन बच्चों में यह संबंध बहुत हल्का और सरल होता है, इसलिए उनकी आत्मा आसानी से शरीर छोड़ देती है।

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    वैज्ञानिक और शारीरिक दृष्टिकोण

    वैज्ञानिक रूप से भी देखा जाए तो छोटे बच्चों का शरीर बहुत कोमल होता है। उनके सिर का ऊपरी हिस्सा (जिसे ब्रह्मरंध्र कहा जाता है) पूरी तरह बंद नहीं होता है, जिससे प्राण आसानी से बाहर निकल जाते हैं। इसलिए कपाल क्रिया जैसी प्रक्रिया की भी जरूरत नहीं पड़ती।

    प्रकृति और पंचतत्वों से जुड़ा रहस्य

    हिंदू धर्म में शरीर को पंचतत्व मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना माना गया है। बड़े व्यक्ति के शरीर को अग्नि के माध्यम से इन तत्वों में मिलाया जाता है, लेकिन बच्चे का शरीर अभी प्रकृति के सबसे करीब माना जाता है। इसलिए, उसे सीधे मिट्टी को सौंप देना अधिक स्वाभाविक और शांतिपूर्ण माना जाता है।

    एक और कारण भी है कि छोटे बच्चे की मृत्यु परिवार के लिए बहुत दुखद होती है। ऐसे में दफनाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांत होती है और यह एहसास देती है कि बच्चा धरती मां की गोद में सुरक्षित है।

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    Deepak Sahu

    Editor in Chief

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