छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: आज दिनांक 19/4/26 को सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ के राज्यव्यापी अभियान के अंतर्गत कोरबा जिला में भी शक्तिपीठ के सभागार में राज्य सरकार द्वारा ले गए समान नागरिक संहिता (UCC) एवं स्वगणना ( जनगणना), धर्म स्वातंत्रय विधेयक, परिसीमन
, आदिवासी धर्म कोड एवं प्रमोशन में रिजर्वेशन जैसे विषम मुद्दों को लेकर आज जिला स्तरीय/ जिसमें कोरबा जिला चांपा जांजगीर जिला एवं शक्ति जिला के 17 आदिवासी समाज के समाज प्रमुख अध्यक्ष महासचिव प्रमुख एवं कुछ महासभा के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि भारी संख्या में उपस्थित रहे उपरोक्त कार्यशाला में राज्य सरकार के द्वारा इन सभी मामलों के साथ-साथ समान नागरिक संहिता का जो प्रस्ताव लाया गया है उस ले गए प्रस्ताव से पूरे छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज में एक संवैधानिक संकट होने का बात कही गई यह स्पष्ट है पूरी दुनिया सहित माननीय सुप्रीम कोर्ट माननीय हाईकोर्ट सहित भारतीय संविधान में भी आदिवासियों के लिए उनके रीति नीति रूढी परंपरा सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा है।

आदिवासी समाज में सदियों पुरानी परंपराएं विवाह तलाक उत्तराधिकार के नियम ( कस्टमरी ला) के अनुसार चलता है समान नागरिक संहिता से इन परंपराओं का खत्म होने का भी खतरा है।
संवैधानिक संरक्षण का कमजोर होना भारतीय संविधान संविधान में पांचवी एवं छठवीं अनुसूची के तहत आदिवासी क्षेत्रों में विशेष स्वायत्तता प्रदान करती है।
आज विशेष चर्चा में उद्बोधनकर्ताओं ने भूमि अधिकार पर भी असर होने का क्षमता को जाहिर की झारखंड जैसे राज्यों में छोटा नागपुर टेनेसी एक्ट, और संथाल परगना में एस पी टी एक्ट के तहत संरक्षित है।

समाज को चिंता है समान नागरिक संहिता इन विशेष कानून को खत्म कर उनकी जमीन को भी बाहरी लोगों के लिए खोल सकती है साथ ही सांस्कृतिक पहचान खत्म होने का संकट जैसे पूर्वोत्तर राज्य मध्य भारत के आदिवासी समुदायों की विशिष्ट पहचान है वह इसे विविधता में एकता के खिलाफ एवं पहचान मिटाने की कोशिश मात्र लग रही है
वक्ताओं ने बड़े ही व्यापक तरीके से अपनी बातों को समाज के सामने सरकार की जो मनसा आदिवासियों की लिस्ट पहचान को खत्म करने की साजिश जो की जा रही है एवं भविष्य में जो संवैधानिक संकट खड़ी की जाएगी उसके लिए सावधान रहने की बात कही है।

परिसीमन के संबंध में सरकार की जो मनसा है वह आदिवासी समाज को साफ नजर आ रही है परिसीमन में आदिवासी बहुल क्षेत्रों को भी परिसीमन को आधार मानकर पृथक कर सामान्य सीट घोषित करने की साजिश की जा सकती है एवं जिस तरह से कोरबा पांचवी अनुसूची जिला होने के बावजूद एवं आदिवासी बहुल जिला होने के बावजूद कोरबा जैसे जिला को सामान्य सीट घोषित कर आदिवासियों को शहर की राजनीति से एवं कई संवैधानिक लाभों से वंचित कर दिया गया,
कार्यशाला में स्वगणना जनगणना पर भी भारी मंथन किया गया एवं कंडिका क्रमांक 12 जिसमें सिर्फ अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति एवं अन्य जिसमें ओबीसी को बाहर कर दिया गया है उसे पर भी चर्चा हुई इसका तात्पर्य यह है कि उपरोक्त 33 कंडिकाओं में जो भी जानकारी जनगणना 2027 के संबंध में मकान सूचीकरण तथा मकान की गणना अनुसूचियां के माध्यम से जानकारी एकत्र करने के लिए नीचे प्रगणित मदों के संबंध में जो प्रश्न पूछे जाएंगे उसमें शंका है किया संपूर्ण जानकारी अनुसूचित जाति और जनजाति के अंतर्गत आने वाले लोगों की जनगणना के नाम पर पूरी जानकारी सरकार लेना चाह रही है जिसमें आकलन संबंधी जानकारी एवं सूचना स्पष्ट रूप से प्राप्त हो सके और इसमें जो बातें पूछी गई है आज के तारीख में गरीब से गरीब घरों में मांगी गई जानकारी का 10% अवश्य पूर्ण होगा इसका तात्पर्य है भविष्य में सरकार उपरोक्त संबंध में और कोई नियम लाकर उनको मिलने वाले संवैधानिक एवं सरकारी योजना से दूर करने के भी मंशा सरकार बना सकती है । अतः समाज को इसके दूरगामी परिणाम के लिए भी सचेत करने की या बताने की आवश्यकता महसूस की गई। साथ हीआदिवासी धर्म कोड के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की गई।
माननीय सुप्रीम कोर्ट भारत सरकार माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के द्वारा अनुसूचित जनजाति अधिकारी कर्मचारियों के प्रमोशन के संबंध में स्पष्ट निर्देश के बावजूद भी सरकार के द्वारा प्रमोशन जैसे मामलों को संज्ञान में ना लेना यह अति विकट परिस्थिति निर्मित की गई है जबकि सरकार को इन आरक्षित वर्गों के अधिकारी एवं कर्मचारी जो प्रमोशन से वंचित है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सरकार पदोन्नति देने हेतु सक्षम क्यों नहीं हो पा रही है जिससे सैकड़ो अधिकारी कर्मचारी पदोन्नति से वंचित हैं।
इस समस्या के उपर भी विस्तृत चर्चा की गई।
एवं अंत में निर्णय लिया गया कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ में गांव स्तर ब्लॉक स्तर तहसील स्तर जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर एक अभियान चलाकर उपरोक्त संबंध में हर एक व्यक्ति को जानकारी देकर इस होने वाले जनगणना एवं सरकार द्वारा मांगी गई जानकारी सहित समान नागरिक संहिता परिसीमन धर्म स्वातंत्रय विधेयक, परिसीमन आदिवासी धर्म कोड एवं प्रमोशन के संबंध में। प्रशिक्षित किए गए सामाजिक पदाधिकारी को हर स्तर पर भेज कर जानकारी प्रदान करने की सहमति बनाई गई है एक मत होकर सर्वसम्मति से यह आता है की गई की छत्तीसगढ़ राज्य में जो की आदिवासी बाहुल्य राज्य है समान नागरिक संहिता लागू होने पर यहां रह रहे आदिवासियों के ऊपर ही सबसे बड़ा कुठाराघात होगा इसलिए हर स्तर पर इस साजिश को नाकाम करने सहित पंचायत ग्राम सभा ब्लॉक जिला एवं राज्य स्तर पर सरकार के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराने हेतु आवाहन किया गया।
आज के इस महती एवं विशिष्ट कार्यशाला में प्रमुख वक्ता के रूप में शक्तिपीठ के संरक्षक मोहन सिंह प्रधान संरक्षक श्री रघुवीर सिंह मार्को सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष सेवक राम मरावी महासचिव डॉक्टर श्यामलाल श्री सुभाष भगत उपाध्यक्ष आदिवासी शक्तिपीठ श्री रमेश सिरका संगठन प्रमुख शक्तिपीठ श्री गेंद लाल सिदार कोषाध्यक्ष शक्तिपीठ श्री प्रवीण पालिया युवा प्रकोष्ठ सुश्री सुनीता सिरका चांपा जांजगीर जिला से पधारे श्री एम एल मरावी, उरांव समाज के अध्यक्ष सहदेव उरांव अगरिया समाज के अध्यक्ष राम जी पोर्ते, श्री बनवारी लाल पेंद्रो सेवा पुनेम महासभा, श्री के सी कंवर श्री शत्रुघ्न सिंह मरकाम गोड समाज कर्मचारी अधिकारी संघ
श्री रामचंद्र ध्रुव श्री चंद्रपाल सिंह कंवर श्री मोहन सिंह राज श्री जगदीश चंद्र बियार अध्यक्ष छत्तीसगढ़ बियार समाज,
के प्रबुद्ध वक्ताओं ने अपनी बात रखी उपरोक्त अवसर पर भारी संख्या में सामाजिक पदाधिकारी मौजूद रहे ।
संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन शक्तिपीठ के उपाध्यक्ष श्री निर्मल सिंह राज ने किया एवं समापन भाषण भी निर्मल सिंह राज के द्वारा दिया गया एवं सभी आए हुए अतिथि एवं पदाधिकारी का उन्होंने आभार माना और तत्काल समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक समिति बनाकर उपरोक्त आज कहीं गई बातों को घर-घर तक पहुंचाने का एवं जानकारी देने का उन्होंने अपनी बात कही।

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