नई दिल्ली/स्वराज टुडे: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले में दो अपर कास्ट कैंडिडेट के बौद्ध धर्म अपनाकर पीजी मेडिकल कोर्स में अल्पसंख्यक कोटे से दाखिला लेने की कोशिश पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि फ्रॉड का नया तरीका है और असली अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने जैसा है।
सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को हरियाणा के दो कैंडिडेट की याचिका सुन रही थी, जिन्होंने यूपी के मेडिकल कॉलेज में बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे से दाखिले की मांग की थी। दोनों ने दावा किया कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया है और SDO की ओर से जारी प्रमाणपत्र पेश किए। जब कोर्ट ने पूछा कि वे किस जाति से हैं, तो जवाब मिला- जाट। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप अपर कास्ट से हैं, फिर अल्पसंख्यक कैसे हो गए ?
सुप्रीम कोर्ट ने पूछे सवाल
- NEET-PG में 2025 में सामान्य वर्ग से भरा था फॉर्म, बौद्ध अल्पसंख्यक मेडिकल कॉलेज में लेना चाहते थे दाखिला
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 2 हफ्ते में चीफ सेक्रेटरी बताएं, दोनों कैंडिडेट को किस आधार पर जारी हुए अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र
कई सवालों के अब देने होंगे जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव से पूछा है कि अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी करने के स्पष्ट दिशानिर्देश क्या है और क्या एक अपर कास्ट का उम्मीदवार बौद्ध अल्पसंख्यक माना जा सकता है? कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि ऐसा संभव नहीं है तो एसडीओ ने प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी किया? राज्य सरकार को दो हफ्ते में रिपोर्ट देनी होगी।




















