नई दिल्ली/स्वराज टुडे: केरल से सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एक हालिया मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केरल के विभिन्न हिस्सों में लगभग 10,000 बांग्लादेशी नागरिक फर्जी पहचान दस्तावेजों के सहारे ‘प्रवासी मजदूर’ बनकर रह रहे हैं।
इस बड़े अवैध नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने कोल्लम जिले के कोट्टारक्करा में 10 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया। राज्य में कई बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं और वह भी बिल्कुल भारतीय नागरिकों की तरह। इस खुलासे का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि इन लोगों ने चंद रुपयों के एवज में अपने फर्जी भारतीय पहचान पत्र भी बनवा लिए हैं।
घुसपैठ और फर्जी पहचान का तरीका
जांचकर्ताओं के अनुसार, घुसपैठ का यह सिलसिला आमतौर पर बांग्लादेश सीमा से शुरू होता है। ये लोग सबसे पहले पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में पहुंचते हैं और वहां से शुरुआती फर्जी दस्तावेज बनवाते हैं। इसके बाद बेहतर रोजगार की तलाश में ये देश के अन्य हिस्सों, विशेषकर केरल का रुख करते हैं। पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर बनकर केरल पहुंचने के बाद, ये लोग स्थानीय पतों का इस्तेमाल करके पूरी तरह से भारतीय पहचान अपना लेते हैं और यहीं बस जाते हैं।
सिर्फ 700 रुपये में बन रहे अहम दस्तावेज
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में इन बांग्लादेशी नागरिकों को महज 700 रुपये देकर आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे अति-महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज उपलब्ध हो रहे हैं। इन्हीं जाली दस्तावेजों के सहारे वे खुद को भारतीय बताते हुए आराम से रह रहे हैं।
बेंगलुरु का माफिया और ‘चेन माइग्रेशन’
पुलिस को अंदेशा है कि इन फर्जी दस्तावेजों के पीछे बेंगलुरु से संचालित होने वाला एक बड़ा माफिया नेटवर्क हो सकता है। ये जाली दस्तावेज इतने सटीक होते हैं कि इन्हें देखकर असली या फर्जी का फर्क करना बेहद मुश्किल है।
कोट्टारक्करा में पकड़े गए लोग सालों से केरल में रह रहे थे। पुलिस ने जब उनके मोबाइल फोन खंगाले और उनमें बांग्लादेशी पासपोर्ट की प्रतियां देखीं, तब जाकर उनकी असलियत और राष्ट्रीयता सामने आई।
जांच में ‘चेन माइग्रेशन’ का भी खुलासा हुआ है, जिसमें सालों पहले आए लोग अपने रिश्तेदारों को भी यहां बुला रहे हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण मुगल खातून नामक महिला है। वह 13 साल पहले पश्चिम बंगाल के रास्ते केरल आई थी। उसने “ममदास” के नाम से सभी भारतीय पहचान पत्र हासिल कर लिए और बाद में अपने कई रिश्तेदारों को भी केरल बुला लिया। रिपोर्टों के अनुसार, अपनी गिरफ्तारी से दो महीने पहले वह बांग्लादेशी पासपोर्ट का उपयोग करके दो बच्चों के साथ वापस बांग्लादेश भी गई थी।
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