छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: शासकीय ई. वी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोरबा के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विद्यार्थियों के शैक्षणिक, व्यावहारिक एवं व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनोविज्ञान परिषद का गठन एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह पहल विद्यार्थियों में मनोविज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने, नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने तथा समाज के प्रति उनके उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

विद्यार्थियों के पिछले शैक्षणिक प्राप्तांकों के आधार पर गठित मनोविज्ञान परिषद में एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की भावना बजाज को अध्यक्ष एवं लालनी को उपाध्यक्ष तथा युवराज सिंह को सचिव और एम.ए. प्रथम सेमेस्टर की मनीषा ठाकुर को सह-सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।
परिषद का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता, सामूहिक सहभागिता एवं सामाजिक संवेदनशीलता का विकास करना है। परिषद के माध्यम से सेमिनार, कार्यशालाओं, व्याख्यानों, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों से विद्यार्थियों को मनोविज्ञान के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक जीवन से जोड़ने और अपने कौशल को विकसित करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान 100 बेड अस्पताल के मनोचिकित्सक श्री संजय तिवारी एवं उनके सहयोगी श्री ताराचंद्र एवं तृप्ति ब्राह्मणी मैडम ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के संदर्भ में आयोजित इस जागरूकता सत्र में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक समस्याओं के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर परामर्श एवं उपचार की आवश्यकता तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
श्री संजय तिवारी बताया कि सजीव एवं निर्जीव वस्तुओं के बीच अंतर समझने, जीवन में प्राथमिकताओं को सही ढंग से निर्धारित करने तथा वस्तुओं की तुलना में मानवीय संबंधों और जीवन-मूल्यों को अधिक महत्व देने की प्रेरणा दी। श्रीमती तृप्ति मैडम ने तनाव से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए उसके कारणों, प्रभावों एवं प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों पर प्रकाश डाला। वहीं, श्री ताराचंद सर ने व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए व्यक्तित्व विकास, व्यवहार, दृष्टिकोण और जीवन में सकारात्मक बदलावों के महत्व को समझाया। मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही व्यक्ति के संपूर्ण जीवन का अभिन्न अंग है। मानसिक समस्याओं को छिपाने या उनसे जुड़े व्यक्तियों के प्रति भेदभाव करने के बजाय संवेदनशीलता, सहयोग और उचित परामर्श को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा परिवार और समाज में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। विद्यार्थियों ने करियर, मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, व्यक्तित्व विकास तथा जीवन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं एवं जिज्ञासाओं पर विशेषज्ञों से प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों की बातों को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुना और सरल, व्यावहारिक तथा सकारात्मक उदाहरणों के माध्यम से उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एल. एन. कवर के मार्गदर्शन तथा मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आवंतिका कौंसिल, अतिथि व्याख्याता डॉ. शैलेन्द्र कुमार गौतम एवं डॉ. अर्चना पाण्डेय के सहयोग से संपन्न हुआ। विभाग द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, मनोवैज्ञानिक समझ के विस्तार तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मनोविज्ञान परिषद का गठन केवल एक संगठनात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने, उनमें नेतृत्व एवं सहयोग की भावना विकसित करने और मनोविज्ञान के ज्ञान को समाज तक पहुँचाने का एक सार्थक प्रयास है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक, संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समझ, स्वीकार्यता और सहयोग की भावना समाज में अधिक व्यापक हो सके।
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