* शनिवार को मुड़ापार अंबेडकर भवन के बाजू हुई कार्रवाई
* निगम कर्मचारी पर शासकीय जमीन पर मकान बनाने का आरोप
* शिकायत के बाद भी JCB ने मकान को हाथ नहीं लगाया
* सिर्फ बाउंड्री-घेरा तोड़कर लौटी टीम
* जनता पूछ रही- क्या कर्मचारी पर होगी विभागीय कार्रवाई?
कोरबा/स्वराज टुडे: नगर निगम कोरबा की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई पर अब ‘भेदभाव’ और ‘साठगांठ’ के गंभीर आरोप लग रहे हैं। शनिवार को मुड़ापार अंबेडकर भवन के बाजू निगम की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की, लेकिन इसी जगह शासकीय जमीन पर कब्जा कर नया मकान निर्माण करा लिया गया।पर निगम कर्मचारी के अतिक्रमण पर JCB का पंजा नहीं चला। निगम ने सिर्फ बाउंड्री और घेरा तोड़कर इतिश्री कर ली, जबकि मकान को हाथ तक नहीं लगाया।
कर्मचारी पर था शासकीय जमीन कब्जाने का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार, मुड़ापार अंबेडकर भवन के बाजू नगर निगम के ही कर्मचारी मनोज बक्सेल पर आरोप था कि उसने शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर मकान का निर्माण कराया है। अन्य लोगों द्वारा भी यहां अधिग्रहण किया गया था। शिकायत के बाद शनिवार को निगम का अमला अतिक्रमण हटाने पहुंचा।
अपनों’ को बचाया, दूसरों पर चला बुलडोजर
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि निगम की टीम ने कार्रवाई के दौरान भेदभाव किया। टीम ने दूसरों के सिरबाउंड्री वाले हिस्से और घेरा तोड़ दिया, लेकिन निगम कर्मचारी के मकान के सामने आते ही कार्रवाई रोक दी गई। JCB मकान को बिना छुए ही वापस लौट गई। यह नजारा देख मौके पर मौजूद लोग दंग रह गए।
शहर में चर्चा: क्या कर्मचारी का अतिक्रमण जायज है?
निगम की इस ‘आधी-अधूरी’ कार्रवाई के बाद पूरे शहर में चर्चा का बाजार गर्म है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या नगर निगम के कर्मचारी का अतिक्रमण जायज है? क्या शासकीय जमीन पर कब्जा करने वाले कर्मचारी पर निगम द्वारा विभागीय कार्रवाई की जाएगी? या फिर निगम अधिकारी-कर्मचारी की साठगांठ के चलते उसे अभयदान मिल गया है?
भेदभाव नहीं, सब पर एक जैसी कार्रवाई हो
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। अगर अतिक्रमण अवैध है तो निगम कर्मचारी का मकान भी तोड़ा जाना चाहिए। सिर्फ घेरा-बाउंड्री तोड़कर निगम ने यह साबित कर दिया कि ‘अपनों’ के लिए नियम अलग हैं। जनता मांग कर रही है कि निगम भेदभाव न करते हुए कर्मचारी के अतिक्रमण पर भी तत्काल बुलडोजर चलाए और दोषी कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई करे।
साठगांठ का आरोप, निगम मौन
इस पूरे मामले में निगम अधिकारियों और कर्मचारी के बीच साठगांठ के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि इसी मिलीभगत के चलते शासकीय भूमि पर कब्जे के बावजूद कर्मचारी का मकान नहीं हटाया गया।
फिलहाल इस मामले में निगम के जिम्मेदार अधिकारी का क्या कहना है जानिए ।
जनता के 5 सवाल निगम से
1. *दोहरा मापदंड क्यों*: आम आदमी का अतिक्रमण अवैध, कर्मचारी का वैध कैसे?
2. *विभागीय कार्रवाई कब*: शासकीय जमीन कब्जाने वाले कर्मचारी पर एक्शन कब?
3. *साठगांठ का सच क्या*: मकान न तोड़ने के पीछे अधिकारियों से सेटिंग?
4. *JCB क्यों रुकी*: कर्मचारी के मकान के सामने बुलडोजर का तेल खत्म हो गया?
5. *आगे की कार्रवाई क्या*: निगम अब मकान तोड़ेगा या लीपापोती करेगा?
क्या कहता है कानून
छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के तहत शासकीय या निगम की जमीन पर अतिक्रमण दंडनीय अपराध है। निगम को बिना भेदभाव के सभी अतिक्रमण हटाने का अधिकार है। साथ ही, यदि कोई शासकीय कर्मचारी अवैध कब्जा करता है तो उस पर विभागीय जांच बैठाकर निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।

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