छत्तीसगढ़
गरियाबंद/स्वराज टुडे: गरियाबंद जिले के दूरस्थ आदिवासी इलाके मैनपुर थाना क्षेत्र के धनोरा गांव में अंधविश्वास और लापरवाही ने एक ही परिवार के तीन मासूम बच्चों की जान ले ली. मृतक बच्चे एक ही माता-पिता के थे.
परिजन डमरूधर नागेश अपने परिवार के साथ 8-10 नवंबर को साहिबिन कछार मक्का तोड़ने गए थे. वहां तीनों बच्चों को तेज बुखार हो गया. गांव लौटने पर भी परिवार ने तुरंत अस्पताल जाने के बजाय बैगा (ओझा-गुणी) और झोलाछाप डॉक्टर के भरोसे इलाज शुरू कर दिया.
8 वर्षीय बेटी अनिता की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे अमलिपदर अस्पताल ले जा रहे थे, रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. 7 वर्षीय बेटा ऐकराम को देवभोग अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया.सबसे छोटा 4 वर्षीय बेटा गोरश्वर बैगा के घर झाड़-फूँक कराने के दौरान ही तड़प-तड़पकर मर गया.
गांव में एंबुलेंस आने में देरी
ग्रामीणों और स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बार-बार बच्चों को अस्पताल ले जाने की सलाह देती रहीं, लेकिन परिजन नहीं माने. गांव में एंबुलेंस आने में देरी, अस्पताल दूर होना और डॉक्टरों की अनुपलब्धता जैसी समस्याओं का हवाला भी दिया जा रहा है.
सीएमओ ने दिए जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया. सीएमओ डॉ. मिथिलेश चौधरी ने पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी है और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.यह घटना एक बार फिर छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और जागरूकता के अभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
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