Sidhi: CM के कहने पर मिला था एडमिशन, फिर भी भोजन को तरसी अनामिका, न लैपटॉप मिला और न मोबाइल

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सीधी/स्वराज टुडे: मध्यप्रदेश के सीधी जिले से एक बार फिर बहुचर्चित छात्रा अनामिका बैगा (Anamika Baiga) का मामला सुर्खियों में है। सीएम के निर्देश के बाद प्रशासन द्वारा छात्रा को नीट की तैयारी के लिए राजधानी भेजा गया था। अनामिका का कहना है कि भोपाल में उसे न तो ठीक से रहने की सुविधा मिली और न ही पढ़ाई का माहौल। जिसके चलते उसकी तैयारी प्रभावित हो रही है।

सीधी जिले की रहने वाली छात्रा अनामिका बैगा का मामला करीब दो महीने पहले तब चर्चा में आया था, जब बहरी तहसील में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) के सामने वह रोते हुए अपनी नीट की पढ़ाई के लिए मदद मांगने पहुंची थी। छात्रा की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल भोपाल में कोचिंग और रहने की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने अनामिका का भोपाल स्थित ज्ञान शिखर कोचिंग सेंटर में एडमिशन कराकर रहने और खाने की व्यवस्था कराई थी।

कोचिंग सेंटर में परेशानी, ठंड में दूसरों से मांगे कंबल 

लेकिन मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंची अनामिका ने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ पर आरोप लगाते हुए कहा कि कोचिंग सेंटर में उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। छात्रा का कहना है कि कड़ाके की ठंड में उसे दूसरों से कंबल लेकर रात गुजारनी पड़ी और कई बार दो से तीन दिन तक भोजन के लिए भी तरसना पड़ा।

सीएम ने लैपटॉप का आश्वासन दिया था, नहीं मिला

अनामिका का यह भी आरोप है कि, मुख्यमंत्री ने उसे लैपटॉप और मोबाइल देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उसे यह सुविधा नहीं मिली। इससे उसकी पढ़ाई का समय बर्बाद हो रहा है और नीट परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल हो गया है।

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अधिकारियों ने सीएम से नहीं मिलने दिया

छात्रा ने यह भी बताया कि भोपाल में रहते हुए उसने सीएम हाउस और विधानसभा जाकर मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों ने उसे मिलने नहीं दिया। अब अनामिका ने प्रदेश सरकार और क्षेत्रीय विधायक से आर्थिक मदद की मांग करते हुए कहा है कि अगर सहायता मिल जाए तो वह भोपाल या इंदौर के किसी बेहतर निजी कोचिंग संस्थान में दाखिला लेकर अपनी तैयारी जारी रख सकती है।

प्रशासन अलग ही कहानी सुना रहा

वहीं इस पूरे मामले पर जिला पंचायत सीईओ Shailendra Singh Solanki का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रावधान के अनुसार एक अच्छे संस्थान में अनामिका का एडमिशन कराया गया था और रहने-खाने की समुचित व्यवस्था भी की गई थी। उन्होंने कहा कि उसी संस्थान से देश भर के कई छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं। सीईओ ने यह भी साफ किया कि सरकार की ओर से सीधे आर्थिक सहायता देने का फिलहाल कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि शासन की ओर से अनामिका और उसके पिता को आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता भी दिया गया है। अब छात्रा के आरोपों के बाद प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि इस मामले में सरकार और प्रशासन आगे क्या कदम उठाते हैं।

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दीपक साहू

संपादक

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