● जच्चा-बच्चा की मौत के बाद भी डॉ. सोनल अग्रवाल पर मेहरबानी क्यों?
● बड़े डॉक्टरों पर कार्रवाई से क्यों बच रहा प्रशासन?
रीवा/स्वराज टुडे: श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में जच्चा और बच्चा की मौत के बाद अब इलाज से ज्यादा जिम्मेदारी तय करने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों के आरोपों और सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान गंभीर हालत में भर्ती कल्पना मिश्रा के ऑपरेशन के समय वरिष्ठ चिकित्सक की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि ऑपरेशन पीजी छात्रों के भरोसे कराया गया, जबकि संबंधित डॉक्टर ड्यूटी पर होने के बावजूद मौके पर मौजूद नहीं थीं। सूत्रों का दावा है कि इसी दौरान डॉक्टर अपने निजी अस्पताल में सेवाएं दे रही थीं। इन आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मौत के बाद हंगामा, फिर बंद कमरे में बैठक… कार्रवाई किस पर?
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया। आरोप है कि जिम्मेदारी तय करने के बजाय मामले को शांत करने की कवायद शुरू हो गई। करीब चार घंटे बाद डीन, अधीक्षक और स्थानीय विधायक की बैठक हुई। इसके बाद दो नर्सों पर कार्रवाई की बात सामने आई, जबकि संबंधित वरिष्ठ डॉक्टर के विरुद्ध केवल जांच कमेटी गठित किए जाने की चर्चा है।
अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर उठे सवाल
सवाल यह है—अगर वरिष्ठ चिकित्सक की ड्यूटी और मौके पर मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल हैं, तो केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों? क्या नर्सें ही हर गलती की जिम्मेदार हैं? यदि मरीज की हालत गंभीर थी और ऑपरेशन के दौरान वरिष्ठ चिकित्सकीय निगरानी जरूरी थी, तो यह तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उस समय ड्यूटी पर कौन था, कौन मौजूद था और इलाज संबंधी निर्णय किस स्तर पर लिए गए।
क्या ड्यूटी रोस्टर, ऑपरेशन थिएटर रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और मरीज की पूरी मेडिकल फाइल की जांच हुई? क्या यह जांच हुई कि ऑपरेशन के समय कौन-कौन से डॉक्टर अस्पताल में मौजूद थे? क्या निजी अस्पताल में उसी समय सेवाएं देने के आरोप की भी जांच होगी?
परिजनों की ओर से मौत के बाद दस्तावेजों और मेडिकल फाइल में कथित फेरबदल के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यदि ऐसा हुआ है तो मामला केवल चिकित्सकीय लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होंगे। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि मूल मेडिकल रिकॉर्ड, ड्यूटी चार्ट, ऑपरेशन नोट, सीसीटीवी फुटेज, कॉल/अटेंडेंस रिकॉर्ड और संबंधित चिकित्सकों की ड्यूटी स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
आरोप यह भी है कि इससे पहले दिसंबर माह में गायनी विभाग की ओटी में आग लगने और नवजात की मौत के मामले में भी डॉ. सोनल अग्रवाल की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। यदि पूर्व की घटनाओं में भी शिकायतें या जांच हुई थीं, तो यह जानना जरूरी है कि उन जांचों का निष्कर्ष क्या रहा और जिम्मेदारी किसकी तय हुई?
बड़ा सवाल—बड़े डॉक्टरों पर मेहरबानी और छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों?
मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान में मरीज की जान सबसे ऊपर होनी चाहिए। यदि लापरवाही हुई है तो कार्रवाई पद देखकर नहीं, जिम्मेदारी देखकर होनी चाहिए। जच्चा-बच्चा की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? क्या केवल नर्सों पर कार्रवाई करके मामला खत्म कर दिया जाएगा? ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने के आरोपों की जांच कब होगी? निजी अस्पताल में सेवा देने के आरोप की पड़ताल कौन करेगा? मेडिकल रिकॉर्ड में कथित फेरबदल की जांच होगी या नहीं? और सबसे बड़ा सवाल—क्या मेडिकल कॉलेज प्रशासन बड़े डॉक्टरों को बचा रहा है? रीवा की जनता इन सवालों का जवाब चाहती है, लीपापोती नहीं।
अमर रिपब्लिक की मांग: पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र वरिष्ठ चिकित्सा जांच दल से कराई जाए और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के पद या प्रभाव की परवाह किए बिना नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
(राजीव द्विवेदी की रिपोर्ट)

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