चौकीदार की 7 वर्षीय बच्ची ने 96 दिनों तक चले इलाज के बाद तोड़ा दम, गांधी जयंती और दुर्गा नवमीं के दिन आधा दर्जन लोगों ने किया था गैंगरेप; लापरवाही की बेइंतहा: आज तक पकड़े नहीं गए आरोपी

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बिहार
अररिया/स्वराज टुडे:वह 2 अक्टूबर 2025 की काली रात थी, जब आधे दर्जन दरिंदों ने अररिया जिला के बरदाहा थाना क्षेत्र के एक छोटे से गांव में अपनी मां के साथ गहरी नींद में सो रही 7 साल की मासूम बच्ची को उठाकर ले जाकर बांस की झाड़ी में हवस का शिकार बनाया और उसे तिल-तिल मरने के लिए छोड़ दिया.

पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 96 दिनों से चल रहा था इलाज

2 अक्टूबर अर्थात गांधी जयंती और नवरात्रि की  नवमी थी. जब मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और इस दिन नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूप मानकर कन्या-पूजन की परंपरा निभाई जाती  है. लेकिन दुर्भाग्य देखिए जो उसी कन्या पूजन के दिन उस मासूम के साथ दरिंदगी की सारी सीमाएं लांघी गई और परिणाम अब वह बेटी 96 दिनों तक पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बेइंतहा दर्द को सहते हुए अंततः मंगलवार की शाम जिंदगी की ज़ंग हार गई.

स्थानीय थाना में बतौर चौकीदार कार्यरत पीड़िता के पिता ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था  ‘महिलाओं के साथ यौन-हिंसा नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक संकट है’. नैतिकता और सामाजिकता का आलम यह है कि मासूम बिटिया को मरते दम तक न्याय नहीं मिल सका. ऐसे में आध्यात्मिकता की बात करना बेमानी है.

माँ से बच्ची ने पूछा – क्या बाबा उन दरिंदों को सजा दिलाएंगे ‘?

विडम्बना देखिए, पीड़िता के पिता स्थानीय थाना में चौकीदार हैं और आम लोगों की सुरक्षा-व्यवस्था की नींव के आधार इस शख्स को खुद न्याय का इंतज़ार है. उस मासूम के कहे वे शब्द पूरी व्यवस्था पर सवाल है जो अक्सर वह इलाज के दौरान अपनी मां और परिजनों से कहा करती थी कि ‘ क्या बाबा (पिता) उन बदमाशों को सजा दिलाएंगे ‘? जाहिर है, अगर आत्मा नश्वर है तो मासूम की भटकती आत्मा को जरूर न्याय का इंतजार रहेगा.

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मामले की छानबीन में जुटी पुलिस टीम

चौकीदार पिता ड्यूटी पर, 2 अक्टूबर की देर रात हुई दुष्कर्म की वारदात

दुर्गा पूजा की नवमी की रात थी और बालिका के पिता जो बरदाहा थाना में चौकीदार हैं, पास के गांव में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में ड्यूटी पर थे. बालिका अपनी मां के साथ घर मे सो रही थी. इसी दौरान दुष्कर्मियों की टीम बालिका को घर से उठाकर पास के बांस- बाड़ी ले गई और इस वारदात को अंजाम देने के बाद उसे रक्त-रंजित छोड़ फरार हो गया. होश आने के बाद वह अपने घर तक पहुंची. घर मे सो रही मां पूरी घटना से इसलिए अंजान रही कि वह डिप्रेशन की मरीज है और हर रात नीद की गोली खाती रही है.

वापस पिता के लौटने पर पीड़िता ने बताई आपबीती

पीड़िता अपने पिता को ‘बाबा’ कहकर संबोधित किया करती थी. रात के लगभग 2 बजे जब चौकीदार पिता ड्यूटी से वापस लौटे तो बिस्तर पर बेटी दर्द से कराह रही थी. हाल-चाल जानने के लिए उन्होंने जैसे ही मासूम के शरीर पर से चादर हटाया उनके होश उड़ गए. बेटी खून से न केवल लथपथ थी बल्कि लगातार उसके इंटरनल पार्ट से रक्तस्राव हो रहा है. उसने अपने बाबा से पूरी कहानी बताई और कहा कि वह किसी तरह चल कर घर पहुंची और उसे काफी ठंड लग रही है.

तत्काल परिजनों के सहयोग से उसे सिकटी अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया, जहां उसने तीन महीने से जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ती रही लेकिन अंत में हार गई.

मेडिकल कॉलेज के बाहर लोगों की भीड़.

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दो बार हुआ ऑपरेशन ,फिर भी हार गई जिंदगी की ज़ंग

पूर्णियां मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बीते तीन माह से बालिका का इलाज जारी था. मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ संजय कुमार के अनुसार ‘ बालिका के इंटरनल और वेजिनल पार्ट को काफी नुकसान पहुंचा था. इसके लिए पहली बार 4 अक्टूबर को और दूसरी बार 31 दिसंबर को ऑपरेशन हुआ था. सब कुछ ठीक था लेकिन अचानक मंगलवार को उसकी तबियत बिगड़ गई और हम उसे नही बचा सके ‘

परिजन बताते हैं कि दीपावली के समय वह काफी ठीक हो गई थी और उसने दीपावली के दिन अस्पताल में फुलझड़ियां भी चलाई थी. लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था और वह उसके लिए आखिरी दीपावली साबित हुई.

दुष्कर्मियों की नहीं हुई शिनाख्त, कार्रवाई के नाम पर हुई केवल खानापूर्ति

दुष्कर्म की घटना को घटित हुए 3 माह से अधिक बीत गए लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई. शर्मनाक यह है कि अब तक गिरफ्तारी तो छोड़िए, दुष्कर्मियों की शिनाख्त भी नहीं हो पाई है. कार्रवाई के नाम पर केवल इतना हुआ कि गांव के पांच संदिग्ध लोगों का ब्लड-सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए भेज दिया गया है.

जांच-रिपोर्ट क्या आया किसी को पता नही है. अररिया के मुख्यालय पुलिस उपाधीक्षक मनोज कुमार सिंह बताते हैं कि ‘ पॉक्सो एक्ट के तहत महिला थाना में दुष्कर्म का मामला दर्ज है. इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नही हुई है ‘.

सुस्त पुलिसिया कार्रवाई से नाराज मृतका के चाचा कहते हैं ‘ पुलिस कहती रही कि चुनाव के बाद कार्रवाई करंगे. चुनाव जीतने वाले चुनाव जीत गए , मंत्री भी बन गए लेकिन हमें इंसाफ नही मिला ‘.

पीड़िता तीन महीने तक एक ऐसे दर्द को सहने के लिए अभिशप्त रही जिसकी कल्पना भी उसने नहीं की होगी, मासूम जूझती रही इस उम्मीद में कि एक दिन वह स्वस्थ्य हो जाएंगी. इलाज के दौरान उसके द्वारा किए गए सवालों को याद कर परिजन रो पड़ते हैं. वह अक्सर पूछती थी कि ‘क्या मुझे डॉक्टर ठीक कर देंगे ‘! वह अक्सर अपने माँ से पूछती थी कि ‘ क्या बाबा (पिता) उन बदमाशों को पकड़ कर सजा दिलाएंगे’?

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सवाल स्वाभाविक इसलिए भी था कि वह बचपन से देखती रही थी कि बदमाशों को पकड़ने को उनके बाबा अहम भूमिका निभाते रहे हैं. लेकिन, उस मासूम को क्या पता कि जब उसके लिए न्याय की बारी आएगी तो कानून के हाथ भी बंध जाएंगे.

मृतका बच्ची का परिवार बेहद गरीब इसलिए नहीं हुआ न्याय के लिए कोई आंदोलन

आपको बता दें कि दरिंदगी की शिकार मासूम बच्ची का परिवार बेहद गरीब हैं, इसलिए न्याय के लिए भगवान भरोसे ही बैठे हैं. अगर कुछ समृद्ध परिवार से होती तो अब तक जगह जगह कैंडल मार्च निकालकर मासूम बच्ची को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन शुरू हो गया होता. बच्ची की आत्मा यकीनन बिलख रही होगी कि उसके जिस्म को नोंचने वाले दरिंदे अभी तक खुलेआम घूम रहे हैं.

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दीपक साहू

संपादक

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