जमीन मालिक के द्वारा जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर में की गई शिकायत की
रायगढ़ / घरघोड़ा / जिला रायगढ़ के एक निजी भूमि पर फ्लाई ऐश (राख) डंपिंग के मामले में स्थानीय भाजपा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष एवं वार्ड नं ३ पार्षद घरघोड़ा के द्वारा उसे शासकीय भूमि खसरा नंबर ३११/१ जो शासकीय मद में दर्ज है को बताकर शिकायत दर्ज कराने का मामला सामने आया है। घरघोड़ा ब्लॉक के नवापारा पंचायत में शासकीय भूमि पर शारदा मिनरल्स दर्रामुड़ा से निकलने वाले फ्लाई ऐश को अवैध रूप से डंपिंग करने का आरोप लगाया गया है ।भाजपा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष भोलू उरांव इस मामले में नयाब तहसीलदार घरघोड़ा को शिकायत कर कार्यवाही की मांग की गई ।
विडंबना यह है कि जमीन मालिक ने इस शिकायत को गलत बताते हुए आज जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर में शिकायत की जमीन मालिक सनत राम राठिया के द्वारा बताया गया कि यह निजी भूमि खसरा नंबर 311/4 है जिसमें पशुपालन एवं कृषि कार्य हेतु शारदा मिनरल्स दर्रामुड़ा से पर्यावरण के नियमों का परिपालन कर फ्लाई एश ट्रांसपोर्टिंग कर पाटा जा रहा है।
परंतु भाजपा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष के द्वारा मेरी निजी भूमि को शासकीय भूमि खसरा नंबर 311/1 गलत खसरा नंबर दर्शाकर नायब तहसीलदार घरघोड़ा को फर्जी शिकायत की गई है जिसमें जानबूझ गलत खसरा नंबर एवं भिन्न स्थल का उल्लेख किया गया है
जमीन मालिक सनत राम राठिया के द्वारा जिला स्तरीय जन समस्या निवारण में शिकायत कर निष्पक्ष स्थल एवं वास्तविक कार्य स्थल का राजस्व एवं पर्यावरण विभाग के संयुक्त टीम के द्वारा निरीक्षण कराया जाये
वास्तविक स्थिति यह है कि संबंधित कार्य विधिवत स्वीकृत/वैध निजी भूमि पर सभी नियमों एवं शर्तों का पालन करते हुए किया जा रहा है। शिकायत में वर्णित भूमि और वास्तविक कार्यस्थल पूर्णतः अलग हैं। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा दुर्भावना, व्यवसायिक नुकसान पहुंचाने, सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने एवं प्रशासनिक दबाव बनवाने की नीयत से झूठी एवं भ्रामक शिकायत की गई है।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 217 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लोक सेवक को जानते-बूझते झूठी सूचना देता है ताकि उसके वैध अधिकार का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान/परेशानी पहुंचाने में हो, तो यह दंडनीय अपराध है।

इसी प्रकार झूठे आरोपों के माध्यम से प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाना धारा 356 (मानहानि) के अंतर्गत भी आता है।
शिकायतित स्थल एवं वास्तविक कार्यस्थल का राजस्व एवं पर्यावरण विभाग की संयुक्त टीम से निष्पक्ष स्पॉट निरीक्षण कराया जाए। सही खसरा नंबर, नक्शा, सीमांकन एवं GPS लोकेशन के आधार पर तथ्य सत्यापित किए जाएँ,शिकायत असत्य पाए जाने पर शिकायतकर्ता के विरुद्ध BNS धारा 217 एवं 356 के तहत वैधानिक कार्यवाही हेतु सक्षम प्राधिकारी/पुलिस को प्रेषित किया जाए।गलत शिकायत के कारण हुए व्यवसायिक अवरोध, सामाजिक बदनामी एवं प्रशासनिक उत्पीड़न का संज्ञान लिया जाए। भविष्य में ऐसी झूठी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु शिकायतकर्ता को चेतावनी/प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की जाए।
आपकी निष्पक्ष जांच से सत्य सामने आएगा और झूठे आरोपों के माध्यम से बदनाम करने की साजिश उजागर होगी।
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