बिहार
पटना/स्वराज टुडे: बिहार की सियासत में एक बड़े उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति का रुख कर सकते हैं और उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा तेज है.
वहीं, उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनके बेटे निशांत कुमार को बिहार का डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है. आज पटना में होने वाली एनडीए विधायक दल की बैठक में इन समीकरणों पर अंतिम मुहर लग सकती है. सूत्रों के मुताबिक जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा आज सुबह दिल्ली से पटना पहुंचे हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से काफी लंबी बातचीत हुई है. कल सुबह दिल्ली से पटना पहुंचेंगे केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह.
सत्ता परिवर्तन का संभावित मॉडल
बिहार की राजनीति में दशकों से ‘चाणक्य’ की भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार अब अपनी विरासत अगली पीढ़ी को सौंपने की तैयारी में दिख रहे हैं. हालिया घटनाक्रमों और एनडीए के गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, बिहार में सत्ता हस्तांतरण का एक बड़ा खाका तैयार किया गया है. सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार आज पटना में होने वाली संभावित एनडीए विधायक दल की बैठक में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा संभव है:
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना
नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं. उन्हें जेडीयू कोटे से राज्यसभा भेजा जा सकता है, जिससे केंद्र में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी.
निशांत कुमार की एंट्री
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को बिहार का डिप्टी सीएम बनाकर सक्रिय राजनीति में उतारा जा सकता है. जेडीयू के कई वरिष्ठ मंत्री और नेता पहले ही सार्वजनिक रूप से निशांत के राजनीति में आने का स्वागत कर चुके हैं.
बीजेपी का मुख्यमंत्री
यदि नीतीश कुमार दिल्ली जाते हैं, तो गठबंधन के नए फॉर्मूले के तहत भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मुख्यमंत्री का पद मिल सकता है. इससे बिहार में एनडीए की एक नई और स्थायी संरचना तैयार होगी.
संजय झा और ललन सिंह की भूमिका
दिल्ली से पटना पहुंचे संजय झा की मुख्यमंत्री के साथ घंटों चली बैठक इस ओर इशारा करती है कि गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व (बीजेपी आलाकमान) के साथ इस ‘एग्जिट प्लान’ पर सहमति बन चुकी है. वहीं, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का भी कल पटना पहुंचना इस पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की कवायद का हिस्सा माना जा रहा है.
निष्कर्ष: बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई थी. अब नीतीश कुमार द्वारा अपने बेटे को जिम्मेदारी सौंपना और खुद केंद्र में जाना जेडीयू के भविष्य को सुरक्षित करने और बीजेपी के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है.
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