भागलपुर/स्वराज टुडे: विधि के विधान द्वारा बनाए गए तकदीर के खेल को कोई नहीं समझ सकता. रातों रात कोई राजा से रंक तो कोई रंक से राजा बन जाता है. भागलपुर के लाल प्रिंस के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. आज हर तरफ केवल प्रिंस की चर्चा हो रही है. पिता सड़क किनारे झालमुड़ी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. घर की आमदनी सीमित है, लेकिन बेटे के सपने छोटे नहीं हैं.
मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास के दम पर भागलपुर के परवत्ती निवासी प्रिंस कुमार ने खेल की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है. अब उनका चयन छठी जूनियर वर्ल्ड पेनकैक सिलाट चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में हुआ है. उज्बेकिस्तान में होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रिंस भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. लेकिन देश के लिए खेलने का यह बड़ा अवसर उनके परिवार के सामने आर्थिक चुनौती भी लेकर आया है.
प्रिंस की उपलब्धियों ने उनके परिवार और किलकारी बिहार बाल भवन, भागलपुर में खुशी का माहौल पैदा किया है. दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए जरूरी खर्च जुटाना परिवार के लिए मुश्किल बना हुआ है. ऐसे में प्रिंस को प्रतियोगिता तक पहुंचाने के लिए समाजसेवियों और खेल प्रेमियों से आर्थिक सहयोग की अपील की गई है.
झालमुड़ी बेचने वाले पिता के बेटे ने खेल में बनाई पहचान
भागलपुर के परवत्ती निवासी प्रिंस कुमार के पिता दीपक मंडल झालमुड़ी बेचकर परिवार चलाते हैं. सीमित आमदनी के बीच प्रिंस ने खेल को अपनी पहचान बनाने का माध्यम बनाया. उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अलग-अलग स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा साबित की.
खेल में आगे बढ़ने के लिए मेहनत के साथ समय, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर भी जरूरी होते हैं. प्रिंस ने अपनी उपलब्धियों के दम पर भारतीय टीम तक पहुंचने का रास्ता बनाया है. हालांकि, अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए होने वाला खर्च परिवार के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है.
प्रिंस की कहानी उन खिलाड़ियों की मुश्किलों की ओर भी ध्यान दिलाती है, जिनमें प्रतिभा और मेहनत तो होती है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण बड़े मंच तक पहुंचना आसान नहीं होता. ऐसे खिलाड़ियों के लिए समय पर सहयोग मिलना उनके खेल सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
राज्य स्तर पर स्वर्ण, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी जीते पदक
प्रिंस कुमार ने अब तक अलग-अलग प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया है. अरवल में आयोजित राज्य स्तरीय पेनकैक सिलाट चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था. इसके बाद जम्मू-कश्मीर में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता.
महाराष्ट्र में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप में प्रिंस ने फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. राज्य और राष्ट्रीय स्तर की इन उपलब्धियों के बाद उनका चयन भारतीय टीम में हुआ है.
अब उज्बेकिस्तान में होने वाली छठी जूनियर वर्ल्ड पेनकैक सिलाट चैंपियनशिप में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा. यह उनके खेल जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है. हालांकि, प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन या परिणाम को लेकर अभी कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता.
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत
प्रिंस के चयन से परिवार में खुशी है, लेकिन विदेश में होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए खर्च की व्यवस्था करना आसान नहीं है. उनके पिता की आमदनी सीमित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से जुड़े खर्च जुटाना चुनौतीपूर्ण हो गया है.
इसी वजह से किलकारी बिहार बाल भवन के प्रशिक्षक और पदाधिकारी प्रिंस को आर्थिक सहयोग दिलाने की अपील कर रहे हैं. गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में प्रशिक्षक कुंदन कुमार ने प्रिंस को मेहनती, अनुशासित और प्रतिभाशाली खिलाड़ी बताया. उन्होंने समाजसेवियों और खेल प्रेमियों से आग्रह किया कि वे प्रिंस की मदद के लिए आगे आएं, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें.
हालांकि, प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कुल कितनी राशि की जरूरत है, परिवार को अब तक कितनी आर्थिक मदद मिली है और यात्रा व अन्य खर्चों की व्यवस्था किस तरह होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है.
किलकारी में खुशी, पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं
किलकारी बिहार बाल भवन, भागलपुर में प्रिंस के भारतीय टीम में चयन को उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. उनके प्रशिक्षक कुंदन कुमार ने उनकी मेहनत और अनुशासन की सराहना करते हुए आर्थिक सहयोग की अपील की.
वहीं, प्रमंडलीय कार्यक्रम पदाधिकारी साहिल राज ने प्रिंस की उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. इस अवसर पर सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी यशस्वी निधि और राकेश रोशन समेत अन्य लोग मौजूद थे.
प्रिंस का चयन यह दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना सकते हैं. लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने के लिए प्रतिभा के साथ आर्थिक सहयोग और संस्थागत समर्थन भी महत्वपूर्ण है.
अब उज्बेकिस्तान में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी
राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद प्रिंस के सामने अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर खेलने का अवसर है. भारतीय टीम में चयन उनके अब तक के प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है. लेकिन इस अवसर को हकीकत में बदलने के लिए प्रतियोगिता में भाग लेने से जुड़ी आर्थिक बाधा दूर करना जरूरी है.
फिलहाल प्रिंस और उनके परिवार के लिए सबसे बड़ी जरूरत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होने के खर्च की व्यवस्था करना है. किलकारी के प्रशिक्षक और पदाधिकारी चाहते हैं कि समाज के सहयोग से प्रिंस को यह मौका मिल सके. अब देखना होगा कि आर्थिक मदद की अपील के बाद उन्हें कितना सहयोग मिलता है और उज्बेकिस्तान में होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेने की उनकी तैयारी किस तरह आगे बढ़ती है.
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