नई दिल्ली/स्वराज टुडे: इस साल मौसम रह-रह कर ऐसी करवट ले रहा है कि एक के बाद एक खौफनाक तूफान हिट कर रहे हैं. भारत के पड़ोस में एक ऐसा विनाशकारी तूफान दस्तक देने जा रहा है, जिसकी आहट मात्र से ही कई देशों में हड़कंप मच गया है.
मौसम विभाग ने बेहद डरावनी चेतावनी जारी अगले 12 घंटे बेहद भारी पड़ने वाले हैं. समंदर में एक बवंडर उठ रहा है जो 220 की रफ्तार से शहरों तक पहुंचेगा. ये अपने रास्ते में आने वाली हर एक चीज को पलक झपकते ही तबाह करने की विनाशकारी पावर लेकर चल रहा है. तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की सांसें अटकी हुई हैं और प्रशासन ने सबसे बड़े लेवल का अलर्ट जारी कर दिया है.
कितना खौफनाक है सुपर टाइफून Saude?
एशियाई महाद्वीप के आसपास समुद्र में एक बेहद खतरनाक चक्रवाती तूफान तेजी से ताकतवर हो रहा है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक ‘सौडेल’ (Saudel) नाम का ये सुपर टाइफून कैटेगरी 3 के भयंकर चक्रवात का रूप ले चुका है. इसके केंद्र में हवाओं की रफ्तार लगातार बढ़ रही है और आशंका जताई जा रही है कि ये 220 किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज रफ्तार से जमीनी इलाकों से टकरा सकता है.
तूफान की गंभीरता को देखते हुए सापान और आसपास के उत्तरी मरियाना द्वीप समूह में ‘टाइफून कंडीशन-1’ लागू कर दी गई है. इसका सीधा मतलब ये है कि अगले 12 घंटों के भीतर इलाकों में बेहद तबाही मचाने वाली तूफानी हवाएं और मूसलाधार बारिश शुरू हो जाएगी. उत्तरी द्वीपों एग्रिहान, पागन और अलामागन में प्रशासन ने रेड अलर्ट घोषित करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों और शेल्टर्स में शरण लेने को कहा है. ये तूफान सायपान से महज कुछ सौ मील की दूरी पर केंद्रित है और तेजी से उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ बढ़ रहा है.
समुद्र में उफान और ‘अल नीनो’ का भयानक तांडव
मौसम केंद्र के अनुसार, तूफान सौडेल का असर बेहद व्यापक है. इसके दक्षिणी हिस्से में 100 मील दूर तक खतरनाक तूफानी हवाएं चल रही हैं. मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर मंडरा रहा ‘अल नीनो’ (El Nino) प्रभाव और समुद्र के बढ़ते तापमान के कारण इस साल मौसम असामान्य रूप से हिंसक हो चुका है. अल नीनो की वजह से प्रशांत महासागर और चीन सागर के इलाकों में एक के बाद एक महाविनाशकारी तूफान जन्म ले रहे हैं.
चीन के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने भी अपने कोस्टल इलाकों, खासकर हैनान द्वीप के आसपास के इलाकों के लिए चेतावनी जारी की है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस साल के आखिर तक पावरफुलल अल नीनो के इंपैक्ट की वजह से एशिया-प्रशांत क्षेत्र को और भी भयंकर तूफानों, अनियंत्रित बारिश और जानलेवा बाढ़ का सामना करना पड़ेगा.
‘मायसाक’ का खौफ: जब बांध टूटे और बह गए शहर
तूफान ‘सौडेल’ का खौफ यूं ही नहीं है. दरअसल, कुछ ही हफ्तों पहले चीन और उसके आसपास आए तूफान ‘मायसाक’ (Maysak) ने जो तबाही मचाई थी, उसके जख्म आज भी हरे हैं. शुरुआत में लगा था कि नुकसान मामूली है, लेकिन हाल ही में जब सरकारी आंकड़े अपडेट हुए तो पूरी दुनिया सन्न रह गई. मायसाक के कारण आई भयंकर बाढ़ में मरने वालों की संख्या अचानक 39 से बढ़कर 159 हो गई.
गुआंग्शी इलाके के नानिंग और गुईगांग शहरों में बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि इतिहास के सारे रिकॉर्ड टूट गए. नानिंग शहर में दो बड़े बांध पानी का दबाव नहीं झेल सके और ताश के पत्तों की तरह ढह गए. अकेले बांध टूटने की इस घटना में 107 लोग जिंदा दफन हो गए या पानी के तेज बहाव में बह गए. पूरे इलाके से 16.5 लाख लोग प्रभावित हुए और 40 हजार से ज्यादा लोगों को रातों-रात अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा.
छतों पर फंसे लोग, ड्रोन से बची जान और 900 सांपों का आतंक
मायसाक तूफान के दौरान तबाही के जो मंजर सामने आए थे, वो रोंगटे खड़े कर देने वाले थे. लियूलान जलाशय का बांध टूटने पर मटमैला पानी इतनी तेजी से गांवों में घुसा कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. लोग अपनी जान बचाने के लिए अपने ही घरों की छतों पर जा बैठे. बाढ़ के बीच फंसे एक शख्स को बचाने के लिए सेना को खास ड्रोन की मदद लेनी पड़ी, तब जाकर उसकी जान बचाई जा सकी.
इतना ही नहीं, इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक और खौफनाक मंजर देखने को मिला. बाढ़ के पानी में एक स्नेक फार्म डूब गया, जिससे करीब 900 से ज्यादा जहरीले सांप छूटकर रिहायशी इलाकों और पानी में तैरने लगे. पूरे इलाके में दहशत फैल गई और सांप के काटने से एक महिला की दर्दनाक मौत भी हो गई.
आने वाले दिन बेहद भारी, अलर्ट पर पूरा सिस्टम
पुराने तूफानों के इस भयानक अनुभव को देखते हुए ही इस बार प्रशासन तूफान ‘सौडेल’ को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरत रहा है. अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि पिछले हादसों में आपातकालीन तैयारियों में चूक हुई थी, इसलिए इस बार सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है.
रेडियो, टेलीफोन इमरजेंसी लाइनों और हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो सिग्नल्स के जरिए तटीय और दूरदराज के द्वीपों पर लगातार अपडेट्स भेजे जा रहे हैं. समंदर में मौजूद जहाजों और मछुआरों को तुरंत किनारे पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं. चक्रवात के रास्ते में आने वाले सभी निचले इलाकों को खाली कराया जा रहा है.
मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटे बेहद नाजुक हैं. अगर ये तूफान अपनी दिशा थोड़ा सा भी पश्चिम की ओर बदलता है तो भारी तबाही तय है. भारत के पड़ोसी देशों में इस वक्त तूफान की दस्तक को लेकर खौफ का माहौल है और हर कोई कुदरत के इस कहर के सामने सहमा हुआ नजर आ रहा है.

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