छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: शहर के खरमोरा वार्ड में स्थित इंडस्ट्रियल एरिया के वेस्टर्न इलेक्ट्रोड नामक कार्बन फैक्ट्री में शनिवार की दोपहर अचानक भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और काले धुएं का घना गुबार कई किलोमीटर तक आसमान में नजर आया। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची दमकल विभाग की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 3 घंटे में आग पर काबू पाया। घटना के वक़्त कई मजदूर फैक्ट्री के भीतर मौजूद थे, जिन्होंने भागकर अपनी जान बचाई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक फैक्ट्री से पहले धुआं निकलता दिखाई दिया, जिसके कुछ ही देर बाद आग ने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें लगातार बढ़ती चली गईं और देखते ही देखते फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। घटना की सूचना तत्काल दमकल विभाग को दी गई। नगर सेना, बालको, बिजली कंपनी समेत कई उपक्रमों से दमकल की टीमें मौके पर पहुंची। एसपी सिद्धार्थ तिवारी, एडिशनल एसपी नीतिश ठाकुर, सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी, सिविल लाइन थाना प्रभारी आस्था शर्मा, बालको थाना प्रभारी निरीक्षक युवराज तिवारी, रक्षित निरीक्षक अनथराम पैकरा समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंची। एसडीएम सरोज महिलांगे समेत प्रशासन के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हुए पूरे क्षेत्र को ब्लॉक कर आम आवाजाही रोक दी गई। फैक्ट्री के चारों ओर से दमकल की टीमों की मदद से लगातार पानी की बौछार की गई, आग की तीव्रता को देखते हुए अतिरिक्त दमकल को मौके पर बुलाया गया। फोम टेंडर भी पहुंचे। करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। बताया जाता है कि फैक्ट्री में केमिकल टैंक समेत एक टैंकर पूरी तरह से आग की चपेट में आकर जल गया। अधिकारियों के मुताबिक आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारण का पता जांच के बाद ही लगेगा। फैक्ट्री मालिक अंकुश अग्रवाल की ओर से नुकसान का आंकलन नहीं बताया गया है, हालांकि फैक्ट्री में रखे लाखों रुपये के कच्चे माल, मशीनरी और अन्य सामान के जलने की आशंका व्यक्त की जा रही है।देव योग से कोई जनहानि नहीं हुई ये बड़ी राहत वाली बात है।
आगे क्या कार्रवाई हो सकती है ?
अगर किसी तरह की लापरवाही के चलते आगजनी की घटना हुई है तो फैक्ट्री एक्ट 1948 की धारा 92 के तहत 1 से 2 लाख रुपए तक जुर्माना अथवा 2 साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा फैक्ट्री का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल किया जा सकता है । अगर केमिकल लीक की वजह से आगजनी हुई है तो प्रदूषण एक्ट के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। तकनीकी खामियों की वजह से दुर्घटना घटी तो BNS की धारा 287 के तहत 6 माह की जेल अथवा जुर्माने का प्रावधान है। आपको बता दें कि फैक्ट्री में किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर सीधे तौर पर प्रबंधन और फैक्ट्री मैनेजर को जिम्मेदार ठहराया जाता है । दोषी पाए जाने पर पुलिस दोनों के खिलाफ FIR दर्ज करती है।

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