छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: जब हर उम्मीद टूटने लगती है, तब एक डॉक्टर की मुस्कान, उसका आत्मविश्वास और उसके अनुभव से भरे हाथ किसी मरीज और उसके परिवार के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बन जाते हैं। दिन हो या रात, त्योहार हो या पारिवारिक अवसर, मरीज की जान बचाना ही डॉक्टर का सबसे बड़ा धर्म होता है। ऐसे ही जीवनरक्षक चिकित्सकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए कोरबा पुराना बस स्टैंड में संचालित शिवाय हॉस्पिटल में राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन ने सभी चिकित्सकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके समर्पण, सेवा भावना और मानवता के प्रति अतुलनीय योगदान का सम्मान किया। कार्यक्रम में डॉ दिविक एच मित्तल ने कहा डाक्टर केवल बीमारी का इलाज नहीं करते, बल्कि टूटते हुए विश्वास को संभालते हैं, निराशा में उम्मीद जगाते हैं और असंख्य परिवारों की खुशियां वापस लौटाते हैं।
डॉक्टर पूर्णिमा सुरभि ने कहा कि एक डॉक्टर के जीवन में न तो समय की सीमा होती है और न ही आराम की कोई निश्चित घड़ी। किसी अनजान मरीज की जिंदगी बचाने के लिए वे अपने परिवार से दूर रहकर भी पूरी निष्ठा के साथ कर्तव्य निभाते हैं। यही समर्पण उन्हें समाज का सबसे विश्वसनीय और सम्मानित स्तंभ बनाता है।
अस्पताल प्रबंधन ने सभी चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉक्टरों की सेवा, संवेदनशीलता और त्याग ही स्वस्थ समाज की सबसे मजबूत नींव है। कार्यक्रम के अंत में सभी डॉक्टरों को शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सफल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस दौरान हॉस्पिटल प्रबंधन ने कहा “एक डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करता, बल्कि हर धड़कन में उम्मीद, हर मुस्कान में विश्वास और हर जीवन में नया सवेरा लौटाने का प्रयास करता है।”
यह भी पढ़ें: हर समय अकेले रहने का करता है मन, इसे भूलकर भी न करें नजरअंदाज!
यह भी पढ़ें: जेएनयू में निकली हैं नॉन टीचिंग के 267 पदों पर निकली भर्ती, जल्द करें आवेदन, अंतिम तिथि 27 जुलाई 2026

Editor in Chief




