नई दिल्ली/स्वराज टुडे:: बिहार की सियासत इस वक्त उस मोड़ पर खड़ी है, जहां हर पल समीकरण बदल रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार की कमान अब किसके हाथ में होगी?
नीतीश कुमार 14 अप्रैल को सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं। NDA में मौजूदा फॉर्मूले को जारी रखने की चर्चा है, जिसमें JDU को पहली बार डिप्टी सीएम पद मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को दो उपमुख्यमंत्री पद और विधानसभा स्पीकर की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। वहीं BJP का सीएम होगा।
सीएम बनने की लिस्ट में दो महिला उम्मीदवारों का नाम भी सामने आया है। सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की खेल मंत्री और भाजपा नेता श्रेयसी सिंह की है। श्रेयसी सिंह राजपूत जाति से आती हैं, पूर्व सांसद दिग्विजय सिंह की बेटी हैं। इसके अलावा BJP से राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता की भी चर्चा है। वे वैश्य समाज से आती हैं महिलाओं के बीच अच्छी पकड़ है। ऐसे में आइए जानते हैं श्रेयसी सिंह के परिवार, उनकी संपत्ति, जातिगत समीकरण और उनके अब तक के सफर की पूरी कहानी।
कौन हैं श्रेयसी सिंह?
श्रेयसी सिंह वर्तमान में बिहार सरकार में खेल मंत्री हैं और विधायक हैं। 29 अगस्त 1991 को जन्मी श्रेयसी सिंह आज बिहार भाजपा का वो चेहरा हैं, जो युवाओं और महिलाओं के बीच जबरदस्त लोकप्रिय हैं। श्रेयसी सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटर भी हैं। श्रेयसी सिंह राजपूत जाति से आती हैं। श्रेयसी सिंह ने अब तक शादी नहीं की है।
श्रेयसी की शुरुआती परवरिश और शिक्षा दिल्ली में हुई। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज से आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया और उसके बाद फरीदाबाद की मानव रचना इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री हासिल की। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने अपने पारिवारिक शौक ‘निशानेबाजी’ को पेशेवर रूप दिया।
पारिवारिक विरासत: राजनीति और खेल का संगम
श्रेयसी सिंह का राजनीति से रिश्ता कोई नया नहीं है। उनका परिवार दशकों से बिहार और देश की राजनीति में रसूख रखता है। पिता: स्वर्गीय दिग्विजय सिंह, जो केंद्र सरकार में मंत्री रहे और बिहार के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे।
मां: पुतुल कुमारी, जो बांका संसदीय क्षेत्र से सांसद रह चुकी हैं।
दादा: कुमार सुरेंद्र सिंह, जिनका खेल जगत (निशानेबाजी) से गहरा जुड़ाव था।
श्रेयसी के रगों में राजनीति और खेल दोनों दौड़ते हैं। उनके पिता और दादा नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
खेल करियर: जब गोल्ड कोस्ट में बजा भारत का डंका
● श्रेयसी सिंह ने राजनीति में आने से पहले खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। वह ‘डबल ट्रैप’ इवेंट की विशेषज्ञ निशानेबाज हैं।
● 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स (ग्लासगो): श्रेयसी ने सिल्वर मेडल जीतकर अपनी अंतरराष्ट्रीय चमक बिखेरी।
● 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स (गोल्ड कोस्ट): यहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
● अर्जुन अवार्ड: खेल में उनके शानदार योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार’ से नवाजा।
सियासी सफर: जमुई से कैबिनेट मंत्री तक
साल 2020 में श्रेयसी ने आधिकारिक तौर पर भाजपा का दामन थामा। पार्टी ने उन्हें जमुई विधानसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां उन्होंने राजद (RJD) के विजय प्रकाश को 41 हजार से ज्यादा वोटों के भारी अंतर से हराया।
श्रेयसी की लोकप्रियता और काम को देखते हुए 20 नवंबर 2025 को उन्हें बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्तमान में वह बिहार की खेल और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री हैं। वह बिहार की सबसे युवा मंत्रियों में से एक हैं।
उनकी राजनीति में एंट्री को कई लोग ‘नेचुरल ट्रांजिशन’ मानते हैं, क्योंकि उनका परिवार पहले से ही राजनीति में सक्रिय रहा है।
श्रेयसी सिंह की कुल संपत्ति
श्रेयसी सिंह की कुल संपत्ति करीब 7.63 करोड़ रुपये से अधिक है। उनके पास बैंक डिपॉजिट, शेयर, बीमा और वाहन जैसी संपत्तियां शामिल हैं। उन पर लगभग 13 लाख रुपये की देनदारी भी है।
संपत्ति का विवरण मूल्य
कुल संपत्ति (Total Assets) लगभग 7.63 करोड़ रुपये+
बैंक डिपॉजिट और शेयर लगभग 82 लाख रुपये
गाड़ियां (Motor Vehicles) लगभग 54 लाख रुपये
बीमा और बचत (LIC/NSS) लगभग 11.76 लाख रुपये
कुल देनदारियां (Liabilities) लगभग 13.31 लाख रुपये
जातिगत समीकरण: क्या ‘राजपूत’ चेहरे पर दांव लगाएगी भाजपा?
बिहार की राजनीति में ‘जाति’ एक ऐसा फैक्टर है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। श्रेयसी सिंह राजपूत (क्षत्रिय) समाज से आती हैं।
सवर्ण वोट बैंक: श्रेयसी के जरिए भाजपा सवर्ण मतदाताओं, खासकर राजपूत समाज को एक बड़ा संदेश दे सकती है।
महिला सशक्तिकरण: श्रेयसी एक पढ़ी-लिखी, युवा और सफल महिला हैं। बिहार में महिलाओं का एक बड़ा वोट बैंक है जो नीतीश कुमार का आधार रहा है, भाजपा श्रेयसी के जरिए उसे अपनी ओर खींच सकती है।
यूथ आइकॉन: एक खिलाड़ी होने के नाते युवाओं के बीच उनकी अपील बहुत मजबूत है।?
मुख्यमंत्री के रेस में श्रेयसी सिंह का नाम आने की तीन बड़ी वजहें
● नीतीश का विकल्प: भाजपा एक ऐसे चेहरे की तलाश में है जो ‘बेदाग’ हो और जिसकी छवि विकासवादी हो। श्रेयसी इस फ्रेम में फिट बैठती हैं।
● नारी शक्ति वंदन: 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र है जहां महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर चर्चा होनी है। ऐसे में बिहार में एक महिला मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा देशभर में बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है।
● पढ़ी-लिखी छवि: श्रेयसी का MBA बैकग्राउंड और स्पोर्ट्समैन स्पिरिट उन्हें अन्य पारंपरिक नेताओं से अलग खड़ा करता है।
अगर श्रेयसी सिंह को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा। यह फैसला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी देगा। युवा, महिला और स्पोर्ट्स बैकग्राउंड से आने वाली नेता को सीएम बनाना बीजेपी के लिए एक बड़ा राजनीतिक दांव साबित हो सकता है।
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