छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे:छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बांकीमोंगरा स्थित ग्राम ढपढप में आयोजित श्री हनुमंत कथा के चौथे दिन मंगलवार को एक बड़ा ‘घर वापसी’ कार्यक्रम संपन्न हुआ। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के दिव्य दरबार आयोजन में बेमेतरा जिले के कोदवा निवासी मोहम्मद अनवर अली ने अपने पूरे परिवार के साथ स्वेच्छा से सनातन धर्म स्वीकार किया।
धर्म परिवर्तन के पश्चात मोहम्मद अनवर अली का नया नाम आदर्श दास रखा गया है। उनके साथ उनकी पत्नी हसीना और उनके दो बेटों, सैफ अली और शमद खान ने भी हिंदू धर्म अपनाया। कथा वाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम) ने मंच पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगाजल छिड़ककर परिवार का शुद्धिकरण किया। उन्होंने पूरे परिवार का तिलक वंदन कर और पटुका पहनाकर उन्हें आशीर्वाद दिया।
आदर्श दास (पूर्व नाम अनवर) ने इस अवसर पर कहा कि बचपन से ही उनका झुकाव और जुड़ाव हिंदू समाज व संस्कृति के प्रति रहा है, जिसके चलते उन्होंने सपरिवार यह निर्णय लिया। पंडित शास्त्री ने उनके इस कदम की सराहना की और समाज से इस परिवार के सहयोग का आह्वान किया।
मंगलवार को आयोजित इस वृहद कार्यक्रम में बताया गया कि कुल 543 लोगों की सनातन धर्म में वापसी कराई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
बता दें कि इसके पहले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कई मौकों पर घर वापसी कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इनमें कुछ निम्नानुसार है:
● साल 2021 में उन्होंने एक घर वापसी कार्यक्रम में ईसाई धर्म में परिवर्तित 300 हिंदू लोगों को वापस हिंदू धर्म में लाया।
● साल 2023 में मध्य प्रदेश में एक कार्यक्रम में उन्होंने अनेक लोगों की घर वापसी करवाई।
● छत्तीसगढ़ में उन्होंने 11 आदिवासी परिवारों की घर वापसी करवाई, जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था।
● रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने 251 परिवारों (लगभग 1000 लोग) की घर वापसी करवाई, जिनमें से कुछ मुस्लिम परिवार भी थे।
● बागेश्वर धाम में उन्होंने 300 लोगों की घर वापसी करवाई, जो ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे ।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी की घर वापसी करवाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य हिंदू धर्म की रक्षा करना है। उनका मानना है कि कई लोग बहकावे में आकर दूसरे धर्मों में चले गए हैं, लेकिन अब वे अपने पूर्वजों के धर्म में वापस आना चाहते हैं तो उनकी मदद करनी चाहिए। घर वापसी कार्यक्रमों के माध्यम से वे हिंदू समाज में एकता और समरसता को बढ़ावा देना चाहते हैं ।

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