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    हरिद्वार जमीन घोटाले में धामी सरकार का तगड़ा एक्शन, DM-SDM समेत दर्जन भर अधिकारी सस्पेंड, विजिलेंस विभाग करेगा जांच

    Deepak SahuBy Deepak SahuJune 4, 2025
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    हरिद्वार/स्वराज टुडे: उत्तराखंड के हरिद्वार में भूमि घोटाले मामले में तगड़ा एक्शन हुआ हुआ है. नगर निगम के भूमि घोटाले में हरिद्वार के जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी और निगम के आयुक्त को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. पुष्कर सिंह धामी सरकार की इस कार्रवाई से अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है.

    गौरतलब है कि यह पहला ऐसा मामला है जिसमें पद पर रहते हुए एक जिलाधिकारी, नगर निगम के आयुक्त और एसडीएम को एक साथ सस्पेंड किया गया है.

    जानें क्या है पूरा मामला

    दरअसल, यह मामला हरिद्वार नगर निगम से जुड़ा हुआ है जिसमें एक जमीन जिसकी कीमत 14 करोड़ की बताई जाती है, उसको 54 करोड़ में खरीदा गया. शिकायत के बाद इसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश के बाद जांच कराई गई. मामले की जांच उत्तराखंड शासन में सचिव रणवीर चौहान ने की. चौहान ने खुद हरिद्वार जाकर इस मामले की पड़ताल कर 100 पेजों की रिपोर्ट शासन को सौंपी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है.

    मामले में एक दर्जन अधिकारी, कमर्चारी सस्पेंड

    आपको बता दें कि उत्तराखंड में बहुचर्चित हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा और ऐतिहासिक एक्शन लिया है. सरकार ने इस मामले में दो IAS और एक PCS अधिकारी समेत कुल 12 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. पहली बार प्रदेश में सत्ताधारी सरकार ने अपने ही सिस्टम में बैठे शीर्ष अधिकारियों पर इतनी सख्त कार्रवाई की है. अब इस मामले की जांच विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई है.

     वरुण चौधरी, नगर निगम आयुक्त

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत यह कार्रवाई राज्य की प्रशासनिक कार्यशैली में एक निर्णायक बदलाव मानी जा रही है. उन्होंने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि चाहे अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

    यह भी पढ़ें :  Indore: खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, बिना लाइसेंस गुलाब जामुन मिक्स बनाने वाली फैक्ट्री सील

    जाँच रिपोर्ट में क्या निकला ?

    जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिस ज़मीन को खरीदा गया, उसकी प्रक्रिया कृषि भूमि के दामों पर शुरू की गई थी, लेकिन अंत में उसे वाणिज्यिक दरों पर खरीदा गया. इस मामले में लैंड कमिटी भी नहीं बनाई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि SDM ने मात्र 2 से 3 दिनों में 143 की पूरी कार्रवाई पूरी कर दी, और फाइल को जल्दी निपटाने के लिए अपने स्टेनो को राजस्व अभिमत (Revenue Opinion) देने का काम सौंप दिया. यह प्रक्रिया न केवल असामान्य रूप से तेज़ थी, बल्कि नियमों की अनदेखी भी की गई.

    यह जमीन कूड़े के ढेर के पास स्थित थी और न तो इसकी तत्काल कोई जरूरत थी, न ही भूमि क्रय के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई. सर्किल रेट के आधार पर जमीन खरीद कर भारी वित्तीय अनियमितता की गई.

    जांच रिपोर्ट में पाया गया कि इस सौदे में भूमि चयन, मूल्य निर्धारण, प्रक्रिया अनुपालन और भू उपयोग परिवर्तन जैसे तमाम स्तरों पर गंभीर गड़बड़ियां हुईं.

    हरिद्वार के जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी

    जिन वरिष्ठ अधिकारियों पर गिरी गाज:

    1) कर्मेंद्र सिंह (DM, हरिद्वार) भूमि क्रय की अनुमति और प्रशासनिक स्वीकृति में संदेहास्पद भूमिका.

    2) वरुण चौधरी (नगर आयुक्त, हरिद्वार) बिना प्रक्रिया के प्रस्ताव पारित किया और वित्तीय अनियमितताओं में भूमिका निभाई.

    3) अजयवीर सिंह (PCS, SDM): निरीक्षण और सत्यापन में लापरवाही, जिससे गलत रिपोर्ट शासन तक पहुंची.

    इन तीनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाया गया है और विभागीय जांच प्रारंभ कर दी गई है.

    अन्य निलंबित अधिकारी:

    1) निकिता बिष्ट – वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम

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    2) विक्की – वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक

    3) राजेश कुमार- कानूनगो, रजिस्ट्रार

    4) कमलदास – मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील

    जांच प्रारंभ होने के बाद ही इन अधिकारियों को निलंबित किया गया था:

    1) रविंद्र कुमार दयाल – प्रभारी सहायक नगर आयुक्त

    2) आनंद सिंह मिश्रवाण – प्रभारी अधिशासी अभियंता

    3) लक्ष्मीकांत भट्ट – कर एवं राजस्व अधीक्षक

    4) दिनेश चंद्र कांडपाल – अवर अभियंता

    5) साथ ही, सेवानिवृत्त संपत्ति लिपिक वेदपाल का सेवा विस्तार समाप्त कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है.

    इस घोटाले की आगे की जांच अब विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई है. मुख्यमंत्री कार्यालय से जानकारी के अनुसार वरुण चौधरी ने जीतनी भी वितीय स्वीकृति की है उसकी जांच भी विजिलेंस करेगी.

    डीएम की भूमिका पर सवाल

    रिपोर्ट में ज़िक्र है कि ज़िलाधिकारी ने प्रशासनिक प्रमुख होते हुए लैंड पुलिंग कमेटी की अनुमति के बिना ही ज़मीन की खरीद की अनुमति दे दी, जबकि इस मामले में भूमि पुलिंग बोर्ड के गठन का इंतजार किया जा सकता था. जांच रिपोर्ट में सभी अनियमितताओं की पुष्टि के बाद, अब इन तीनों अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है.

    क्या है लैंड पुलिंग कमेटी?

    लैंड पुलिंग कमेटी एक सरकारी निकाय होती है जो शहरी विकास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन सुनिश्चित करती है. इस कमेटी की मंजूरी के बिना किसी भूमि को निजी या वाणिज्यिक उपयोग के लिए नहीं खरीदा जा सकता. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि भूमि खरीद, उपयोग और विकास सभी नियमों के अनुसार हो और किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार या मनमानी से बचा जा सके.

    यह भी पढ़ें :  शोक संदेश: श्रोत एनजीओ के संस्थापक डिक्सन मसीह के पिता श्री नेल्सन मसीह का निधन, आज दोपहर किया जाएगा अंतिम संस्कार

    क्या है धारा 143?

    भारतीय राजस्व संहिता की धारा 143 (Section 143 of UP Revenue Code) के तहत कृषि भूमि के उपयोग को गैर-कृषि (जैसे आवासीय, वाणिज्यिक आदि) में परिवर्तित करने की अनुमति दी जाती है. इसका तात्पर्य है कि किसी भी भूमि का उपयोग बदलने से पहले जिलाधिकारी या संबंधित अधिकारी से अनुमति लेनी होती है. यह प्रक्रिया समय-लेवा होती है, क्योंकि इसमें भूमि का निरीक्षण, रिपोर्ट, और अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा आवश्यक होती है. लेकिन इस मामले में SDM ने यह पूरी प्रक्रिया मात्र 2-3 दिनों में पूरी कर दी, जो संदेह के घेरे में है.

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    Deepak Sahu

    Editor in Chief

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