छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: भगवान नाम ही सर्वोपरि है ,। यदि हमारे चिंतन में भगवान हो तो हर कर्म ही पूजा है। केवल संकेत में ,। उपहास और परिहास में भी भगवान का नाम हमारे मुख से निकल जाए तो मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं । अजामिल ब्राह्मण ने भगवान के पार्षदों से विशुद्ध भागवत धर्म और यमदूतों के मुख से वेदोक्त सगुन धर्म का श्रवण किया जिससे अजामिल के हृदय में भक्ति का उदय हो गया और वह अपने पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त हुआ । यह उद्गार रविशंकर शुक्ल नगर में साहू परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन व्यास पीठ से आचार्य देव कृष्ण महाराज ने प्रकट किया l
उन्होंने श्रोताओं को बताया की भगवान का अवतार। सनातन धर्म की स्थापना और धर्म का नाश करने के लिए होता है । संसार के संपूर्ण प्राणी अपने-अपने कर्मों के अनुसार ही जन्म प्राप्त करते हैं । किंतु मनुष्य जीवन तो बड़ा अनमोल है और इसी जन्म में ही मनुष्य अपने भावी जन्म को सुधारने । सत्संग और भगवान की भक्ति करता है । भक्ति में बड़ी शक्ति होती है कोई भक्त ही भगवान को सातवें आसमान से नीचे उतरकर साक्षात दर्शन भी प्राप्त कर लेता है प्रहलाद जी ने खंभे से भगवान को प्रकट कर दिया । भगवान इस धरती के कण कण में विद्यमान है वह सर्वत्र है । चौथे मन्वंतर में वही भगवान गजेंद्र के पुकारने पर श्री हरि के रूप में प्रकट हो गए थे और गजेंद्र को ग्राह के । बंधन से मुक्त किया । जिस प्रकार गजेंद्र के पैर को ग्राह। पड़ा हुआ था इस प्रकार आज संसार के मनुष्यों के पर को भी ग्राह रूपी मगर पकड़ा हुआ है । इसलिए मनुष्य रहते हैं कि मैं भी भागवत की कथा सुनाने आया होता ,। मगर नहीं आ सका । हमारी समस्या रूपी ग्राह। अर्थात मगर से हमें श्री हरि ही मुक्त कर सकते हैं । इसलिए हरि से हमारा सम्बन्ध कभी न टूटे l
पंडित देव कृष्ण शर्मा ने समुद्र मंथन प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि सुधा अमृत से ज्यादा महत्वपूर्ण कथा अमृत है क्योंकि समुद्र से निकले हुए अमृत । पी लेने के बाद भी देवताओं के मन से दानवों का भय नहीं गया ,किंतु । भागवत रूपी कथा अमृत पी लेने से मनुष्य की। मृत्यु भी मंगलमय हो जाती है l। समुद्र मंथन में देवताओं और दानवों इन दोनों ने। एक समान श्रम एक ही मुहूर्त पर एक ही लक्ष्य अमृत प्राप्त करने के लिए किया था किंतु अमृत तो केवल देवताओं को ही प्राप्त हुआ ,। भगवान कहते हैं कथा अमृत भी केवल उन्हें ही प्राप्त होता है जिनका मन।मुझ पर लगा रहता है l
चौथे दिन की कथा में सभी श्रोताओं ने भगवान के वामन अवतार और श्री कृष्णा प्राकट्य की अद्भुत कथा को श्रवण कर नंद उत्सव ही मनाया l। इस अवसर पर नगर के सैकड़ो श्रोताओं ने । भागवत कथा श्रवण के साथ दिव्य सत्संग का लाभ प्राप्त किया l
कथा के आयोजक अनीता बायचंद साहू ने सभी कथा श्रोताओं को आभार व्यक्त किया।







