लखनऊ/स्वराज टुडे: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के दो जिलों के गांवों के नाम बदलने का निर्णय लिया है. ये गांव फिरोजाबाद और हरदोई जिले में स्थित हैं. सरकार के मुताबिक यह फैसला प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है.
नाम बदलने की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक रूप से साझा की है. फैसले के बाद संबंधित विभागों को आगे की कार्रवाई के निर्देश भी दे दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि नए नाम स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप रखे गए हैं, ताकि लोगों को जुड़ाव महसूस हो सके.
पुराने और नए नाम क्या हैं?
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद तहसील क्षेत्र के ग्राम उरमुरा किरार का नाम बदलकर अब “हरिनगर” कर दिया गया है. यह गांव वासुदेवमई ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है. वहीं हरदोई जिले के भरावन विकासखंड की ग्राम पंचायत हाजीपुर का नया नाम “सियारामपुर” रखा गया है. इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर आधिकारिक घोषणा की. पोस्ट में साफ कहा गया कि दोनों गांवों के नाम परिवर्तन का निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किया गया है.
पहले भी बदले जा चुके हैं कई नाम
गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से कई जिलों, शहरों और प्रमुख स्थानों के नाम बदले जा चुके हैं. उदाहरण के तौर पर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज और फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या किया गया. इन फैसलों को लेकर सरकार का कहना रहा है कि नए नाम ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर रखे गए हैं. नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक मंजूरी के बाद ही पूरी की जाती है.
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शहर, स्टेशन और बस स्टैंड के नाम भी बदले
राज्य ही नहीं, केंद्र की मंजूरी से भी कुछ बड़े नाम परिवर्तन किए गए हैं. जलालाबाद को परशुरामपुरी , मुगलसराय शहर और उसके रेलवे जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर और पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन रखा गया. इसके अलावा पिछले साल जून में अंबेडकर नगर जिले के अकबरपुर बस स्टैंड का नाम बदलकर “श्रावण धाम बस स्टैंड” करने की घोषणा भी की गई थी. सरकार का कहना है कि आगे भी जरूरत और मांग के आधार पर ऐसे प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है.
नाम बदलने का मुख्य उद्देश्य
उत्तर प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने का प्रमुख कारण पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को पुनः स्थापित करना है। योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि औपनिवेशिक (ब्रिटिश) और मुगलकालीन नामों को बदलकर उन्हें उनके मूल/प्राचीन नामों से पहचान देना है, जो पूर्वजों पर गर्व और ‘इतिहास के पहिये को सही दिशा में मोड़ने’ का प्रयास है।
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