जिसने लगाया बहुत ही हाई-टेक हिडन कैमरा, उसकी देनी पड़ेगी दाद! हर एंगल से नजर आ गई डीजीपी की काली करतूत

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नई दिल्ली/स्वराज टुडे: सरकारी ऑफिस में एक सीक्रेट हिडन कैमरा अपनी चुपचाप निगरानी कर रहा था…कमरे में हल्की सी आवाज़ें, डॉक्यूमेंट्स की सरसराहट और किसी की धीमी हंसी तक उस कैमरे की नजर से बच नहीं पा रही थीं, और कोई ये भी अंदाजा नहीं लगा सकता था कि उस छोटे से लेंस ने एक ऐसा वीडियो रिकॉर्ड कर रखा है जिससे किसी सरकारी अफसर की वर्दी पर भी बात आ जाएगी.

ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. इसमें साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि सरकारी ऑफिसर अपने ऑफिस चैंबर में, एक महिला के साथ नजर आ रहे हैं . सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि – उन्हें खुद यह भी पता नहीं था कि हर पल कैमरे में कैद हो रहा था.

एक आईपीएस अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह कानून और व्यवस्था बनाए रखे, और डीजीपी रैंक के अधिकारी ने इस भरोसे की नींव को हिलाकर रख दिया. जी हां, हम उसी वीडियो की बात कर रहे हैं जिसमें कर्नाटक के सीनियर आईपीएस, डीजीपी रैंक के अधिकारी डॉ. के. रामचंद्र राव ऑफिस चैंबर में महिलाओं के साथ रंगरेलियां करते हुए नजर आए हैं. हिडन कैमरे आज की आधुनिक दुनिया में एक दोधारी तलवार बन गए हैं. जहां ये सुरक्षा के लिए मददगार हो सकते हैं, तो वहीं गलत हाथों में ये निजता का गंभीर उल्लंघन भी कर सकते हैं. जिस भी शख्स ने ये हिडन कैमरे लगाए थे उसकी तो दाद देनी बनती है क्योंकि हर पल को उस कैमरे ने काफी आसानी और क्लियर तरह से कैद किया हुआ है.

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वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किए गए खास हिडन कैमरे

सूत्रों के अनुसार, यह वीडियो कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों द्वारा रिकॉर्ड किया गया था. बताया जा रहा है कि यह रिकॉर्डिंग करीब एक साल पुरानी है और इसे कथित तौर पर वीडियो में दिखाई जा रही महिला अभिनेत्री रान्या राव के सोने की तस्करी के मामले में गिरफ्तारी से पहले बनाया गया था. खास बात यह है कि वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किए गए हिडन कैमरे इतने यूनिक और खास थे कि डॉ. रामचंद्र राव को इसकी भनक तक नहीं लगी. कैमरे की पोजिशन इस तरह थी कि उनकी टेबल के हर कोने को कैप्चर किया गया, जिससे वीडियो में महिला का चेहरा और अधिकारी की गतिविधियां स्पष्ट रूप से नजर आ रही थी. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कैमरों का उपयोग आम तौर पर सुरक्षा या निगरानी उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाता, बल्कि इसे विशेष रूप से गोपनीय रूप से रिकॉर्ड करने के लिए डिजाइन किया जाता है.

हाई-टेक फीचर्स वाले कैमरे का किया गया यूज

कर्नाटक सरकार ने वीडियो वायरल होने के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए डॉ. रामचंद्र राव को सस्पेंड कर दिया. अधिकारी ने हालांकि दावा किया है कि यह वीडियो मॉर्फ्ड और साजिश के तहत बनाया गया है. वहीं, पुलिस और प्रशासन ने इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है. वीडियो के माध्यम से यह भी सामने आया है कि अधिकारी के ऑफिस में इस्तेमाल कैमरे की क्षमता इतनी अधिक थी कि कमरे के हर कोने, डॉक्यूमेंट्स और बातचीत को भी कैप्चर किया जा सकता था, जो निजता और गोपनीयता के लिहाज से संवेदनशील मामला बनाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तरह के कैमरे आम तौर पर काफी महंगे और हाई-टेक होते हैं, जिनमें मोशन डिटेक्शन, रिमोट लाइव स्ट्रीमिंग और लंबे समय तक रिकॉर्डिंग करने की क्षमता होती है.

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इन कैमरों का आकार, डिजाइन और तकनीक इतनी सूक्ष्म हो गई है कि आम आंख से इन्हें देख पाना मुश्किल हो गया है. छुपे कैमरे कई प्रकार के होते हैं. सबसे आम हैं वॉयरलेस पेन कैमरे, जो देखने में सिर्फ एक आम पेन लगते हैं, लेकिन इनमें उच्च क्वालिटी का कैमरा लगा होता है. इन्हें ऑफिस, मीटिंग रूम और घर में आसानी से रखा जा सकता है. डिक्शनरी या घड़ी वाले कैमरे भी काफी प्रचलित हैं. ये देखने में साधारण घड़ी या किताब लगते हैं, लेकिन असल में इनमें वीडियो रिकॉर्डिंग की क्षमता होती है.

इसके अलावा, स्मोक डिटेक्टर और लैंप कैमरे भी इस्तेमाल किए जाते हैं. इनमें लगे कैमरे बेहद उच्च तकनीक के होते हैं और 360 डिग्री का व्यू कैप्चर कर सकते हैं. घर, ऑफिस या होटल रूम में इन्हें आसानी से छिपाया जा सकता है. USB ड्राइव और चार्जर कैमरे भी नई तकनीक का हिस्सा हैं. इन कैमरों को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि यह सिर्फ पावर देने के लिए नहीं, बल्कि रिकॉर्डिंग के लिए भी इस्तेमाल हो रहा है.

पुलिस डिपार्टमेंट की नैतिकता पर खड़ा हुआ सवाल

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस वीडियो को अभी क्यों जारी किया गया, और इसे किसने सोशल मीडिया पर अपलोड किया. अधिकारियों का कहना है कि यह मामला निजता, सुरक्षा और प्रशासनिक छवि के लिहाज से गंभीर है और जांच में यह देखा जाएगा कि किसने कैमरा लगाया और इसका मकसद क्या था. इस विवाद ने न केवल डॉ. रामचंद्र राव की व्यक्तिगत छवि को प्रभावित किया है, बल्कि कर्नाटक पुलिस की साख और भरोसे पर भी प्रश्न खड़ा किया है.

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आपको बता दें कि वीडियो में कोई जबरदस्ती या गैर-सहमति का आरोप नहीं लग रहा, लेकिन ड्यूटी टाइम पर सरकारी जगह पर ऐसा बिहेवियर सीनियर पुलिस अधिकारी की गरिमा और अनुशासन के खिलाफ है.जिससे पुलिस डिपार्टमेंट की नैतिक साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उच्च पद पर कार्यरत अधिकारियों के मामलों में गोपनीय रिकॉर्डिंग और मीडिया में वायरल होने से सरकारी संस्थाओं की छवि पर गहरा असर पड़ सकता है.

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दीपक साहू

संपादक

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