नई दिल्ली/स्वराज टुडे: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान सरकार 14 अहम बिल पेश करने की योजना बना रही है। वहीं विपक्ष 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चीन और लाल किले के पास ब्लास्ट जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में है।
संसद सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीति गरम हो गई है, क्योंकि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की है।
राहुल-सोनिया गांधी सहित 9 पर एफआईआर
नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल और सोनिया गांधी के अलावा 3 कंपनियों और 6 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को धोखाधड़ी से हासिल किया। जांच के अनुसार, इस अधिग्रहण को यंग इंडियन कंपनी के जरिए किया गया था। यंग इंडियन में राहुल और सोनिया गांधी की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ईडी ने इस मामले में पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 66 (2) का इस्तेमाल किया। इस धारा के तहत केंद्रीय एजेंसी को कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा आपराधिक मामले दर्ज करने के लिए साक्ष्य साझा करने की अनुमति मिलती है। प्राथमिकी से ईडी के मामले और आरोपपत्र मजबूत होंगे और जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
16 दिसंबर को कोर्ट का फैसला
यह मामला 26 जून 2014 की है, जब दिल्ली की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत पर नेशनल हेराल्ड से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर संज्ञान लिया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि “न तो नया पैसा, न नई संपत्ति, न नई कंपनियां हैं, फिर भी इस मामले को धन शोधन का मामला बना दिया गया। यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश है। संसद में शीतकालीन सत्र शुरू होने से एक दिन पहले राहुल और सोनिया गांधी पर एफआईआर दर्ज होने से कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ गई है। 16 दिसंबर 2025 को कोर्ट इस मामले में फैसला सुनाएगी। अगर फैसला कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के खिलाफ जाता है तो पार्टी की लड़ाई कमजोर हो सकती है।
विपक्षी समर्थन और रणनीति की चुनौती
कांग्रेस के अंदर उम्मीद जताई जा रही है कि कार्यकर्ता गांधी परिवार पर ध्यान केंद्रित करेंगे। लेकिन राहुल गांधी ने कर्नाटक में सत्ता संघर्ष को ठंडे बस्ते में रखने की रणनीति बनाई थी ताकि 14 दिसंबर की महारैली और SIR के मुद्दों से ध्यान न भटके। अब सवाल यह है कि विपक्षी दल जैसे DMK, TMC और RJD, जिन पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वे संसद में कांग्रेस का समर्थन करेंगे या पार्टी अकेली रह जाएगी। संसद सत्र और नेशनल हेराल्ड केस दोनों ही कांग्रेस के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ाने वाले हैं। पार्टी को अपने नेताओं और सहयोगियों के साथ रणनीति बनाकर आगे बढ़ना होगा, ताकि सत्र में उसका असर बना रहे और राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।
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