सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू महिलाओं से की अपील, अपने उम्र की परवाह किए बिना तत्काल बनवा लें अपनी वसीयत

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नई दिल्ली/स्वराज टुडे: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम टिप्पणी की है।टॉप कोर्ट ने विवाहित हिंदू महिलाओं से अपील की है कि अगर वे चाहती हैं कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति उनके परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों को मिले, तो वे वसीयत छोड़ जाएं हिंदुओं के उत्तराधिकार के मौजूदा कानून के तहत निःसंतान विधवा की संपत्ति उसकी मृत्यु के बाद उसके पति के परिवार को दे दी जाती है।

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने ये टिप्पणी उत्तराधिकार कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली एक महिला वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

सुप्रीम कोर्ट की हिंदू महिलाओं से अपील

न्यायालय ने कहा, ‘याचिकाकर्ता का किसी भी संपत्ति पर कोई व्यक्तिगत दावा नहीं है। उसने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (एचएसए) की धारा 15(1)(बी) की संवैधानिक वैधता की जांच के लिए जनहित में यह याचिका दायर की है। हम याचिकाकर्ता के कहने पर इस मुद्दे पर विचार नहीं करना चाहते।

हम इस प्रावधान से प्रभावित व्यक्तियों को उचित कार्यवाही में इसकी संवैधानिकता को चुनौती देने की स्वतंत्रता सुरक्षित रखते हैं।’ पीठ ने संबंधित प्रावधानों के संबंध में कोई भी निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया।

संपत्ति के लिए वसीयत बनाने का आग्रह

पीठ ने कहा, ‘यदि किसी मृत महिला के माता-पिता उसकी संपत्ति पर दावा करते हैं, तो अदालती कार्यवाही शुरू करने से पहले मामले को मध्यस्थता के माध्यम से पारित करना अनिवार्य होगा।”

‘पीठ ने आगे कहा, “हम सभी महिलाओं, खासकर हिंदू महिलाओं से अपील करते हैं कि वे भविष्य में मुकदमेबाजी से बचने के लिए वसीयतनामा बनाएं।’

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केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम।नटराज ने याचिका का विरोध किया और कहा कि ये प्रश्न प्रभावित पक्षों द्वारा उठाए जाने चाहिए।

उत्तराधिकार कानून पर SC की महत्वपूर्ण टिप्पणी

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, हिंदू महिला की संपत्ति पर पहला दावा उसके पति और उसके बेटे या बेटियों का होता है। उसके बाद पति के उत्तराधिकारी और फिर उसके माता-पिता आते हैं।

वरीयता क्रम में महिला के माता-पिता उत्तराधिकारी के रूप में सबसे नीचे हैं। इन प्रावधानों के कारण अक्सर उसके पति के परिवार के सदस्यों और उसके माता-पिता के बीच विवाद होता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने पहले कहा था कि वह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करते समय सावधानी बरतेगा। न्यायालय ने कहा था कि महिलाओं के अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन “सामाजिक संरचना और महिलाओं को अधिकार देने के बीच संतुलन” भी होना चाहिए।

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दीपक साहू

संपादक

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