यूपीआई आज करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन जितना इसका इस्तेमाल बढ़ा है, उतनी ही इससे जुड़ी अफवाहें और ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं। हाल के महीनों में यूपीआई शुल्क को लेकर फैली भ्रांतियों के बाद सरकार को खुद सफाई देनी पड़ी। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि यूपीआई इस्तेमाल करते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सबसे पहले शुल्क की सच्चाई समझ लें। केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में स्पष्ट किया कि यूपीआई इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से कोई लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति को होने वाले सभी भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यानी आपकी रोज की छोटी-बड़ी अदायगी पर कोई नया बोझ नहीं पड़ा है।
अक्टूबर 2026 से क्या बदला है?
15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा दुकानदारों के भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का व्यापारी शुल्क लागू हुआ है, लेकिन यह शुल्क ग्राहक पर नहीं, व्यापारी पर लगता है और प्रति लेनदेन 300 रुपये तक सीमित है। छोटे दुकानदार, जिनकी मासिक यूपीआई प्राप्ति एक लाख रुपये से कम है, इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त हैं। एनपीसीआई के अनुमान के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन दो हजार रुपये से नीचे के होते हैं और मुफ्त ही रहेंगे।
सीधी भाषा में कहें तो आपकी जेब पर इसका कोई असर नहीं है। दुकान पर सामान का दाम वही रहेगा, चाहे आप नकद दें या यूपीआई से। अगर कोई दुकानदार यूपीआई पर अतिरिक्त शुल्क मांगे तो यह नियमों के खिलाफ है।
पेमेंट करने से पहले की जरूरी सावधानियां
असली खतरा शुल्क में नहीं, ठगी में है। यूपीआई ठगी के ज्यादातर मामले तकनीकी खामी से नहीं, बल्कि लोगों को बहकाकर किए जाते हैं। इसलिए पहला नियम है कि अपना यूपीआई पिन और ओटीपी कभी किसी के साथ साझा न करें। बैंक या कोई भी असली संस्था आपसे पिन नहीं मांगती।
दूसरा, पैसा भेजने से पहले प्राप्तकर्ता का नाम जरूर जांच लें। गलत नंबर पर गया पैसा वापस पाना मुश्किल हो सकता है। तीसरा, अनजान लिंक, क्यूआर कोड या फर्जी कस्टमर केयर नंबरों से सावधान रहें। चौथा, अपने बैंक की दैनिक लेनदेन सीमा जान लें और यूपीआई ऐप को हमेशा अपडेट रखें। अगर कोई अनधिकृत लेनदेन हो जाए तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और 1930 हेल्पलाइन या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत करने पर ग्राहक-सुरक्षा नियमों के तहत राहत मिल सकती है, जबकि देर करने पर जिम्मेदारी ग्राहक पर आ सकती है।
एक और आम ठगी का तरीका है पैसे पाने के नाम पर कलेक्ट रिक्वेस्ट भेजना। याद रखें, पैसे पाने के लिए कभी पिन डालने की जरूरत नहीं होती। अगर कोई कहे कि रकम पाने के लिए अनुरोध स्वीकार करें, तो यह ठगी है। दुकानों पर भुगतान करते समय क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद भी व्यापारी का नाम जरूर मिलाएं। बड़ी रकम के भुगतान से पहले अपने बैंक की दैनिक सीमा देख लें, ताकि बीच में लेनदेन अटके नहीं। ये छोटी आदतें आपके डिजिटल भुगतान को कहीं ज्यादा सुरक्षित बना देती हैं।
यह लेख सामान्य जानकारी और मार्गदर्शन के लिए है; कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपने बैंक या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि अवश्य करें।
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