छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से हम एक अत्यंत गंभीर विषय पर देश की जनता के समक्ष अपनी बात रखना चाहते हैं।
सबसे पहले मैं स्पष्ट कर दूँ कि प्रश्न भगवान श्रीराम पर नहीं है। श्रीराम भारत की आत्मा हैं, करोड़ों लोगों की आस्था हैं तथा मर्यादा, न्याय और सत्य के प्रतीक हैं। हमारा प्रश्न केवल इतना है कि क्या भगवान श्रीराम के नाम पर करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान, बहुमूल्य धरोहरों और विश्वास की सुरक्षा सुनिश्चित है?

राम मंदिर किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। राम भाजपा के नहीं हैं। राम कांग्रेस के भी नहीं हैं। राम पूरे भारत के हैं, करोड़ों श्रद्धालुओं के हैं। इसलिए मंदिर में चढ़ाया गया प्रत्येक रुपया, प्रत्येक आभूषण और प्रत्येक धरोहर करोड़ों श्रद्धालुओं की अमानत है।
जनता जानना चाहती है

चुनाव आते ही भाजपा भगवान श्रीराम के नाम पर वोट मांगती है और राम मंदिर को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताती है। लेकिन जब मंदिर के चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन पर प्रश्न उठते हैं, तब भाजपा मौन क्यों हो जाती है? क्या राम केवल वोट लेने तक सीमित हैं? क्या जवाबदेही केवल विपक्ष की होती है? हम केवल इतना कह रहे हैं कि जहाँ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हो, वहाँ पारदर्शिता सबसे बड़ी पूजा है।
यदि सब कुछ सही है, तो सरकार बताए-
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच क्यों नहीं? … स्वतंत्र SIT या CBI जांच क्यों नहीं?… सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच से परहेज़ क्यों?… यदि जांच निष्पक्ष होगी और सब कुछ सही निकलेगा, तो सबसे अधिक प्रसन्नता करोड़ों रामभक्तों को होगी।
सबसे बड़ा प्रश्न

अरबों की अनियमितता हुई है, तो क्या वह केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों से संभव है?… क्या स्टॉक रजिस्टर, डिजिटल रिकॉर्ड, ऑडिट, CCTV निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की थी?
देश जानना चाहता है-
ट्रस्ट का विस्तृत ऑडिट कब हुआ?… ऑडिट किस एजेंसी ने किया? स्टॉक सत्यापन किसने किया?… डिजिटल रिकॉर्ड किसके नियंत्रण में था?… सुरक्षा व्यवस्था की अंतिम जवाबदेही किसकी थी?
यदि सरकार पारदर्शिता चाहती है, तो पिछले वर्षों का ऑडिट, इन्वेंट्री रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, डिजिटल दान का विवरण और आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती ? लोकतंत्र में प्रश्न पूछना विपक्ष का दायित्व है और जवाब देना सरकार का।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
1. पूरे प्रकरण की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी अथवा स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच।
2. समयबद्ध जांच और उसकी सार्वजनिक रिपोर्ट।
3. छोटे कर्मचारियों से लेकर उच्च पदाधिकारियों तक जवाबदेही तय की जाए।
4. दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके विरुद्ध समान कानूनी कार्रवाई हो।
5. श्रीराम मंदिर सहित देश के सभी प्रमुख मंदिरों में पारदर्शी प्रबंधन व्यवस्था लागू की जाए, जिसमें डिजिटल इन्वेंट्री, ऑनलाइन लेखांकन, वार्षिक स्वतंत्र ऑडिट, सार्वजनिक वित्तीय रिपोर्ट तथा नियमित स्टॉक सत्यापन अनिवार्य हो।
सरकार से सीधे प्रश्नः
1. क्या प्रधानमंत्री जी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराएँगे?…. क्या ट्रस्ट का पूरा ऑडिट सार्वजनिक किया जाएगा?… क्या जांच उच्च पदाधिकारियों तक भी पहुँचेगी?… क्या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?… क्या दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके विरुद्ध समान कार्रवाई होगी?
अंत में कहना चाहूँगा किः
भाजपा वर्षों से रामराज्य की बात करती है। रामराज्य का पहला सिद्धांत था न्याय। दूसरा सिद्धांत था सत्य। तीसरा सिद्धांत था जवाबदेही। यदि यही रामराज्य है, तो पारदर्शिता से डर कैसा? आज हमारा केवल एक प्रश्न है- क्या भगवान श्रीराम के नाम पर करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित विश्वास की भी जवाबदेही होगी या नहीं?
कांग्रेस की मांग केवल इतनी है-
निष्पक्ष जांच हो।… पूर्ण पारदर्शिता हो।… पूरी सच्चाई देश के सामने आए। … और जो भी दोषी हो, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो।
राम किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं हैं। आस्था का सम्मान सत्य, पारदर्शिता और जवाबदेही से होता है। राम के नाम पर वोट भी चाहिए और जवाबदेही नहीं यह नहीं चलेगा। जहाँ करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास जुड़ा हो, वहाँ पारदर्शिता ही सबसे बड़ी पूजा है।

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