छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल की मेगा परियोजना दीपका कोयला खदान में स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा हैं कि इसके विस्तार और भारी ब्लास्टिंग ने स्थानीय निवासीयो का जीना मुहाल कर दिया है।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा हैं कि खदान की गहराई बढने से क्षेत्र का भू-जल स्तर भी गिर गया है, जिससे पंचायत के दो मुख्य बोर पंप पूरी तरह सूख गए हैं। इसका सीधा असर हॉस्पिटल मोहल्ला, गांधीनगर और कॉलेज रोड सहित करीब 400 परिवारों पर पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप लगाते हुए आगे कहना है कि नल सूखने के बाद अब उन्हें 50 मीटर दूर से बाल्टी में पानी ढोना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वे 60 रुपए खर्च कर पानी का जार खरीदने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अभी समाधान नहीं हुआ, तो गर्मियों में स्थिति विस्फोटक हो जाएगी। 25 साल पुरानी टंकी भरने वाले दोनों बोर सूख चुके हैं और एसईसीएल द्वारा भेजे जा रहे टैंकर ऊंट के मुंह में जीरा के समान हैं।
पानी की समस्या के साथ विस्थापन का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। ग्रामीणों ने प्रबंधन के सामने अपनी शर्तें रखी हैं। 2004 और 2010 में अधिग्रहित जमीन का मुआवजा 2025-26 के वर्तमान बाजार मूल्य पर दें, नई बसाहट का नाम ग्राम पंचायत हरदीबाजार ही रखें। मकान तोडऩे से पहले 100 फीसदी मुआवजा राशि का भुगतान अनिवार्य हो।
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