KVK कर्मचारियों की कामबंद हड़ताल का तीसरा दिन, शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने का प्रयास, फिर भी डटे रहे प्रदर्शनकारी

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* प्रशासनिक भवन में ताला, पुलिस बल की तैनाती

* गेट के बाहर धरना देने को मजबूर कर्मचारी, महिला कर्मी बेहोश 

* विश्वविद्यालय की अमानवीय प्रताड़ना उजागर

रायपुर/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र सर्व कर्मचारी कल्याण संघ द्वारा KVK अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वेतन-विसंगति, लंबित देयकों एवं सेवा-लाभों की बहाली की मांग को लेकर 16 से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित पाँच दिवसीय कामबंद हड़ताल सह धरना-प्रदर्शन का आज तृतीय दिवस रहा।
संघ ने गंभीर एवं चौंकाने वाले घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि शांतिपूर्ण, संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आज प्रशासनिक भवन के मुख्य गेट में ताला लगा दिया गया, जिससे KVK के अधिकारी-कर्मचारियों को विश्वविद्यालय परिसर के भीतर प्रवेश करने से पूर्णतः रोक दिया गया।

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इस कार्रवाई के दौरान पुलिस दल-बल की तैनाती की गई, जिससे भय और दबाव का वातावरण निर्मित किया गया। गेट में ताला लगे होने के कारण संघ के पदाधिकारी एवं कर्मचारी प्रशासनिक भवन के बाहर, खुले गेट के सामने ही धरना-प्रदर्शन करने को विवश हुए। तेज धूप, असहनीय गर्मी एवं मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बावजूद कर्मचारी शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से धरने पर बैठे रहे।
इसी दौरान एक महिला KVK कर्मी तेज धूप एवं मानसिक तनाव के कारण धरना स्थल पर ही बेहोश होकर गिर पड़ी, जिन्हें तत्काल सहयोगियों द्वारा अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया। संघ ने इस घटना को विश्वविद्यालय प्रशासन की अमानवीय, असंवेदनशील एवं प्रताड़नात्मक कार्यशैली का प्रत्यक्ष परिणाम बताया है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि दिनांक 17 फरवरी 2026 को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी संस्था प्रमुखों/वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुखों को व्यक्तिगत पत्र जारी कर यह पूछा गया कि वे धरना-प्रदर्शन में क्यों शामिल हुए, जो स्पष्ट रूप से कर्मचारियों को डराने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने एवं आंदोलन से अलग करने का प्रयास है।

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संघ ने कहा कि—
• विगत 18 माह से KVK कर्मचारियों को पूर्ण वेतन एवं वैधानिक भत्ते प्राप्त नहीं हुए हैं,
• कर्मचारियों के परिवार, बच्चों की शिक्षा एवं दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं,
• आर्थिक संकट के साथ-साथ गंभीर मानसिक तनाव की स्थिति बनी हुई है,
• इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन संवाद के स्थान पर ताला-बंदी, पुलिस बल, नोटिस एवं दबाव की नीति अपना रहा है।

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संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मध्य संपन्न समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत KVK कर्मचारियों से संबंधित समस्त दायित्व मेजबान संस्था—इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का है।
MoU के प्रावधानों के अनुसार KVK कर्मचारियों को होस्ट संस्था के समकक्ष अधिकारियों/कर्मचारियों के समान वेतन, भत्ते, सुविधाएँ एवं सेवा-लाभ दिए जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा इन दायित्वों से पल्ला झाड़ते हुए कर्मचारियों को विगत 18 माह से पूर्ण वेतन एवं वैधानिक भत्तों से वंचित रखा गया है।

संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अंतिम बार चेतावनी स्वरूप मांग की है कि—
कर्मचारियों की सभी वैधानिक मांगों पर तत्काल, लिखित एवं समयबद्ध निर्णय लिया जाए, अन्यथा यह आंदोलन और अधिक व्यापक एवं तीव्र रूप लेने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूर्ण नैतिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

संघ ने दो टूक शब्दों में कहा—
यह आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सम्मान और अधिकारों के साथ हो रहे इस प्रकार के अमानवीय व्यवहार को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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दीपक साहू

संपादक

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