इस हिन्दू बाहुल्य इलाके में घर से ही नहीं निकले हिन्दू वोटर, जीत गई नागपुर हिंसा के आरोपी की बीवी अलीशा, मस्जिद से क्या ऐलान हुआ था ?

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नागपुर/स्वराज टुडे: महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजे आ गए. निकाय चुनाव में नागपुर हिंसा के मास्टरमाइंड की पत्नी ने भी जीत का परचम लहरा दिया है. फहीफ शमीम खान नागपुर हिंसा का मुख्य आरोपी है.

फहीम शमीम खान की पत्नी नागपुर महानगर पालिका चुनाव में 9295 वोट लेकर भाजपा प्रत्याशी से 1850 वोटो जीत गई है. 4 पार्षदों के प्रभाग क्रमांक 3 में फहीम की पत्नी अलीशा और उसके 2 साथी एमआईएम के टिकट पर चुनाव जीते हैं. वहीं भाजपा को 4 में से 1 एससी रिजर्व सीट पर जीत मिली है. जबकि इस प्रभाग में इससे पहले हुए चुनाव में भाजपा ने 3 सीटों पर जीत हासिल की थी, वहीं कांग्रेस 1 सीट पर जीती थी. इस इलाके में 64500 की आबादी हिंदुओं की है. इस इलाके में हिन्दू बहुसंख्यक होने के बावजूद फहीम की पत्नी ने चुनाव में जीत हासिल की है.

घरों से नहीं निकले हिंदू वोटर और फहीम की पत्नी जीत गई चुनाव

करीब 64500 की आबादी वाले इस प्रभाग में 31000 हिन्दू वर्ग के मतदाता हैं. वहीं 24000 के करीब मुस्लिम वर्ग मतदाता और 9500 दलित वर्ग मतदाता हैं. दलित वर्ग में से अलग-अलग समुदायों के लगभग 2000 मतदाता ऐसे हैं, जो खुद को हिंदू समुदाय का हिस्सा मानते हैं. अब सवाल है कि क्या भाजपा हिंदू वोटर्स को घरों से नहीं निकला पाई? या फिर भाजपा के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी ने नागपुर हिंसा के आरोपी की पत्नी को फायदा दिलाया? कुछ लोगों का कहना है कि मुस्लिम इलाकों में मस्जिदों से वोट देने के लिए ऐलान किया गया था.

मस्जिदों से हुआ ऐलान , वोट डालने की अपील की

एक तरफ जहां इसी वार्ड में मुस्लिम इलाकों में जमकर मतदान हुआ, वही हिंदू इलाकों में लोग घरों से वोट डालने के लिए कम निकले. स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिदों से वोट डालने की अपील के लिए ऐलान हुआ. मुस्लिम वोटरों ने बढ़ चढ़कर मतदान किया. वहीं, हिंदुत्ववादी राजनीतिक पार्टियां अपने कैडर के लोगों को वोट डालने के लिए पूरी तरह नहीं निकाल पाई. मुस्लिम बहुल इन इलाकों के पोलिंग बूथ पर 65 प्रतिशत से भी ज्यादा मतदान हुआ.

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ये मुस्लिम बहुल इलाके हैं-

  • संघर्ष नगर
  • निजामुद्दीन कालोनी
  • महबूब पूरा
  • सर्वरा आबाद नगर
  • हामिद नगर
  • शाहनवाज ले आऊट
  • संजय बैग कालोनी
  • राजीव गांधी नगर
  • बंदे नवाज नगर

वहीं, इन हिंदू बहुल इलाकों में 40 प्रतिशत के आसपास वोट पड़े हैं. किन हिंदू इलाकों में पड़े कम वोट?

  • पांडे की बस्ती
  • अरविंद नगर
    संगम नगर
  • गरीब नवाज नगर हिंदू बस्ती
  • पवन नगर
  • शिवशक्ति नगर
  • विनोबा भावे नगर
  • संतोष नगर
  • नागसेवन
  • शिर्के ले आऊट
  • शिव नगर भीमवाड़ी रमाई नगर पावने ले आउट
  • पीली नदी

क्या पुराने पार्षदों को लेकर थी नाराजगी?

इन इलाकों में संगठन का काम करने वाले कुछ स्थानीय नेताओं का कहना था कि भाजपा और कांग्रेस से जीतकर आए पार्षदों ने विकास की तरफ पूरा ध्यान नहीं दिया. इलाका पिछड़ा हुआ रहा, जबकि आसपास के इलाकों में काम में बढ़ोत्तरी देखी गई. इसके चलते स्टैंडिंग भाजपा के 3 पार्षदों और कांग्रेस के 1 पार्षद के खिलाफ नाराजगी थी. इसके बावजूद शहर के स्थानीय नेताओं ने एंटी इनकंबंसी वाले नेताओं को टिकट दी. वहीं इलाके में कट्टर हिंदुत्ववादी छवि रखनेवाले 1 नेता की पत्नी को टिकट न देकर पुरानी नेत्री को ही टिकट दिया गया. इसी का खामियाजा भुगतना पड़ा, जिसके चलते भाजपा का कैडर वोट देने कम निकला.

वोट काटने के चलते भाजपा का पत्ता साफ?

वहीं, इसके अलावा आम आदमी पार्टी की नेत्री ने जया मोरे ने 3529 वोट काटे हैं. जया मोरे का बेटा इलाके का समाज सेवक है और उन्होंने भी भाजपा के वोटो में सेंधमारी की. वहीं, कांग्रेस को 6003 वोट मिले हैं, जिसमें बूथ के अनुसार मुस्लिम और दलित इलाकों के ज्यादातर वोट्स शामिल हैं. इसके बावजूद मुस्लिम इलाकों में हुए जोरदार मतदान के चलते फहीम की पत्नी जीत गई. ये परिणाम उन स्टैंडिंग पार्षदों और जन प्रतिनिधियों के लिए एक सबक है, जिनका मकसद पार्टी की आड़ में अपना उल्लू सीधा करना है. अगर उन्होंने जनहित में कोई काम नहीं किया तो क्षेत्र की जनता उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना बहुत अच्छे से जानती है.

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किसे कितने वोट मिले

  • AIMIM -9225
  • BJP- 7445
  • Cong- 6003
  • AAP- 3529

गडकरी के खिलाफ फहीम लड़ चुका चुनाव

बहरहालल, नागपुर हिंसा का मुख्य आरोपी फहीम इससे पहले नितिन गडकरी के खिलाफ नागपुर से लोकसभा चुनाव भी लड़ चुका है. हालांकि, उसे 25 लाख की जनसंख्या वाले नागपुर शहर से महज 5000 के करीब वोट मिले थे. लेकिन नागपुर हिंसा के बाद फहीम का जीतकर आना बता रहा है कि मुस्लिम इलाकों में उसकी लोकप्रियता बढ़ी है.

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दीपक साहू

संपादक

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