छत्तीसगढ़
मुंगेली/स्वराज टुडे: दिनांक 25 मार्च 2026 को पादप कार्यिकी, कृषि जैव रसायन तथा औषधीय एवं सगंध फसल विभाग द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत औषधीय एवं सगंध फसलों पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, मंगेली में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर केंद्र के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस. के. लहरे द्वारा प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. यमन कुमार देवांगन का स्वागत किया गया तथा उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इसके पश्चात डॉ. यमन कुमार देवांगन द्वारा प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) के माध्यम से मुंगेली जिले के किसानों को औषधीय एवं सगंध फसलों की उन्नत खेती की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने विशेष रूप से पुदीना, लेमनग्रास, सिट्रोनेला, पामारोज़ा, खस (वेटिवर), तुलसी, एलोवेरा, कालमेघ, अश्वगंधा, सर्पगंधा, शतावरी, गिलोय, ब्राह्मी, सफेद मूसली, इसबगोल, मॅथा आदि प्रमुख औषधीय एवं सगंध फसलों की खेती, उनके औषधीय महत्व, उत्पादन तकनीक एवं आय की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम में डॉ. प्रमिला जोगी द्वारा “औषधीय एवं सगंध फसलों की व्यावसायिक खेती में कृषि विज्ञान केंद्र की भूमिका” विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। वहीं श्रीमती नेहा लहरे, विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि प्रसार) द्वारा “स्वयं सहायता समूह एवं कृषक उत्पादक संगठन की भूमिका” विषय पर विस्तृत तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस अवसर पर केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस. के. लहरे, विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. प्रमिला जोगी, विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि प्रसार) श्रीमती नेहा लहरे, इंजीनियर पल्लवी पोरते, श्री गजेन्द्र टंडन, कृषि विभाग से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी कुमारी योगेश्वरी मार्को, ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक श्री चेतन कुर्रे, सहित श्री कुमान ओग्रे एवं श्री डोमन सोनवानी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में कुल 55 किसान, किसान मित्र एवं ग्रामीणजन सम्मिलित हुए तथा सभी ने प्रशिक्षण का लाभ उठाया। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने औषधीय एवं सगंध फसलों की खेती को अपनाने में रुचि व्यक्त की और इसे आयवर्धन का एक सशक्त माध्यम बताया।
अंत में डॉ. यमन कुमार देवांगन द्वारा प्रतिभागी कृषकों को प्रशस्ति-पत्र वितरित किए गए तथा उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप इंसुलिन का पौधा एवं मीठी तुलसी (स्टीविया) के पौधे भी प्रदान किए गए।

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