DPO ने जारी किया तुगलकी फरमान, अब जिला बाल संरक्षण अधिकारी और कर्मचारी करेंगे बाल संप्रेक्षण गृह की ‘चौकीदारी’

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छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश का एक आदेश इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस आदेश में उन्होंने जिला बाल संरक्षण इकाई के दर्जन भर अधिकारियों–कर्मचारियों की बाल संप्रेक्षण गृह में ड्यूटी लगा दी है। आदेश में कहा गया है कि संबंधित अधिकारी– कर्मचारी छुट्टी के दिनों में संप्रेक्षण गृह के बाल अपराधियों की निगरानी और देखरेख करेंगे। इस आदेश को लेकर कर्मचारियों के बीच यह चर्चा छिड़ गई है कि क्या अब उन्हें बाबूगिरी के साथ चौकीदारी भी करनी पड़ेगी ?

सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के चलते भाग चुके हैं अनेक बाल अपराधी

महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारी बताते हैं कि कोरबा जिले के बाल संप्रेक्षण गृह से अब तक अनेक बाल अपराधी भाग चुके हैं। संप्रेक्षण गृह अब तक अलग–अलग भवनों में संचालित हो चुका है और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के चलते यहां से कई बाल अपराधी भाग चुके हैं, जिसके चलते नोडल एजेंसी महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा की काफी किरकिरी हो चुकी है।

भ्रष्ट तंत्र का फायदा उठा रहे लापरवाह कर्मचारी

बाल संप्रेक्षण गृह के स्टाफ भी काफी लापरवाह हैं, जिसके चलते यहां अव्यवस्था का आलम है। पिछले दिनों संप्रेक्षण गृह के अंदर बच्चों का वीडियो भी वायरल हो चुका है, जिसे रील बनाकर एक बाल अपराधी ने इंस्टाग्राम पर डाला था। मामले की जांच के बाद यहां की महिला स्टाफ (हाउस फादर) को पहले छुट्टी पर भेजा गया, फिर विभाग के कार्यालय में अटैच कर दिया गया है। उसके खिलाफ अभी तक कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की गई है। इसके अलावा बच्चों के संप्रेक्षण गृह से भागने के मामले में भी किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है। इससे पता चलता है कि पूरे सिस्टम में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी है जिसका पूरा लाभ लापरवाह कर्मचारियों को मिल रहा है।

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केवल एक सुरक्षा गार्ड के भरोसे होम्स

जानकारी के मुताबिक बाल संप्रेषण गृह, जहां हत्या, बलात्कार, लूटपाट, चोरी और अन्य वारदातों से जुड़े बाल और किशोर अपराधियों को रखा जाता है, वहां एक पाली के लिए केवल एक गार्ड की ड्यूटी लगाई जा रही है। यहां होम गार्ड के तीन जवानों को तैनात किया गया है जो अलग–अलग तीन पालियों में ड्यूटी देते हैं। गार्ड भी इतने लापरवाह रहे कि उनके सोते समय ही कुछ बच्चे भाग चुके हैं। कर्मचारी बताते हैं कि कायदे से बालकों के संप्रेक्षण गृह में हाउस फादर के पद पर पुरुष की तैनाती होनी चाहिए, मगर यहां एक महिला कर्मचारी दुर्गेश्वरी पांडेय की ड्यूटी लगाई गई है।

कर्मचारी हैं या गुलाम…छुट्टी के दिन भी ऐसी ड्यूटी ?

महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा की DPO रेणु प्रकाश द्वारा जारी आदेश के मुताबिक जिला बाल संरक्षण इकाई के प्रमुख दयादास महंत के अलावा रवि सिंह, संदीप बिसेन और राजीव राज के अधीन अन्य 8 कर्मचारियों की ड्यूटी बाल संप्रेक्षण गृह में लगाई गई है, जो शनिवार और रविवार को होने वाली छुट्टी के दिन संप्रेक्षण गृह में रात के वक्त रहेंगे और बालकों की देखरेख, निगरानी और व्यवस्थापन करेंगे। विशेष तौर पर उल्लेख है कि अवकाश के दिनों में रात्रिकालीन ड्यूटी देनी है, अर्थात रात्रि जागरण करें और बच्चों की निगरानी करें।

प्रदेश में और कहीं नहीं

कोरबा जिले में जिस तरह जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों और कर्मचारियों की बाल संप्रेक्षण गृह में ड्यूटी लगाई गई है, उस तरह की व्यवस्था प्रदेश में कहीं भी नहीं की गई है। जिनकी ड्यूटी लगाई गई है उनमें जिला बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड के लिए भर्ती किए गए अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। इनमें जिला बाल संरक्षण अधिकारी, संरक्षण अधिकारी संस्थागत देखरेख, विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी, परामर्शदाता, केस वर्कर चाइल्ड हेल्प लाइन, सुपरवाइजर चाइल्ड लाइन, आउट रिच वर्कर और कंप्यूटर ऑपरेटर संलग्न हैं। बताते चलें कि इन सारे स्टाफ का बाल संप्रेक्षण गृह से कोई संबंध नहीं होता, बावजूद इसके इनकी नियम विरुद्ध तरीके से बाल संप्रेक्षण गृह में ड्यूटी लगाई जा रही है, वो भी छुट्टी के दिन।

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ऐसा आदेश जारी करने के पीछे ये है वजह

गौरतलब है कि विगत 31 अगस्त की सुबह शौचालय के रोशनदान को तोड़कर 4 बाल अपराधी फरार हो गए थे । इसके पहले जून में भी दो अपचारी बालक फरार हो गए थे । ये दुःख की बात है कि अभी तक किसी भी बालक का कोई सुराग नहीं मिला है । उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए कोरबा कलेक्टर ने विभाग को जांच के आदेश दिए हैं और 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। संभवतः खुद की साख बचाने और व्यवस्था को सुधारने की दिशा में ऐसा तुगलकी फरमान जारी किया गया है।

बहरहाल कोरबा की DPO का यह आदेश चर्चा में है और निगरानी तथा देखरेख में लगाए गए अधिकारी–कर्मचारी चाहकर भी इस आदेश का विरोध नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन भीतर ही भीतर पनप रहा उनका आक्रोश साफ नजर आता है । अब देखना होगा कि नियम विरुद्ध जारी इस आदेश के बाद कर्मचारी कितनी गंभीरता से अपनी ड्यूटी कर पाते हैं ।

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दीपक साहू

संपादक

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