सुरक्षा ही बचाव: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जहां लोगों के कई काम आसान किए हैं, वहीं साइबर अपराधी भी इसका इस्तेमाल करके ऑनलाइन ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। अब ठग सिर्फ फर्जी लिंक या बैंक के नाम पर आने वाले मैसेज तक सीमित नहीं हैं।
ठग AI की मदद से किसी परिचित की आवाज और चेहरे की नकल करके लोगों को पैसे भेजने के लिए फंसा सकते हैं। ऐसे मामलों में जल्दबाजी और डर का फायदा उठाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने की कोशिश की जाती है।
इसी खतरे को देखते हुए पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने ग्राहकों को AI से जुड़े साइबर हमलों और ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। ऐसे में सवाल है कि अगर किसी अपने की आवाज में पैसे मांगने वाला फोन आए या बैंक अकाउंट बंद होने का मैसेज मिले, तो क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं कि AI से होने वाली ठगी कैसे काम करती है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। याद रखें सुरक्षा ही असली बचाव है। आपकी समझदारी और बुद्धि ही आपको AI से होने वाली ठगी से बचा सकती है।
AI की मदद से कैसे हो सकती है ऑनलाइन ठगी
AI Voice Cloning ऐसा तरीका है, जिसमें किसी व्यक्ति की आवाज जैसी आवाज तैयार की जा सकती है। ठग उपलब्ध ऑडियो या अन्य रिकॉर्डिंग की मदद से किसी परिचित की आवाज की नकल करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके बाद वे फोन करके किसी परेशानी का बहाना बना सकते हैं और तुरंत पैसे भेजने को कह सकते हैं। हालांकि, किसी की आवाज की नकल करने की तकनीक मौजूद होने का मतलब यह नहीं है कि हर अनजान कॉल AI से बनाई गई है। लेकिन सिर्फ आवाज पहचानकर किसी की पहचान पक्की मान लेना भी सुरक्षित नहीं है।
PNB ने ग्राहकों से सतर्क रहने की अपील की
PNB के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO अशोक चंद्रा ने कहा कि साइबर ठगी के कई मामलों में अपराधी लोगों के भरोसे, डर और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। वे परिचितों की आवाज या रूप की नकल करके एमरजेंसी का बहाना बना सकते हैं। फर्जी ईमेल और SMS भी इस तरह भेजे जा सकते हैं कि ग्राहक उन्हें असली समझ लें।बैंक ने इस बात पर जोर दिया कि साइबर सुरक्षा केवल बैंक की जिम्मेदारी नहीं है। ग्राहकों को भी सतर्क रहना चाहिए और किसी संदिग्ध मैसेज या कॉल पर बिना चेक किए कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके
1. पैसे भेजने से पहले दोबारा चेक करें: अगर कोई परिचित फोन करके इमरजेंसी में पैसे मांगता है, तो जल्दबाजी में ट्रांसफर न करें। कॉल काटकर उस व्यक्ति के पहले से सेव नंबर पर फोन करें। जरूरत हो तो परिवार के किसी दूसरे मेम्बर से भी बात करके पुष्टि करें।
2. परिवार के लिए एक सीक्रेट कोड तय करें: परिवार के सदस्य एक ऐसा शब्द या कोड तय कर सकते हैं, जिसे केवल घर के लोग जानते हों। अगर किसी इमरजेंसी में फोन आता है और पैसे मांगे जाते हैं, तो उस कोड के जरिए पहचान की पुष्टि की जा सकती है। हालांकि, कोड को सुरक्षित रखें और अनजान लोगों के साथ साझा न करें।
3. OTP, PIN और पासवर्ड किसी को न बताएं: बैंकिंग से जुड़े OTP, UPI PIN, कार्ड PIN और पासवर्ड प्राइवेट रखें। फोन पर खुद को बैंक अधिकारी बताने वाला व्यक्ति भी अगर ये जानकारी मांगता है, तो उसे साझा न करें। किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने या मोबाइल का रिमोट एक्सेस देने से भी बचें।
4. हर अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखें: ईमेल, सोशल मीडिया और इंटरनेट बैंकिंग के लिए एक ही पासवर्ड इस्तेमाल न करें। अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड रखने से एक अकाउंट की जानकारी लीक होने पर दूसरे अकाउंट भी उसी तरह जोखिम में नहीं पड़ेंगे।
ठगी होने पर क्या करें?
- यदि आपके साथ वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो बिना देर किए 24 घंटे के भीतर साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
- आप आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर भी अपनी शिकायत तुरंत दर्ज करा सकते हैं।

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