उत्तरप्रदेश
लखनऊ/स्वराज टुडे: राजधानी लखनऊ में रोजाना लगने वाला भीषण ट्रैफिक जाम अब आम जनता के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। शहर में राजनीतिक दलों के आए दिन होने वाले धरना-प्रदर्शन, रैलियों और मुख्य सड़कों पर सजने वाले साप्ताहिक (डे-बाय-डे) बाजारों के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आलम यह है कि विधानसभा मार्ग, हज़रतगंज और आसपास के प्रमुख इलाकों में घंटों गाड़ियां रेंगती नजर आती हैं, जिससे न केवल आम नागरिक परेशान हैं, बल्कि आपातकालीन सेवाएं (एम्बुलेंस) भी जाम में फंसने को मजबूर हैं।
आम जनता की दिनचर्या हो रही प्रभावित
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि किसी भी संगठन या दल का प्रदर्शन हो, उसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। ट्रैफिक डाइवर्जन और सड़कों पर लगने वाले अनियंत्रित जाम की वजह से दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, स्कूल-कॉलेज के बच्चे और अस्पतालों का रुख करने वाले मरीज घंटों सड़कों पर फंसे रहते हैं।
जनता की प्रमुख मांगें और संभावित समाधान
शहरवासियों ने जिला प्रशासन, शासन और जनप्रतिनिधियों से अपील करते हुए निम्नलिखित स्थायी कदम उठाने की मांग की है:
● प्रदर्शनों के लिए तय हो निश्चित स्थल: विधानसभा और मुख्य व्यापारिक/आवासीय इलाकों के बीच प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। रैलियों और धरनों के लिए शहर के बाहर या किसी बड़े खुले मैदान (जैसे इको गॉर्डन) में स्थायी जगह निश्चित की जाए, ताकि मुख्य यातायात पर असर न पड़े।
● साप्ताहिक बाजारों के लिए बने वेंडिंग जोन: चौराहों और मुख्य सड़कों पर लगने वाले साप्ताहिक बाजारों को हटाकर निर्धारित मैदानों या प्रॉपर ‘वेंडिंग जोन’ में शिफ्ट किया जाए। इससे छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रहेगी और सड़कों का अतिक्रमण भी समाप्त होगा।
● इमरजेंसी रूट की बहाली: एम्बुलेंस जैसी अति-आवश्यक सेवाओं के लिए ट्रैफिक पुलिस विशेष ग्रीन कॉरिडोर या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि किसी की जान पर न बन आए।
प्रशासन से स्थायी समाधान की अपील
राजधानीवासियों ने उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है कि इस समस्या का जल्द से जल्द कोई ठोस और स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि लखनऊ की रफ्तार और सुरक्षा दोनों बनी रहे।
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