छत्तीसगढ़
रायपुर:/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षाओं में शामिल CGPSC (कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा 2026) अब गंभीर विवादों, अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण पूरे प्रदेश में चर्चा और आक्रोश का विषय बन चुकी है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित यह परीक्षा पूरी तरह संदिग्ध, अपारदर्शी और प्रभावशाली लोगों के दबाव में संचालित की गई, जिससे हजारों मेहनती युवाओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ हुआ है। अपने और अपने माता-पिता के सपनों को साकार करने के तन-मन-धन से दिन रात पढ़ाई करने वाले अभ्यार्थियों के साथ इसे छलावा ना कहें तो क्या कहें ?
क्या रसूखदारों की बपौती बन गयी है CGPSC ?
19 अप्रैल 2026 को आयोजित मुख्य परीक्षा का परिणाम आयोग द्वारा मात्र एक सप्ताह के भीतर जारी कर दिया गया। इतनी कम अवधि में उत्तर पुस्तिकाओं का निष्पक्ष एवं पारदर्शी मूल्यांकन संभव है या नहीं, यह स्वयं एक बड़ा सवाल बन गया है। परिणाम जारी होते ही प्रदेशभर के अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश फैल गया। कई अभ्यर्थियों ने आयोग को लिखित शिकायतें भेजीं, लेकिन आयोग की ओर से कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इससे इस बात की आशंका को पूरा बल मिलता है कि CGPSC अब रसूखदारों की बपौती बन चुकी है।
आयोग की अनदेखी के बाद अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
जब आयोग ने शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया, तब अभ्यर्थियों ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी, लेकिन वहां भी चुप्पी साध ली गई। मजबूर होकर अभ्यर्थियों को उच्च न्यायालय बिलासपुर की शरण लेनी पड़ी। सुनवाई के दौरान भी आयोग की ओर से कोई ठोस एवं संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई लगभग तीन माह आगे बढ़ा दी गई।
हाई कोर्ट की कार्यशैली पर भी उठे सवाल
कल 21 मई को सुनवाई के दौरान परिवादी अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता सुमित सिंह राठौर और दीपा श्रीवास ने न्यायाधीश नरेंद्र कुमार व्यास के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि CGPSC द्वारा आयोजित कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा 2026 की चयन प्रक्रिया में धांधली हुई है । कृपया इसकी गंभीरता पूर्वक जांच होने तक चयनित अभ्यर्थियों के इंटरव्यू व इसके उपरांत दी जाने वाली पोस्टिंग पर रोक लगा दी जाए , लेकिन हाई कोर्ट ने इस अपील की अनदेखी कर अगली सुनवाई के लिए 5 अगस्त 2026 की तारीख दे दिया है। यहीं से अभ्यर्थियों में और अधिक आक्रोश फैल गया। पीड़ित अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला सीधे युवाओं के भविष्य, रोजगार और पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है, ऐसे में लंबे समय तक सुनवाई टालना हजारों युवाओं की उम्मीदों को अधर में छोड़ने जैसा है। अभ्यर्थियों के अनुसार आज 22 मई को चयनित अभ्यर्थियों का इंटरव्यू है, जिसके बाद उन्हें पोस्टिंग दे दी जाएगी। यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो पूरी भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी और बाद में न्याय केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
बगैर आरोपों की जांच के भर्ती प्रक्रिया पर स्टे नहीं लगाकर अगली सुनवाई के लिए 3 महीने की तारीख दे देना इस बात की ओर इशारा करता है कि इस मामले में लीपा पोती की जा रही है ।
न्याय नहीं मिला तो जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
परिवादी पीड़ित अभ्यर्थियों का कहना है कि अब वे इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि यदि तत्काल निष्पक्ष हस्तक्षेप नहीं हुआ तो योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य हमेशा के लिए प्रभावित हो सकता है। कई अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता होती तो आयोग उत्तर पुस्तिकाएं, मूल्यांकन प्रक्रिया और चयन मानदंड सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है।
पीड़ित अभ्यर्थियों का ये है बड़ा आरोप
पीड़ित अभ्यर्थियों द्वारा लगाए गए सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई ऐसे अभ्यर्थियों का इंटरव्यू के लिए चयन हुआ है जिन्होंने मुख्य परीक्षा में उत्तर पुस्तिका लगभग खाली छोड़ दी थी। वहीं दूसरी ओर वर्षों से मेहनत कर रहे योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। एक ही परीक्षा कक्ष से असामान्य रूप से बड़ी संख्या में चयन होना भी पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों में सुरक्षा जांच और ड्रेस कोड के पालन में भी भारी असमानता के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों को विशेष छूट दी गई जबकि सामान्य अभ्यर्थियों पर कठोर नियम लागू किए गए। इससे पूरी प्रक्रिया पहले से प्रभावित और पक्षपातपूर्ण होने की आशंका और गहरी हो गई है।
इसके अलावा मुख्य परीक्षा परिणाम में आरक्षण रोस्टर के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह अपारदर्शी रही और प्रभावशाली लोगों, अधिकारियों के करीबी तथा राजनीतिक पहुंच रखने वाले अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
प्रदेश के हजारों युवा आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वर्षों की मेहनत, परिवार की उम्मीदें और बेरोजगार युवाओं का संघर्ष इस कथित भ्रष्ट व्यवस्था के नीचे दबता दिखाई दे रहा है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह मामला केवल एक भर्ती विवाद नहीं बल्कि प्रदेश के युवाओं के विश्वास और भविष्य को तोड़ने वाला सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
अभ्यर्थियों ने मांग की है कि —
• मुख्य परीक्षा की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए।
• सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक की जाएं।
• इंटरव्यू प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
• मेरिट सूची एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
• दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है —
निष्कर्ष: इसके पूर्व छत्तीसगढ़ पीएससी (CGPSC) घोटाला भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था। यह भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच की परीक्षाओं में हुआ था । अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है। बावजूद इसके प्रदेश की इस अति महत्वपूर्ण परीक्षा में रसूखदारों का वर्चस्व देखने को मिल रहा है । सवाल उठता है कि अब प्रदेश में क्या मेहनत और योग्यता का कोई मूल्य बचा है, या फिर सरकारी भर्तियां केवल पहुंच, प्रभाव और कथित सेटिंग का माध्यम बनती जा रही हैं?
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