• भाजपा नेताओं के धरने से कमीशन का चल रहे खेल पर लगी मुहर
• पूर्व राजस्व मंत्री बोले, अपने ही जनप्रतिनिधि अधिकारियों की खोल रहे कच्चा चिट्ठा
• मंत्री लखनलाल देवांगन पर फिर लगाए कई गंभीर आरोप
कोरबा/स्वराज टुडे: जिला पंचायत कार्यालय के सामने सोमवार को भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन सिंह और सदस्यों के धरने पर बैठने के मामले को लेकर पूर्व राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने श्रम एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा के अपने ही नेता और जनप्रतिनिधि अधिकारियों की कथित कमीशनखोरी से इतने परेशान हो चुके हैं कि उन्हें धरने पर बैठकर नारेबाजी करनी पड़ रही है।
पूर्व मंत्री अग्रवाल ने बयान जारी कर कहा कि प्रदेश में सुशासन तिहार के नाम पर गांव और शहरों में चिलचिलाती धूप में शिविर लगाकर लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है, लेकिन कोरबा में सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों के काम तक नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्य जैसे जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों से मिलने का समय नहीं मिल रहा और उन्हें धरना देकर विरोध जताना पड़ रहा है, तब आम जनता की समस्याओं की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। अग्रवाल ने कहा कि भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों ने खुले तौर पर अधिकारियों पर कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कर्तव्यहीन जिला पंचायत सी.ई.ओ. के खिलाफ तत्काल कार्यवाही की जानी चाहिए. पूर्व राजस्व मंत्री ने कहा कि धरने की सूचना मिलने पर मंत्री लखनलाल देवांगन मौके पर पहुंचे और नाराज नेताओं को मनाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इससे स्पष्ट है कि नाराजगी गहराती जा रही है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को कमीशन लेने की खुली छूट दे दी गई है, जिसके कारण भाजपा के कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि बेहद आक्रोशित हैं। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि जिले में मनमाने तरीके से विभिन्न क्षेत्रों में राखड़ डलवाया जा रहा है। पूर्व मंत्री अग्रवाल ने कहा है कि रेत, डीजल, कबाड़ और कोयला चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही है और इन अवैध गतिविधियों को राजनैतिक संरक्षण दिया जा रहा है ।
पूर्व मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि कोरबा में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी चरम पर पहुंच चुकी है। जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की समस्याओं के समाधान के बजाय अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सत्ता पक्ष के नेता ही अपने काम के लिए धरने पर बैठने को मजबूर हैं, तब आम जनता को न्याय और राहत मिलना मुश्किल दिखाई देता है।
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