कोलकाता/स्वराज टुडे: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने सियासी माहौल को गरमा दिया है. कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में तृणमूल कांग्रेस की एक रैली में तीन नाइजीरियाई नागरिकों की मौजूदगी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा ने इसे विदेशी दखल करार दिया है.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सख्त कार्रवाई के दिए संकेत
भाजपा उम्मीदवार तरुंज्योति तिवारी द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में विदेशी नागरिक पार्टी के पोस्टर और बैज के साथ नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं. इसके बाद भाजपा नेता अमित मालवीय ने चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. मामले की गंभीरता को देखते हुए बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट ने जांच शुरू की और बताया कि विदेशी नागरिक जिज्ञासा के कारण रैली में शामिल हुए थे, लेकिन उनके पास वैध दस्तावेज नहीं पाए गए. इस बीच, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील बन गया है.
वायरल वीडियो से मचा सियासी बवाल
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने इस पूरे विवाद को जन्म दिया. वीडियो में तीन नाइजीरियाई नागरिक तृणमूल कांग्रेस के झंडे और ‘जोराफूल’ बैज के साथ रैली में शामिल दिखाई देते हैं. वे “जॉय बांग्ला” और “तृणमूल कांग्रेस जिंदाबाद” जैसे नारे लगाते नजर आते हैं. भाजपा उम्मीदवार तरुंज्योति तिवारी ने इस वीडियो को साझा करते हुए आरोप लगाया कि विदेशी नागरिकों को चुनाव प्रचार में शामिल किया गया है. इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया और विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ बताया. हालांकि, पुलिस ने प्रारंभिक जांच में कहा कि विदेशी नागरिक जिज्ञासा के कारण रैली में शामिल हुए थे.
चुनाव आयोग का सख्त रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने पुलिस को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विदेशी नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसमें गिरफ्तारी, वीजा रद्द करना और उन्हें उनके देश वापस भेजना शामिल हो सकता है. भारतीय कानून के तहत विदेशी नागरिकों को किसी भी प्रकार के चुनावी प्रचार में भाग लेने की अनुमति नहीं है. चुनाव आयोग का यह सख्त रुख चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
भाजपा ने चुनाव आयोग से की शिकायत
भाजपा ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. भाजपा नेता अमित मालवीय द्वारा हस्ताक्षरित शिकायत में आरोप लगाया गया कि राजारहाट-गोपालपुर सीट से तृणमूल उम्मीदवार अदिति मुंशी ने विदेशी नागरिकों को अपने चुनाव प्रचार में शामिल किया. शिकायत में कहा गया कि विदेशी नागरिकों द्वारा पार्टी के झंडे उठाना और नारे लगाना भारतीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है. भाजपा ने इस मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की है, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है.
टीएमसी ने आरोपों को बताया निराधार
तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. अदिति मुंशी के पति देबराज चक्रवर्ती ने कहा कि विदेशी नागरिकों को उम्मीदवार के साथ नहीं देखा गया और उन्हें जानबूझकर विवाद में घसीटा जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि राजारहाट-न्यू टाउन क्षेत्र फुटबॉल संस्कृति के लिए जाना जाता है, जहां कई नाइजीरियाई खिलाड़ी स्थानीय क्लबों से जुड़े हुए हैं. उनके अनुसार, ये लोग महज जिज्ञासा के कारण रैली में शामिल हुए थे और उनका चुनाव प्रचार से कोई संबंध नहीं था.
2019 की घटना से जुड़ती कड़ी
यह पहला मौका नहीं है जब तृणमूल कांग्रेस के प्रचार में विदेशी नागरिकों की भागीदारी को लेकर विवाद हुआ हो. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान बांग्लादेशी अभिनेता फिरदौस अहमद ने रायगंज में तृणमूल उम्मीदवार के लिए प्रचार किया था. उस समय केंद्र सरकार ने उनका वीजा रद्द कर “लीव इंडिया” नोटिस जारी किया था. वर्तमान घटना को उसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है, जिससे चुनाव आयोग और प्रशासन की सतर्कता बढ़ गई है.
कानूनी प्रावधान और संभावित कार्रवाई
भारतीय कानून, विशेष रूप से इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट, विदेशी नागरिकों को राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से रोकता है. बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट ने बताया कि संबंधित विदेशी नागरिकों के पास वैध दस्तावेज नहीं थे, जिसके चलते उनके खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 23 के तहत मामला दर्ज किया गया है. यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें हिरासत में लेकर वीजा रद्द किया जा सकता है और बाद में उनके देश वापस भेजा जा सलकता है.
चुनावी माहौल पर संभावित प्रभाव
इस विवाद ने पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है. भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. जहां भाजपा इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विदेशी हस्तक्षेप बता रही है, वहीं तृणमूल इसे राजनीतिक साजिश करार दे रही है. आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे और यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका मतदाताओं पर क्या प्रभाव पड़ता है.






